عَن أُمِّ الدَّرْدَاءِ وَ أَبِي الدَّرداءِ رَضيَ اللهُ عنهما أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ: «دَعْوَةُ الْمَرْءِ الْمُسْلِمِ لِأَخِيهِ بِظَهْرِ الْغَيْبِ مُسْتَجَابَةٌ، عِنْدَ رَأْسِهِ مَلَكٌ مُوَكَّلٌ كُلَّمَا دَعَا لِأَخِيهِ بِخَيْرٍ، قَالَ الْمَلَكُ الْمُوَكَّلُ بِهِ: آمِينَ وَلَكَ بِمِثْلٍ».
उम्मे दरदा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः मुसलमान की, अपने भाई के हक़ में, उसकी अनुपस्थिति में की गई दुआ क़बूल होती है। उसके सिर के निकट एक फ़रिश्ता नियुक्त होता है। वह जब भी अपने भाई के लिए कोई अच्छी दुआ करता है, वह नियुक्त फ़रिश्ता कहता है कि अल्लाह इसे ग्रहण करे तथा तुझे भी ऐसी ही भलाई मिले।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
صحيح مسلم (4/ 2094) (2733).
بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 585).
نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 1018).
شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (6/ 48).
كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (17/ 510).
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي ذر رضي الله عنه مرفوعاً: «إني أرى ما لا ترون، أطَّتِ السماء وحُقَّ لها أن تَئِطَ، ما فيها موضع أربع أصابع إلا ومَلَكٌ واضع جبهته ساجدا لله تعالى، والله لو تعلمون ما أعلم، لضحكتم قليلا ولبكيتم كثيرا، وما تلذذتم بالنساء على الفُرُشِ، ولخرجتم إلى الصُّعُداتِ تَجْأَرُون إلى الله تعالى».
अबूज़र (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "मैं वह कुछ देखता हूँ, जो तुम नहीं देखते। आकाश चरचराता है और उसका चरचराना उचित भी है। उसमें चार उंगली की भी कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ कोई फ़रिश्ता पेशानी रखकर अल्लाह तआना को सजदा न कर रहा हो। अल्लाह की क़सम, अगर तुम वह कुछ जान लो, जो मैं जानता हूँ, तो तुम हँसो कम और रोओ अधिक तथा बिसतरों पर स्त्रियों के साथ आनंद न ले सको एवं अल्लाह से फ़रियाद करते हुए रास्तों की ओर निकल जाओ।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)
हवाला
- دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي، بيروت.
- بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1418ه.
- نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ.
- سنن الترمذي، لمحمد بن عيسى، الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر ومحمد فؤاد عبد الباقي وإبراهيم عطوة عوض، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي - مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ - 1975م.
- مسند الإمام أحمد بن حنبل المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001م.
- سنن ابن ماجه :لابن ماجه أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي.
- صحيح الجامع الصغير وزياداته، الألباني، دار المكتب الإسلامي.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعًا: «صلاة الرجل في جماعة تَضعُفُ على صلاته في بيته وفِي سُوقِه خمسا وعشرين ضِعفًا، وذلك: أَنَّه إِذَا تَوَضَّأ، فَأَحسَن الوُضُوء، ثمَّ خرج إلى المسجد لاَ يُخرِجُهُ إلاَّ الصلاة؛ لَم يَخْطُ خُطوَةً إِلاَّ رُفِعَت له بِها درجة، وَحُطَّ عَنهُ بها خطيئة، فإذا صلَّى لم تزل الملائكة تُصَلِّي عليه، ما دام في مُصَلاَّه: اللهُمَّ صَلِّ عليه، اللهم اغفِر له، اللهم ارْحَمه، ولا يزال في صلاة ما انتظر الصلاة».
अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "आदमी को जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से घर तथा बाज़ार में नमाज़ पढ़ने की तुलना में पच्चीस गुना अधिक सवाब मिलता है। वह इसलिए कि जब अच्छी तरह वज़ू करता है, फ़िर मस्जिद सिर्फ नमाज़ के लिए ही निकलता है, तो प्रत्येक क़दम पर उसकी एक श्रेणी ऊँची की जाती है तथा उसका एक पाप मिटाया जाता है। फिर जब नमाज ख़त्म हो जाती है, तो फ़रिश्ते उसके लिए प्रार्थना करते रहते हैं, जब तक वह मस्जिद में होता है। वे कहते रहते हैंः ऐ अल्लाह, उसपर दया कर। ऐ अल्लाह, उसे क्षमा कर दे। ऐ अल्लह, उसपर रहम कर। तथा वह जब तक नमाज़ की प्रतीक्षा में रहता है, उस समय तक नमाज़ ही में होता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने बताया है कि आदमी जब जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ता है, उसे उसकी घर अथवा बाज़ार में अकेले पढ़ी गई नमाज़ की तुलना में पच्चीस गुना अधिक नेकी मिलती है। यहाँ जमाअत में नमाज़ पढ़ने से तुलना यही बताती है कि घर में पढ़ी गई नमाज़ से आशय घर में अकेले पढ़ी गई नमाज़ है। वैसे भी, घर और बाज़ार में नमाज़ आम तौर पर अकेले ही पढ़ी जाती है। शब्द (وذلك) से यदि जमाअत वाली नमाज़ की अकेले पढ़ी जाने वाली नमाज़ से उत्तम होना मुराद है, तो इसका अभिप्राय यह है कि यह मस्जिद की जमाअत के साथ खास है। और शब्द (أنه) से आशय या तो परिस्थिति है या वह आदमी, जो अच्छी तरह, अर्थात सुन्नतों का ख़याल रखते हुए पूरे तौर पर वुज़ू करके केवल नमाज़ पढ़ने के उद्देश्य से मस्जिद के लिए निकलता है, (यदि वह किसी और उद्देश्य से निकलता है या कोई और उद्देश्य भी शामिल होता है, तो वह उस फ़ज़ीलत से वंचित रहेगा, जिसका ज़िक्र आगे आ रहा है) तो उसके हर क़दम के बदले में उसे एक श्रेणी ऊँचा कर दिया जाता है और उसका एक गुनाह मिटा दिया जाता है। वैसे, यहाँ गुनाह से आशय अल्लाह के हक़ से संबंधित छोटे गुनाह हैं। फिर जब वह नमाज़ पढ़ता है, तो फ़रिश्ते उसके लिए दया की दुआ तथा क्षमा याचना करते रहते हैं। यह सिलसिला उस समय तक जारी रहता है, जब तक वह नमाज़ के स्थान में बैठा रहता है और उसका वुज़ू टूट नहीं जाता। यह भी संभव है कि यहाँ केवल नमाज़ के स्थान में होना मुराद हो, चाहे लेटा हुआ ही क्यों न हो। तथा वह जब तक वह नमाज़ की प्रतीक्षा में रहता है, नमाज़ ही में होता है।
हवाला
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، إسماعيل بن محمد الأنصاري، دار الفكر، دمشق، الطبعة: الأولى، 1381هـ.
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة، 1426هـ.
تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، محمد بن صالح العثيمين، مكتبة الصحابة، الإمارات، الطبعة: الأولى، 1426هـ.
عمدة الأحكام من كلام خير الأنام -صلى الله عليه وسلم-، لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، الطبعة: الثانية، 1408هـ.
صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى، 1422هـ.
صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعن عائشة رضي الله عنها قالت: قال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم : «هذا جِبْرِيلُ يَقْرَأُ عليك السَّلام» قالت: قلت: وعليه السلام ورحمة الله وبركاته.
وهكذا وقع في بعض روايات الصحيحين: «وبركاته» وفي بعضها بحذفها، وزيادة الثقة مقبولة.
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे कहाः यह जिबरील हैं, तुझे सलाम कह रहे हैं। उनका कहना है कि मैंने कहाः उनपर सलामती हो, अल्लाह की कृपा हो और उसकी बरकतें हों।
बुख़ारी और मुस्लिम की कुछ रिवायतों में "وبركاته" शब्द आया हुआ है, जबकि कुछ रिवायतों में नहीं भी है। अलबत्ता, विश्वस्त वर्णनकर्ता का इज़ाफ़ा ग्रहणयोग्य है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
نزهة المتقين، تأليف جمعٌ من المشايخ، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397ه.
صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ.
صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت.
شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426هـ.
رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د.ماهر بن ياسين الفحل، الطبعة الأولى، 1428هـ.
دليل الفالحين، تأليف: محمد بن علان، الناشر: دار الكتاب العربي، نسخة الكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر.
منار القاري، تأليف: حمزة محمد قاسم، الناشر: مكتبة دار البيان، عام النشر: 1410هـ.
यह हदीस HadeethEnc.com परعَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: حَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ المَصْدُوقُ: «إِنَّ أَحَدَكُمْ يُجْمَعُ خَلْقُهُ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا، ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَ ذَلِكَ، ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَ ذَلِكَ، ثُمَّ يُرْسَلُ إلَيْهِ المَلَكُ فَيَنْفُخُ فِيهِ الرُّوحَ، وَيُؤْمَرُ بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ: بِكَتْبِ رِزْقِهِ، وَأَجَلِهِ، وَعَمَلِهِ، وَشَقِيٍّ أَوْ سَعِيدٍ؛ فَوَالَّذِي لَا إلَهَ غَيْرُهُ إنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الجَنَّةِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إلَّا ذِرَاعٌ فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ فَيَدْخُلُهَا، وَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إلَّا ذِرَاعٌ، فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الجَنَّةِ فَيَدْخُلُهَا».
अबू अब्दुर्रहमान अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जो कि सच्चे थे और जिनकी सच्चाई सर्वमान्य थी, हमें बताया है : “तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-सामग्री उसकी माँ के पेट में चालीस दिनों तक वीर्य के रूप में एकत्र की जाती है। फिर इतने ही समय वह जमे हुए रक्त के रूप में रहती है। फिर इतने ही दिन वह मांस के लोथड़े के रूप में रहती। फिर उसकी ओर एक फ़रिश्ता भेजा जाता है, जो उसमें रूह फूँकता है। फिर उसे चार बातों का आदेश दिया जाता है; उसे कहा जाता है कि उसकी रोज़ी, उसकी मौत, उसके कर्म तथा उसके अच्छे या बुरे होने को लिख दे। अतः, उस अल्लाह की क़सम, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, तुममें से कोई जन्नत वालों के काम करता रहता है, यहाँ तक कि उसके और जन्नत के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह जाती है कि इतने में उसपर तक़दीर का लिखा आगे बढ़ जाता है और वह जहन्नम वालों के काम करने लगता है और उसमें प्रवेश कर जाता है। इसी तरह तुममें से कोई जहन्नम वालों के काम करता रहता है, यहाँ तक उसके और जहन्नम के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह जाती है कि इतने में उसपर तक़दीर का लिखा आगे बढ़ जाता है और वह जन्नत वालों के काम करने लगता है और जन्नत में प्रवेश कर जाता है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अब्दुल्लाह बिन मसऊद कहते हैं कि हमें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है, जिनकी हर बात सच्ची है और जिनको अल्लाह तआला ने सच्चा कहा है। आपने फ़रमाया : तुममें से हर व्यक्ति की सृष्टि-समाग्री एकत्र की जाती है। यानी जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ संभोग करता है, तो उसका बिखरा हुआ वीर्य औरत के गर्भाशय में चालीस दिनों तक वीर्य के रूप में एकत्र किया जाता है। फिर वह खून का लौथड़ा यानी गाढ़ा रक्त बन जाता है। यह काम दूसरे चालीस दिनों में होता है। फिर वह मांस का एक टुकड़ा बन जाता है, जिसे एक बार में चबाया जा सके। यह तीसरे चालीस दिनों में होता है। फिर उसकी ओर अल्लाह एक फ़रिश्ता भेजता है, जो उसमें तीसरे चालीस दिन समाप्त होने के बाद रूह (जान) फूँकता है। फ़रिश्ते को आदेश दिया जाता है कि चार बातें लिख दें। पहली बात उसकी रोज़ी (जीविका) है। यानी यह लिख दे कि उसे जीवन में कितनी सुख-सुविधाएँ प्राप्त होंगी। दूसरी बात उसकी आयु है। यानी यह लिख दे कि वह दुनिया में कितने दिन जीवित रहेगा। तरीसरी बात उसके कर्म हैं। यानी अच्छा काम करने वाला होगा यह बुरा। जबकि चौथी बात यह कि वह सौभाग्यशाली होगा या दुर्भाग्यशाली? फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़सम खाकर बताया कि एक व्यक्ति जन्नतियों के काम करता रहता है और उसके काम लोगों को अच्छे दिखाई पड़ते हैं, यहाँ तक कि उसके तथा जन्नत तक पहुँचने के बीच बस इतनी दूरी रह जाती है, जैसे किसी व्यक्ति और उसके गनतव्य के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह गई हो, ऐसे समय में उसपर अल्लाह का लिखा और उसका निर्णय ग़ालिब आ जाता है और वह जहन्नमियों के काम करने लगता है और बुरे काम पर अंत होने की वजह से उसे जहन्नम जाना पड़ता है। क्योंकि अमल क़बूल होने के लिए शर्त यह है कि इन्सान उसपर क़ायम रहे और उसके स्थान पर बुरा करने न लगे। जबकि दूसरी ओर एक व्यक्ति जहन्नमियों के काम करता रहता है, यहाँ तक कि उसमें दाख़िल होने के निकट पहुँच जाता है, मानो कि उसके तथा जहन्नम के बीच केवल एक हाथ की दूरी रह गई हो, इतने में उसपर अल्लाह का लिखा और उसका निर्णय ग़ालिब आ जाता है और वह जहन्नतियों के काम करना शुरू कर देता है और फलस्वरूप जन्नत में प्रवेश करता है।
फ़ायदे
- मानव रचना के विभिन्न चरणों का बयान।
- अल्लाह के निर्णयों और उसके लिखे हुए भाग्य पर ईमान।
- इन्सान का अंजाम अंत में जाकर वही करता है, जो तक़दीर में लिखा हो।
- इसमें ज़ाहिरी आमाल के धोखे में आने से मना किया गया है। क्योंकि आमाल का दारोमदार (निर्भरता) अंत पर होता है।
हवाला
صحيح البخاري (9/ 135) (7454)، (4/ 111) (3208).
صحيح مسلم (4/ 2036) (2643).
عمدة القاري شرح صحيح البخاري (15/ 130).
شرح الأربعين النووية للعثيمين (ص: 84).
यह हदीस HadeethEnc.com परयहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com