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तशरीह के साथ हदीसें

अतिशयोक्ति करने वाले हलाक हो गए

عن عبد الله بن مسعود قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «هَلَكَ الْمُتَنَطِّعُون» قالها ثلاثًا.
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अतिशयोक्ति करने वाले हलाक हो गए।" आपने यह बात तीन बार कही।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि बिना ज्ञान और प्रमाण के अपने दीन और दुनिया तथा कथन एवं कर्म में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बताई हुई शरई सीमा से आगे बढ़ने वाले नाकाम व नामुराद होंगे।

फ़ायदे
  1. सारे ही कामों में बाल की खाल निकालना और अतिशयोक्ति करना हराम है, अतः इससे बचना चाहिए। खास तौर से इबादतों और नेक लोगों के सम्मान में।
  2. इबादत आदि में अधिक उत्तम चीज़ करना अच्छी बात है और इसके लिए शरीयत का अनुसरण ज़रूरी है।
  3. किसी महत्वपूर्ण बात की ताकीद करना मुसतहब है, क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस वाक्य को तीन बार दोहराया है।
  4. इस्लाम एक आसान तथा उदार धर्म है।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2055) (2670). الجديد في شرح كتاب التوحيد، للقرعاوي (ص180). الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح الفوزان (ص167).

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उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com