बेशक अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपशगुन नहीं लेते थे
عن بُريدة رضي الله عنه : أن النبي صلى الله عليه وسلم كان لا يَتَطَيَّر.
बुरैदा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपशगुन नहीं लेते थे।
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- किसी भी चीज़ का अपशगुन नहीं लेते थे। याद रहे कि यहाँ मुराद ऐसा अपशगुन है, जो इन्सान को किसी काम से रोक दे, जैसा कि अज्ञान काल में हुआ करता था। इस्लाम ने अपशगुन लेने, चिड़िया उड़ाकर शगुन मालूम करने और तीर के द्वारा किसी काम के करने योग्य होने या न होने का पता लगाने जैसी चीज़ों से मना किया है और इनके बदले में इसतिख़ारा जैसी चीज़ प्रदान की है।
हवाला
- سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد: المكتبة العصرية.
- كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى 1430ه.
- صحيح الجامع الصغير وزياداته، الألباني، دار المكتب الإسلامي، بيروت، لبنان.
- نزهة المتقين بشرح رياض الصالحين، تأليف مصطفى سعيد الخن-مصطفى البغا-محي الدين مستو-علي الشربجي-محمد أمين لطفي-مؤسسة الرسالة-بيروت –لبنان، الطبعة الرابعة عشرة 1407.
- القول المفيد على كتاب التوحيد- محمد بن صالح بن محمد العثيمين- دار ابن الجوزي، المملكة العربية السعودية- الطبعة: الثانية, محرم 1424هـ.
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