सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी ठहराया होगा, तो कोई नेकी उसे लाभ नहीं पहुँचाएगी।

عَنْ عَبْدَ اللهِ بْنِ عَمْرٍو رَضيَ اللهُ عَنْهُمَا يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ لَقِيَ اللهَ لَا يُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا لَمْ تَضُرَّهُ مَعَهُ خَطِيئَةٌ، وَمَنْ مَاتَ وَهُوَ يُشْرِكُ بِهِ لَمْ يَنْفَعْهُ مَعَهُ حَسَنَةٌ».
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी ठहराया होगा, तो कोई नेकी उसे लाभ नहीं पहुँचाएगी।"
इसे अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया, वह जन्नत वालों में से है, यद्यपि उसके गुनाह के कारण उसे जहन्नम में कुछ सज़ा दी जाए। और जो व्यक्ति इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी बनाता रहा, तो शिर्क के होते हुए उसकी कोई नेकी उसके काम नहीं आएगी; और जन्नत उसपर हराम हो जाएगी।

फ़ायदे
  1. शिर्क से सावधान करना, और यह स्पष्ट करना कि शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है, और यह कि अल्लाह शिर्क को क्षमा नहीं करेगा।
  2. तौहीद (एकेश्वरवाद) की फ़ज़ीलत तथा यह स्पष्ट करना कि इसके द्वारा जन्नत में प्रवेश अनिवार्य हो जाता है, चाहे अज़ाब दिए जाने के बाद ही क्यों न हो।
  3. मरते दम तक तौहीद पर मज़बूती से जमे रहने तथा शिर्क न करने का महत्व।
हवाला

مسند أحمد (11/ 155- 156) (11/ 157) (6586). فيض القدير شرح الجامع الصغير (6/220).

यह हदीस HadeethEnc.com पर
उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com