अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि परीक्षाएँ कभी मोमिन पुरुष एवं मोमिन स्त्री का साथ नहीं छोड़तीं। परीक्षा कभी उसकी जान से जुड़ी हुई होती है, जैसे तबीयत खराब हो गई शरीर ठीक नहीं रहा। कभी बाल-बच्चों से जुड़ी हुई होती है, जैसे कोई बीमार हो गया, किसी मृत्यु हो गई, कोई नाफ़रमान निकल गया वग़ैरह वग़ैरह। कभी धन से जुड़ी हुई होती है, जैसे निर्धनता का सामना करना पड़ा, व्यवसाय बैठ गया, चोरी हो गई, मंदी शुरू हो गई और रोज़ी में तंगी का सामना होने लगा। फिर इन परीक्षाओं के नतीजे में अल्लाह उसके तमाम गुनाहों को मिटा देता है और अंत में जब वह अल्लाह से मिलता है, तो अपने किए हुए तमाम गुनाहों से पाक-साफ़ हो चुका होता है।
- मोमिन बंदों पर अल्लाह की दया का एक दृश्य यह है कि वह दुनिया की मुसीबतों एवं विपत्तियों द्वारा दुनिया में किए हुए उनके गुनाहों को मिटा देता है।
- मुसीबत गुनाहों को मिटाने का काम करती है। बस शर्त यह है कि इन्सान के पास ईमान हो। बंदा धैर्य रखे और अल्लाह के निर्णय से विक्षुब्ध न हो, तो उसे सवाब मिल ही जाता है।
- इन्सान को प्रिय एवं अप्रिय सभी परिस्थितियों में धैर्य रखना चाहिए। धैर्य के साथ अल्लाह के द्वारा अनिवार्य किए गए कार्यों को करे और धैर्य के साथ उसकी हराम की हुई चीज़ों से दूर रहे। अल्लाह के सवाब की आशा रखे और उसके दंड से डरता रहे।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शब्द "बिल मोमिनि वल मोमिनह" में "अल मोमिनह" शब्द की वृद्धि, महिला के हक़ में ताकीद लाने के लिए की गई है। वरना केवल "अल मोमिन" कहते, तब भी उसमें महिला दाख़िल हो जाती। क्योंकि मोमिन शब्द पुरुष के साथ खास नहीं है। यदि कोई स्त्री किसी विपत्ति से पीड़ित है, तो उसे भी पापों और अपराधों को मिटाने के द्वारा समान पुरस्कार देने का वादा किया गया है।
- मुसीबतों के नतीजे में मिलने वाले सवाब का वादा इन्सान के लिए मुसीबतों का सामना करना आसान कर देता है।
سنن الترمذي (4/ 204) (2399). مسند أحمد (13/ 248) (7859). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 113). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص51). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (1/ 273). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 80).