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तशरीह के साथ हदीसें

जिन्न

8 हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब खाना खाते, तो अपनी तीनों उँगलियों को चाट लेते।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه كان إذا أكل طعاما، لعق أصابعه الثلاث. قال: وقال: «إذا سقطت لُقمة أحدكم فليُمِطْ عنها الأذى، وليأكلها ولا يَدَعْهَا للشيطان» وأمر أن تُسْلَتَ القَصْعَةُ، قال: «فإنكم لا تدرون في أيِّ طعامكم البركة» وعن جابر بن عبد الله رضي الله عنه أن رسولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قالَ: "إنّ الشيطانَ يَحضُرُ أحدَكُم عندَ كلِ شيءٍ من شَأنِه، حتى يَحضُرَهُ عندَ طعامِهِ، فإذا سَقطتْ لقمةُ أحدِكُم فليَأخُذْها فَلْيُمِطْ ما كانِ بها من أذى، ثم ليَأكُلْها ولا يَدَعْها للشيطانِ، فإذا فَرَغَ فليَلْعَقْ أصابعَهُ، فإنه لا يَدري في أيِّ طَعامه البركة"
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब खाना खाते, तो अपनी तीनों उँगलियों को चाट लेते। वह कहते हैं कि आपने फ़रमायाः "जब तुममें से किसी का कोई लुक़मा गिर जाए, तो उसे उठाकर गंदगी साफ करके खा ले तथा उसको शैतान के लिए न छोड़े।" आपने यह भी आदेश दिया कि प्याले को उँगली से पोंछकर साफ कर लिया जाए फ़रमाया: "तुम नहीं जानते कि खाने के किस भाग में बरकत है।" तथा जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तुम्हारे प्रत्येक कार्य के समय शैतान हाज़िर रहता है। यहाँ तक कि खाने के समय भी मौजूद होता है। अतः जब तुममें से किसी का कोई लुक़मा गिर जाए, तो उसे उठाकर गंदगी साफ़ करके खा ले और उसको शैतान के लिए न छोड़े। फिर जब खाना समाप्त कर ले, तो अपनी उँगलियों को चाट ले। क्योंकि वह नहीं जानता कि खाने किस भाग में बरकत है।"
इसे इमाम मुस्लिम ने दोनों रिवायतों के साथ नक़ल किया है।दर्जादोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين؛ تأليف فيصل آل مبارك، تحقيق د. عبدالعزيز آل حمد، دار العاصمة-الرياض، الطبعة الأولى، 1423هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن-الرياض، 1426هـ. شرح صحيح مسلم؛ للإمام محي الدين النووي، دار الريان للتراث-القاهرة، الطبعة الأولى، 1407هـ. صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبدالباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. فتح الباري بشرح صحيح البخاري؛ للحافظ أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، دار المعرفة-بيروت. كنوز رياض الصالحين؛ فريق علمي برئاسة أ.د. حمد العمار، دار كنوز إشبيليا-الرياض، الطبعة الأولى، 1430هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ.

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फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं, जिन धधकती आग से पैदा किए गए हैं और आदम (अलैहिस्सलाम) उस चीज़ से पैदा किए गए हैं, जिसके बारे में तुम्हें बताया गया है।

عن عائشة رضي الله عنه قالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «خُلقت الملائكة من نور، وخُلق الجَانُّ من مَارِجٍ من نار، وخُلق آدم مما وُصِفَ لكم».
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं, जिन धधकती आग से पैदा किए गए हैं और आदम (अलैहिस्सलाम) उस चीज़ से पैदा किए गए हैं, जिसके बारे में तुम्हें बताया गया है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने रचना के आरंभ के बारे में बताते हुए कहा है कि फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं। यही कारण है कि कोई भी फ़रिश्ता अल्लाह की अवज्ञा और उसकी इबादत से अभिमान नहीं करता। जिन्न आग से पैदा किए गए हैं। अतः उनमें से बहुतों के अंदर क्रोध, अशिष्टता और सरकशी पाई जाती है। जबकि आदम उस चीज़ से पैदा किए गए हैं, जिसका उल्लेख तुम्हारे लिए कर दिया गया है। यानी खनखनाती ठीकरी जैसे सूखे गारे से। क्योंकि मिट्टी गारा बनी और गारा ठीकरा। उसी से आदम -अलैहिस्सलाम- पैदा किए गए।

हवाला

- صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. -التَّنويرُ شَرْحُ الجَامِع الصَّغِيرِ محمد بن إسماعيل الصنعاني، المحقق: د. محمَّد إسحاق محمَّد إبراهيم مكتبة دار السلام، الرياض -الطبعة: الأولى، 1432 هـ - 2011 م.

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हर वह माल, जो मैंने अपने बंदे को दिया है, वह उसके लिए हलाल है, मैंने अपने सारे बंदों को एक अल्लाह की वंदना करने वाला बनाकर पैदा किया है, फिर शैतान उनके पास आए और उन्हें उनके धर्म से बहकाने लगे

عن عياض بن حمار المجاشعي رضي الله عنه ، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم ، قال ذات يوم في خطبته: «ألَا إن ربي أمرني أن أُعَلِّمَكم ما جَهِلتم، ممَّا علَّمني يومي هذا، كلُّ مالٍ نَحَلتُه عبدًا حلال، وإني خلقتُ عبادي حُنَفاء كلهم، وإنهم أتتهم الشياطين فاجتالتهم عن دينهم، وحَرَّمت عليهم ما أحللتُ لهم، وأمرتهم أن يُشركوا بي ما لم أُنزِّل به سلطانا، وإن الله نظر إلى أهل الأرض، فمَقَتهم عربهم وعَجَمهم، إلَّا بقايا من أهل الكتاب، وقال: إنما بعثتُك لأبتليَك وأبتلي بك، وأنزلتُ عليك كتابًا لا يغسله الماءُ، تقرؤه نائمًا ويقظان، وإنَّ اللهَ أمرني أن أحرِق قُرَيشًا، فقلت: رب إذا يَثْلُغوا رأسي فيدعوه خُبْزة، قال: استخرجهم كما استخرجوك، واغزهم نُغزك، وأنفق فسننفق عليك، وابعث جيشا نبعث خمسة مثله، وقاتل بمن أطاعك مَن عصاك، قال: وأهل الجنة ثلاثة ذو سلطان مُقْسِط مُتَصَدِّق مُوَفَّق، ورجل رحيم رقيق القلب لكل ذي قربى ومسلم، وعفيف متعفِّف ذو عيال، قال: وأهل النار خمسة: الضعيف الذي لا زَبْر له، الذين هم فيكم تبعا لا يبتغون أهلا ولا مالا، والخائن الذي لا يخفى له طمع، وإن دقَّ إلا خانه، ورجل لا يُصبح ولا يمسي إلا وهو يخادعك عن أهلك ومالك «وذكر» البخل أو الكذب والشِّنظير الفحَّاش».
इयाज़ बिन हिमार मुजाशिई (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने संबोधन में फ़रमाया: सुन लो, मेरे रब ने मुझे आदेश दिया है कि उसने आज मुझे जो बातें सिखाई हैं, उनमें से वह बातें मैं तुम्हें बता दूँ, जो तुम नहीं जानते। (अल्लाह तआला का फ़रमान है) हर वह माल, जो मैंने अपने बंदे को दिया है, वह उसके लिए हलाल है। मैंने अपने सारे बंदों को एक अल्लाह की वंदना करने वाला बनाकर पैदा किया है। फिर शैतान उनके पास आए और उन्हें उनके धर्म से बहकाने लगे। उनपर वह चीज़ें हराम कर दीं, जो मैंने उनके लिए हलाल की थीं। उन्हें आदेश दिया कि उन चीज़ों को मेरा साझी ठहराएँ, जिनके साझी होने की कोई दलील मैंने नहीं उतारी है। अल्लाह ने धरती की ओर देखा, तो कुछ बचे- खुचे अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) को छोड़कर उनके अरब तथा ग़ैरअरब सबसे नाराज़ हुआ तथा फ़रमाया: मैंने तुम्हें इसलिए भेजा है, ताकि तुम्हें आज़माऊँ और तुम्हारे द्वारा अन्य लोगों को भी। मैंने तुमपर एक ऐसी किताब उतारी है, जिसे पानी धो नहीं सकता। तुम उसे सोते- जागते पढ़ते हो। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं क़ुरैश को जला डालूँ। मैंने कहा: ऐ मेरे रब! तब तो वे मेरे सर को कुचलकर रोटी बना देंगे। अल्लाह ने कहा: उन्हें निकालो, जैसे उन्होंने तुम्हें निकाला, उनसे युद्ध करो, हम तुम्हें युद्ध करने की शक्ति प्रदान करेंगे, ख़र्च करो, हम तुमपर ख़र्च करेंगे, तुम सेना भेजो, हम उस जैसी पाँच सेनाएँ भेजेंगे तथा अपने मानने वालों को साथ लेकर उन लोगों से युद्ध करो, जो नहीं मानते। अल्लाह ने कहा: जन्नती तीन प्रकार के लोग होंगे: न्यायकारी, सदक़ा करने वाला और अल्लाह की ओर से सत्य पर चलने का सामर्थ्य प्राप्त किया हुआ बादशाह, सभी रिश्तेदारों तथा मुसलमानों के लिए नर्म दिल तथा दयालु व्यक्ति एवं पाकदामन और माँगने से बचने वाला परिवार वाला। अल्लाह ने कहा: जहन्नम में पाँच प्रकार के लोग दाख़िल होंगे: बुद्धिहीन कमज़ोर जो तुम्हारे अधीन हो और परिवार तथा धन की चाहत न रखता हो, ऐसा छल करने वाला, जिसका लालच छुपा नहीं रहता, छोटी से छोटी चीज़ के बारे में भी छल करने पर उतर आता हो और ऐसा व्यक्ति, जो तुम्हें सुबह व शाम तुम्हारे परिवार तथा धन के बारे में धोखा दे। तथा कंजूस अथवा झूठे व्यक्ति और ऐसे बदचलन एवं अशिष्ट आदमी का भी ज़िक्र किया, जो गंदी तथा अश्लील भाषा प्रयोग करता हो।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت، الطبعة: الثانية، 1392هـ. مختار الصحاح، لزين الدين أبو عبد الله محمد الحنفي الرازي، تحقيق: يوسف الشيخ محمد، نشر: المكتبة العصرية - الدار النموذجية، بيروت – صيدا، لطبعة: الخامسة، 1420هـ / 1999م. التمهيد لشرح كتاب التوحيد-صالح بن عبد العزيز آل الشيخ، -الناشر: دار التوحيد-الطبعة: الأولى، 1424هـ - 2003م. الملخص في شرح كتاب التوحيد-صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان-دار النشر: دار العاصمة الرياض- الطبعة الأولى 1422هـ- 2001م. القول المفيد على كتاب التوحيد-العثيمين-دار ابن الجوزي، المملكة العربية السعودية-الطبعة: الثانية, محرم 1424هـ.

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जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर डूब जाए तथा सूरज डूबने एवं निकलने का समय देखकर ही नमाज़ न पढ़ो; क्योंकि सूरज शैतान के दो सींगों के बीच में निकलता है

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إذا طلعَ حاجبُ الشمس فدَعُوا الصلاةَ حتى تَبْرُزَ، وإذا غاب حاجبُ الشمس فدَعُوا الصلاةَ حتى تغيبَ، ولا تَحَيَّنُوا بصلاتِكم طُلُوعَ الشمسِ ولا غروبَها، فإنَّها تطلُعُ بيْن قَرْنَيْ شيطان، أو الشيطان».
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर डूब जाए। तथा सूरज डूबने एवं निकलने का समय देखकर ही नमाज़ न पढ़ो; क्योंकि सूरज शैतान की दो सींगों के बीच में निकलता है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، نشر: دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422ه. - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. - عمدة القاري شرح صحيح البخاري، لمحمود بن أحمد بن موسى الحنفى بدر الدين العينى، الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. - مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م. - شرح الطيبي على مشكاة المصابيح المسمى بـ (الكاشف عن حقائق السنن), شرف الدين الحسين بن عبد الله الطيبي, المحقق: د. عبد الحميد هنداوي, الناشر: مكتبة نزار مصطفى الباز - مكة المكرمة - الرياض, الطبعة: الأولى، 1417 هـ - 1997 م.

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मेरे पास जिन्नों की ओर से एक बुलाने वाला आया था, अतः, मैं उसके साथ गया और उन्हें क़ुरआन सुनाया

عن عامر، قال: سألتُ عَلْقَمةَ: هل كان ابنُ مسعود شَهِدَ مع رسول الله صلى الله عليه وسلم ليلةَ الجنِّ؟ قال: فقال عَلْقَمةُ، أنا سألتُ ابنَ مسعود فقلتُ: هل شَهِدَ أحدٌ منكم مع رسول الله صلى الله عليه وسلم ليلةَ الجنِّ؟ قال: لا، ولكنَّا كنَّا مع رسول الله ذاتَ ليلة ففَقَدْناه فالتمسناه في الأودية والشِّعاب. فقلنا: استُطِير أو اغْتِيل. قال: فبِتْنَا بِشَرِّ ليلة بات بها قومٌ، فلما أصبحْنا إذا هو جاء من قِبَل حِرَاء. قال: فقلنا يا رسول الله فقدْناك فطلبْناك فلم نجدْك، فبِتْنَا بِشَرِّ ليلة بات بها قوم. فقال: «أتاني داعي الجنِّ فذهبتُ معه فقرأتُ عليهم القرآنَ» قال: فانطلقَ بنا فأرانا آثارَهم وآثارَ نِيرانِهم وسألوه الزاد فقال: «لكم كلُّ عظم ذُكر اسمُ الله عليه يقع في أيديكم أوفر ما يكون لحمًا، وكلُّ بَعْرة عَلَفٌ لدوابِّكم» . فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «فلا تسْتَنْجُوا بهما فإنَّهما طعامُ إخوانِكم».
आमिर कहते हैं कि मैंने अलक़मा से पूछा: क्या अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) जिन्नों से मुलाक़ात वाली रात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मौजूद थे? उनका कहना है कि अलक़मा ने उत्तर दिया: ख़ुद मैंने अब्दुल्लाह बिन मसऊद से पूछा था कि क्या जिन्नों वाली रात आपमें से कोई अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मौजूद था? तो उन्होंने कहा था: नहीं, परन्तु हम एक रात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे। अचानक आप खो गए। हमने आपको घाटियों और पहाड़ी रास्तों में ढूँढा। (लेकिन आप न मिल सके।) अतः हमने कहा: आपको या तो जिन्न उड़ा ले गए या चुपके से क़त्ल कर दिया गया। उनका कहना है कि हमने वह बदतरीन रात गुज़ारी, जो कोई क़ौम गुज़ार सकती है। सुबह हुई, तो देखा गया कि आप हिरा पर्वत की ओर से आ रहे हैं। उनका कहना है कि हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! हमने आपको गुम पाया, तो बहुत ढूँढा, लेकिन आप न मिल सके। फिर हमने वह बदतरीन रात गुज़ारी, जो कोई क़ौम गुज़ार सकती है। यह सुनकर आपने फ़रमाया: मेरे पास जिन्नों की ओर से एक बुलाने वाला आया था। अतः, मैं उसके साथ गया और उन्हें क़ुरआन सुनाया। अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि आप हमें लेकर गए और उनके तथा उनकी आग के निशान दिखाए। उन्होंने आपसे आहार माँगा, तो आपने कहा: तुम्हारे लिए हर वह हड्डी है, जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया हो। जैसे ही वह तुम्हारे हाथ में आएगी, उसमें भरपूर मात्रा में माँस लग जाएगा। तथा सारी मेंगनियाँ तुम्हारे पशुओं का चारा हैं। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: अतः, तुम हड्डी तथा गोबर से इस्तिंजा न करो; क्योंकि ये तुम्हारे भाइयों का भोजन हैं।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

-صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. -تاج العروس من جواهر القاموس، للزبيدي، نشر: دار الهداية. -المصباح المنير في غريب الشرح الكبير، لأحمد بن محمد بن علي الفيومي، الناشر: المكتبة العلمية – بيروت. -المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج، للنووي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت، الطبعة: الثانية، 1392ه. -مختار الصحاح، لزين الدين أبو عبد الله محمد بن أبي بكر بن عبد القادر الحنفي الرازي، تحقيق: يوسف الشيخ محمد، نشر: المكتبة العصرية - الدار النموذجية، بيروت – صيدا، لطبعة: الخامسة، 1420هـ / 1999م. -عمدة القاري شرح صحيح البخاري، لمحمود بن أحمد بن موسى الحنفى بدر الدين العينى، الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. -التوضيح لشرح الجامع الصحيح, عمر بن علي بن أحمد ابن الملقن, ت: دار الفلاح للبحث العلمي وتحقيق التراث, دار النوادر، دمشق – سوريا, الطبعة: الأولى، 1429 هـ - 2008 م. -الإفصاح عن معاني الصحاح، ليحيى بن هبيرة بن محمد بن هبيرة الذهلي الشيباني، المحقق: فؤاد عبد المنعم أحمد، الناشر: دار الوطن، سنة النشر: 1417هـ.

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इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है, फिर अपनी सेनाओं को भेजता है, उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव करने वाला होता है

عن جابر رضي الله عنه ، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إنَّ إبليسَ يضعُ عرْشَه على الماء، ثم يَبْعَث سَراياه، فأدْناهم منه منزِلةً أعظمُهم فتنةً، يجيء أحدهم فيقول: فعلتُ كذا وكذا، فيقول: ما صنعتَ شيئًا. قال: ثم يجيء أحدهم فيقول: ما تركتُه حتى فَرَّقتُ بينه وبين امرأتِه، قال: فيُدْنِيه منه ويقول: نعم أنت». قال الأعمش: أراه قال: «فيَلْتَزِمُه».
जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंने (आज) ऐसा और ऐसा किया है। इब्लीस कहता है: तुमने कुछ नहीं किया। फिर कोई आता है और कहता है: मैंने अमुक व्यक्ति को नहीं छोड़ा, यहाँ तक कि उसके तथा उसकी पत्नी के बीच जुदाई डाल दी। तब शैतान उसे अपने निकट करता है और कहता है: हाँ, तुमने अच्छा किया है। आमश कहते हैं: मैं समझता हूँ कि उन्होंने यह भी कहा था: फिर वह उसे सीने से लगा लेता है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، نشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. - إكمال المعلم بفوائد مسلم لعياض بن موسى بن عياض بن عمرون اليحصبي السبتي، المحقق: الدكتور يحيى إسماعيل، الناشر: دار الوفاء للطباعة والنشر والتوزيع، مصر، الطبعة: الأولى، 1419 هـ - 1998 م. - مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م.

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सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने शैतान के फ़रेब को बुरे ख़याल की ओर फेर दिया।

عن ابن عباس رضي الله عنهما قال: جاءَ رجُلُ إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسولَ اللهِ، إن أحدنا يجدُ في نفسِهِ -يُعرِّضُ بالشَّيءِ- لأَن يكونَ حُمَمَةً أحَبُّ إليه من أن يتكلَّم بِهِ، فقال: «اللهُ أكبرُ، اللهُ أكبرُ، الحمدُ لله الذي ردَّ كيدَه إلى الوسوسَةِ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : एकि व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से एक व्यक्ति अपने दिल में ऐसी बातें पाता है (वह इशारे में बात कर रहा था) कि कोयला बन जाना उनको बोलने से अधिक प्रिय लगता है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने शैतान के फ़रेब को बुरे ख़याल की ओर फेर दिया।"
इसे अबू दावूद ने तथा नसई ने अल-कुबरा में रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से किसी-किसी के दिल में ऐसी बातें आजाती हैं, जिसके बारे में बात करना इतना कठिन है कि राख बन जाना उसे बोलने से प्रिय लगता है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो बार अल्लाहु अकबर कहा और अल्लाह की प्रशंसा की कि उसने शैतान के षडयंत्र को बुरे ख़याल तक ही सीमित रख दिया।

फ़ायदे
  1. शैतान को जैसे ही अवसर मिलता है, ईमान वालों के दिलों में बुरे ख़याल डाल देता है, ताकि उनको ईमान के मार्ग से हटाकर अविश्वास के मार्ग पर लगा सके।
  2. ईमान वालों के सामने शैतान कमज़ोर पड़ जाता है। वह दिल के अंदर बुरे ख़याल डालने से आगे नहीं बढ़ पाता।
  3. मोमिन को शैतान के द्वारा दिल में डाले गए बुरे ख़यालों को अस्वीकार करना और उनका मुक़ाबला करना चाहिए।
  4. कोई अच्छी चीज़ नज़र आने पर या किसी बात पर आश्चर्य होने पर अल्लाहु अकबर कहना चाहिए।
  5. एक मुसलमान को जो भी बात समझ में न आए, जानकार लोगों से उसके बारे में पूछ लेना चाहिए।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 435) (5112) السنن الكبرى للنسائي (9/ 249) (10435)، شرح سنن أبي داود للعباد (580/ 28)، صحيح مسلم (1/ 119) (132)، شرح سنن أبي داود لابن رسلان (19/370)، ومرقاة الصعود (3/1301).

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यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो

عن عُثْمَانَ بْنَ أَبِي الْعَاصِ رضي الله عنه: أنه أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنَّ الشَّيْطَانَ قَدْ حَالَ بَيْنِي وَبَيْنَ صَلَاتِي وَقِرَاءَتِي يَلْبِسُهَا عَلَيَّ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «ذَاكَ شَيْطَانٌ يُقَالُ لَهُ خِنْزَِبٌ، فَإِذَا أَحْسَسْتَهُ فَتَعَوَّذْ بِاللهِ مِنْهُ، وَاتْفُلْ عَلَى يَسَارِكَ ثَلَاثًا»، قَالَ: فَفَعَلْتُ ذَلِكَ فَأَذْهَبَهُ اللهُ عَنِّي.
उसमान बिन अबुल आस रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए और कहने लगे : ऐ अल्लाह के रसूल! शैतान मेरे, मेरी नमाज़ तथा मेरी तिलावत के बीच रुकावट बनकर खड़ा हो जाता है। मुझे उलझाने के प्रयास करता है। यह सुन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो।" उनका कहना है कि मैंने इसपर अमल करना शुरू किया, तो अल्लाह ने मेरी इस परेशानी को दूर कर दिया।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

उसमान बिन अबुल आस रज़ियल्लाहु अनहु अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए और कहने लगे कि ऐ अल्लाह के रसूल! शैतान मेरे तथा मेरी नमाज़ के बीच रुकावट बनकर खड़ा हो जाता है, मुझे एकाग्र होकर नमाज़ पढ़ने नहीं देता और मेरी तिलावत में संदेह पैदा कर देता है। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनसे कहा : यह वही शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें ऐसा लगे कि वह व्यवधान डाल रहा है, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो। उसमान रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : जब मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बताए हुए इस पद्धति पर अमल करना शुरू कर दिया, तो अल्लाह ने मेरी इस परेशानी को दूर कर दिया।

फ़ायदे
  1. विनयशील होकर तथा दिल को उपस्थित रखकर नमाज़ पढ़ने का महत्व। साथ ही यह कि शैतान नमाज़ में व्यवधान डालने और संदेह पैदा करने के प्रयास में रहता है।
  2. जब शैतान नमाज़ के बीच दिल में बुरा ख़्याल डाले, तो उससे अल्लाह की शरण माँगना और बाएँ ओर तीन बार थुत्कारना मुसतहब है।
  3. सहाबा के पास जब कोई परेशानी आती, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास जाते और उसे आपसे हल करवाते।
  4. सहाबा के दिल ज़िंदा थे और उनका उद्देश्य आख़िरत था।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 1728) (2203)، إكمال المعلم (7/110)، شرح النّووي على مسلم (14/190)، البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (36/ 136).

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