- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - مرقاة المفاتيح :علي بن سلطان القاري -دار الفكر، بيروت – لبنان الطبعة -الأولى، 1422هـ - 2002م. - سنن الترمذي - محمد بن عيسى ، الترمذي، تحقيق وتعليق:أحمد محمد شاكر ومحمد فؤاد عبد الباقي وإبراهيم عطوة عوض -شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر-الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م. - سنن ابن ماجه : أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي- دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. - مسند الإمام أحمد بن حنبل المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. - سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها/محمد ناصر الدين، الألباني مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض-الطبعة: الأولى، (مكتبة المعارف).
तशरीह के साथ हदीसें
जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेहमान है, शीघ्र ही वह तुम्हें छोड़कर हमारे पास आने वाले हैं।
عن معاذ بن جبل رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تؤذي امرأةٌ زوجَها في الدنيا إلا قالت زوجته من الحُورِ العِينِ لا تُؤْذِيهِ قاتلك الله! فإنما هو عندك دَخِيلٌ يُوشِكُ أن يفارقَكِ إلينا».
मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेहमान है, शीघ्र ही वह तुम्हें छोड़कर हमारे पास आने वाले हैं।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com