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तशरीह के साथ हदीसें

पति-पत्नी का रहन-सहन

17 हदीसें

जब पति अपनी पत्नी को सहवास के लिए बुलाए, तो वह अवश्य आए, यद्यपि वह चूल्हे के पास ही क्यों न हो।

عن أبي علي طلق بن علي رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «إذا دعا الرجل زوجته لحاجته فَلْتَأتِهِ وإن كانت على التَّنُور».
अबू अली तल्क़ बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब पति अपनी पत्नी को सहवास के लिए बुलाए, तो वह अवश्य आए, यद्यपि वह चूल्हे के पास ही क्यों न हो।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जब कोई व्यक्ति अपनी स्त्री को सह्वास के लिए बुलाए, तो वह उसके पास ज़रूर जाए, यद्यपि वह किसी ऐसे काम में व्यस्त हो, जो उसके सिवा कोई और न कर सकता हो। मसलन रोटी पका रही हो या खाना बना रही हो।

हवाला

سنن الترمذي، نشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر، الطبعة: الثانية، 1395هـ - 1975م. صحيح الجامع الصغير وزبادته, تأليف: أبو عبدالرحمن محمد ناصر الدين الألباني, الناشر: المكتب الإسلامي. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح, تأليف: علي بن سلطان القاري, الناشر: دار الفكر, ط1 عام 1422. تحفة الأحوذي بشرح جامع الترمذي, تأليف: أبو العلا محمد عبدالرحمن المباركفوري, الناشر: دار الكتب العلمية. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي. تحفة الأبرار شرح مصابيح السنة, تأليف: القاضي ناصر الدين عبدالله البيضاوي, تحقيق: لجنة مختصة بإشراف نور الدين طالب, الناشر: وزارة الأوقاف بالكويت, عام 1433. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين, تأليف: سليم بن عيد الهلالي, دار ابن الجوزي.

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सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «أَكْمَلُ الْمُؤْمِنِينَ إِيمَانًا أَحْسَنُهُمْ خُلُقًا، وَخَيْرُكُمْ خَيْرُكُمْ لِنِسَائِهِمْ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि सबसे संपूर्ण आचरण वाला व्यक्ति वह है, जिसका आचरण सबसे अच्छा हो। आचरण अच्छा होने का मतलब यह है कि हँसकर मिला जाए, लोगों का भला किया जाए, अच्छे ढंग से बात की जाए और किसी को कष्ट देने से बचा जाए। जबकि सबसे उत्तम ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो अपने घर की औरतों, मसलन, पत्नी, बेटियों, बहनों और अन्य रिश्तेदार महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार करता हो। क्योंकि यह औरतें अच्छे आचरण की सबसे अधिक हक़दार हैं।

फ़ायदे
  1. अच्छे आचरण की फ़ज़ीलत तथा उसका ईमान का अंग होना।
  2. अमल भी ईमान का अंग है और ईमान घटता तथा बढ़ता है।
  3. इस्लाम का औरत को सम्मान देना तथा उसके साथ अच्छा व्यवहार करना की प्रेरणा।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 70) (4682). سنن الترمذي (2/ 454) (1162). مسند أحمد ط الرسالة (12/ 364) (7402). سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها، للألباني (1/ 573). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 362). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 130). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (5/ 234).

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तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा।

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بنِ عُمرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُما أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «كُلُّكُمْ رَاعٍ فَمَسْئُولٌ عَنْ رَعِيَّتِهِ، فَالأَمِيرُ الَّذِي عَلَى النَّاسِ رَاعٍ وَهُوَ مَسْئُولٌ عَنْهُمْ، وَالرَّجُلُ رَاعٍ عَلَى أَهْلِ بَيْتِهِ وَهُوَ مَسْئُولٌ عَنْهُمْ، وَالمَرْأَةُ رَاعِيَةٌ عَلَى بَيْتِ بَعْلِهَا وَوَلَدِهِ وَهِيَ مَسْئُولَةٌ عَنْهُمْ، وَالعَبْدُ رَاعٍ عَلَى مَالِ سَيِّدِهِ وَهُوَ مَسْئُولٌ عَنْهُ، أَلاَ فَكُلُّكُمْ رَاعٍ وَكُلُّكُمْ مَسْئُولٌ عَنْ رَعِيَّتِهِ».
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा। लोगों का शासक रक्षक है और उससे उसके अधीनस्थों के बारे में पूछा जाएगा। एक व्यक्ति अपने परिवार का रक्षक है और उससे उसके मातहतों के बारे में प्रश्न होगा और एक स्त्री अपने पति के घर और उसके बच्चों की रक्षक है और उससे उनके बारे में प्रश्न होगा। इस तरह, तुममें से हर व्यक्ति रक्षक है और तुममें से हर व्यक्ति से उसके मातहतों के बारे में पूछा जाएगा।" तथा एक दास अपने मालिक के धन का रक्षक है और उससे उसके बारे में पूछा जाएगा। सुन लोग, तुममें से हर व्यक्ति रक्षक है और उससे उसके अधीनस्थों के बारे में पूछा जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि समाज में रहने वाले हर मुसलमान की कुछ ज़िम्मेवारियाँ हैं, जो उसे उठानी ही होंगी। अतः इमाम और अमीर अपने मातहत लोगों का ज़िम्मेवार है। उसका काम उनके दीन व शरीयत की सुरक्षा करना, अत्याचारियों से उनकी रक्षा करना, उनके दुश्मनों से जिहाद करना और उनके अधिकारों को नष्ट होने से बचाना है। हर व्यक्ति अपने परिवार के लोगों पर खर्च करने, उनके साथ अच्छे व्यवहार करने, उनको शिक्षा देने एवं शिष्टाचार सिखाने का ज़िम्मेवार है। एक औरत के कंधों पर यह ज़िम्मेवारी है कि अपने पति के घर को अच्छे से संभाले और बच्चों की उत्तम प्रशिक्षण का प्रबंध करे। और उससे इस ज़िम्मेवारी के बारे में पूछा जोएगा, सेवक एवं मज़दूर की ज़िम्मेवारी है कि अपने पास मौजूद अपने मालिक के धन की हिफ़ाज़त करे और उसकी सेवा करे। और उससे इस ज़िम्मेवारी के बारे में पूछा जोएगा, इस प्रकार, हर व्यक्ति अपने मातहत मौजूद लोगों एवं चीज़ों का ज़िम्मेवार है, और उससे उनके बारे में पूछा जाएगा।

फ़ायदे
  1. मुस्लिम समाज के हर व्यक्ति को अपनी शक्ति एवं क्षमता के अनुसार ज़िम्मेवारी का बोझ उठाना पड़ता है।
  2. औरत के सर पर बड़ी ज़िम्मेवारी है। उसे अपने पति का घर भी संभालन है और बच्चों के बारे में अपनी ज़िम्मेवारियाँ भी अदा करनी हैं।
हवाला

صحيح البخاري (3/ 150) (2554). صحيح مسلم (3/ 1459) (1829). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 369). إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري، القسطلاني (4/ 326).

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मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं।

عَنْ إِيَاسِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي ذُبَابٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تَضْرِبُوا إِمَاءَ اللَّهِ» فَجَاءَ عُمَرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: ذَئِرْنَ النِّسَاءُ عَلَى أَزْوَاجِهِنَّ، فَرَخَّصَ فِي ضَرْبِهِنَّ، فَأَطَافَ بِآلِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نِسَاءٌ كَثِيرٌ يَشْكُونَ أَزْوَاجَهُنَّ، فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَقَدْ طَافَ بِآلِ مُحَمَّدٍ نِسَاءٌ كَثِيرٌ يَشْكُونَ أَزْوَاجَهُنَّ، لَيْسَ أُولَئِكَ بِخِيَارِكُمْ».
इयास बिन अब्दुल्लाह बिन अबू जुबाब (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "अल्लाह की दासियों को मत मारो।" यह सुन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और कहने लगे : स्त्रियाँ अपने पतियों को जुर्रत दिखाने लगी हैं। अतः, आपने उन्हें मारने की अनुमति दी। इसके बाद बहुत-सी स्त्रियाँ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नियों के पास आकर अपने पतियों की शिकायत करने लगीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

سنن أبي داود (3/ 479) (2146). سنن ابن ماجه (3/ 152) (1985). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 363). مرقاة المفاتيح، لعلي القاري (5/ 2127).

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जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेहमान है, शीघ्र ही वह तुम्हें छोड़कर हमारे पास आने वाले हैं।

عن معاذ بن جبل رضي الله عنه مرفوعاً: «لا تؤذي امرأةٌ زوجَها في الدنيا إلا قالت زوجته من الحُورِ العِينِ لا تُؤْذِيهِ قاتلك الله! فإنما هو عندك دَخِيلٌ يُوشِكُ أن يفارقَكِ إلينا».
मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेहमान है, शीघ्र ही वह तुम्हें छोड़कर हमारे पास आने वाले हैं।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - مرقاة المفاتيح :علي بن سلطان القاري -دار الفكر، بيروت – لبنان الطبعة -الأولى، 1422هـ - 2002م. - سنن الترمذي - محمد بن عيسى ، الترمذي، تحقيق وتعليق:أحمد محمد شاكر ومحمد فؤاد عبد الباقي وإبراهيم عطوة عوض -شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي – مصر-الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م. - سنن ابن ماجه : أبو عبد الله محمد بن يزيد القزويني، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي- دار إحياء الكتب العربية - فيصل عيسى البابي الحلبي. - مسند الإمام أحمد بن حنبل المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي مؤسسة الرسالة الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. - سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها/محمد ناصر الدين، الألباني مكتبة المعارف للنشر والتوزيع، الرياض-الطبعة: الأولى، (مكتبة المعارف).

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यदि मैं किसी को इस बात का आदेश दे सकता कि किसी को सजदा करे, तो स्त्री को आदेश देता कि अपने पति को सजदा करे।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «لو كنت آمِرًا أحدًا أن يسجد لأحد لأمرت المرأة أن تسجد لزوجها».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "यदि मैं किसी को इस बात का आदेश दे सकता कि किसी को सजदा करे, तो स्त्री को आदेश देता कि अपने पति को सजदा करे।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

الجامع الكبير (سنن الترمذي), تأليف: محمد بن عيسى الترمذي, تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر ومحمد فؤاد عبد الباقي وإبراهيم عطوة عوض -شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي - مصر - الطبعة: الثانية، 1395 هـ - 1975 م. إرواء الغليل في تخريج أحاديث منار السبيل, تأليف: محمد ناصر الدين الألباني, الناشر: المكتب الإسلامي, ط2 عام 1405. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين, تأليف: سليم بن عيد الهلالي, دار ابن الجوزي. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح, تأليف: علي بن سلطان القاري, الناشر: دار الفكر, ط1 عام 1422.

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अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अज़्ल (संभोग के समय वीर्य-स्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना ताकि अंदर स्खलन न हो) के बारे में बताया गया तो फ़रमायाः तुममें से कोई ऐसा क्यों करता है? क्योंकि, जो भी जान पैदा होने वाली है, अल्लाह उसे पैदा करके रहेगा।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه : «ذُكِرَ َالعزل لرسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: ولم يفعل ذلك أحدكم؟ -ولم يقل: فلا يفعل ذلك أحدكم؟-؛ فإنه ليست نفس مخلوقة إلا الله خالقها».
अबू सईद खुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अज़्ल (संभोग के समय वीर्य-स्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना ताकि अंदर स्खलन न हो) के बारे में बताया गया तो फ़रमायाः तुममें से कोई ऐसा क्यों करता है? (आपने यह नहीं फ़रमाया कि तुममें से कोई ऐसा न करे) क्योंकि, जो भी जान पैदा होने वाली है, अल्लाह उसे पैदा करके रहेगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने अज़्ल का ज़िक्र किया गया और यह बताया गया कि कुछ लोग अपनी पत्नियों तथा दासियों के साथ ऐसा करते हैं, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने खंडन के अंदाज़ में उनसे इसका कारण जानना चाहा। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके ऐसा करने के पीछे छिपे उद्देश्य का ऐसा संतोषजनक उत्तर दिया, जो उन्हें इससे रोकने के लिए काफ़ी है। फ़रमाया कि अल्लाह तआला ने तक़दीरें निर्दिष्ट कर दी हैं, इसलिए तुम्हारा यह अमल उस जान को रोक नहीं सकता, जिसे अल्लाह ने रचने का निर्णय कर लिया है। क्योंकि वही असबाब को तय करता है और उनके प्रभावों को भी। अतः, जब वह पुरुष के वीर्य से इनसान की रचना का इरादा करता है, तो उसे इस तरह उसके सुरक्षित स्थान में पहुँचा देता है कि उसे एहसास भी नहीं होता।

हवाला

- صحيح البخاري –الجامع الصحيح-؛ للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام للشيخ إسماعيل الأنصاري-مطبعة السعادة-الطبعة الثانية 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام-عبد الله البسام-تحقيق محمد صبحي حسن حلاق- مكتبة الصحابة- الشارقة- الطبعة العاشرة- 1426ه.

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हम अज़्ल (संभोग के दौरान वीर्यस्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना, ताकि अंदर वीर्यस्खलन न हो) करते थे, जबकि क़ुरआन उतर रहा था। सुफ़यान कहते हैं कि यदि यह कोई मना करने योग्य काम होता तो क़ुरआन हमें इससे रोक देता।

عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما قال: "كنا نعزل والقرآن ينزل". قال سفيان: لو كان شيئا ينهى عنه؛ لنهانا عنه القرآن.
जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अज़्ल (संभोग के दौरान वीर्यस्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना, ताकि अंदर वीर्यस्खलन न हो) करते थे, जबकि क़ुरआन उतर रहा था। सुफ़यान कहते हैं कि यदि यह कोई मना करने योग्य काम होता तो क़ुरआन हमें इससे रोक देता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (ज़ियल्लाहु अंहु) बता रहे हैं कि वे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में अपनी पत्नियों तथा दासियों के साथ अज़्ल करते थे और आपने इसे स्वीकार्यता प्रदान की थी, हालाँकि यदि वह जायज़ न होता, तो आप उसे स्वीकार्यता प्रदान न करते। फिर शायद उनसे कहा गया कि संभव है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को तुम्हारे इस कार्य का पता ही न चला हो? तो फ़रमायाः अगर आपको पता न चला हो, तो अल्लाह को तो पता था। वह क़ुरआन उतरने का समय था। ऐसे में अगर अज़्ल करना मना होता, तो क़ुरआन ही उससे मना कर देता और अल्लाह हमें उसकी स्वीकार्यता प्रदान न करता। जाबिर (रज़ियल्लाहु अंहु) की यह हदीस इस बात का प्रमाण है कि अज़्ल जायज़ है। जबकि कई अन्य हदीसों से पता चलता है कि जायज़ नहीं है। जैसे सहीह मुस्लिम मे जुज़ामा बिंत बह्ब की हदीस में है कि वह कुछ लोगों के साथ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आईं और उन लोगों ने आपसे अज़्ल के बारे में पूछा, तो आपने फ़रमायाः "यह गुप्त हत्या है।" ऐसे में प्रश्न उठता है कि इन हदीसों की एक साथ व्याख्या कैसे की जाएगी? तो उसका उत्तर इस प्रकार हैः असल में यह जायज़ है, जैसा कि जाबिर और अबू सईद (रज़ियल्लाहु अंहुमा) की हदीस से पता चलता है। अलबत्ता, जुज़ामा (रज़ियल्लाहु अंहा) की हदीस उस स्थिति के लिए है, जब अज़्ल का उद्देश्य संतान से बचना हो। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कथन 'यह गुप्त हत्या है' से भी इसी का इशारा मिलता है। या फिर यह भी हो सकता है कि अज़्ल हराम नहीं बल्कि मकरूह हो।

हवाला

- صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام، للشيخ إسماعيل الأنصاري -مطبعة السعادة- الطبعة الثانية، 1392ه. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله البسام، تحقيق محمد صبحي حسن حلاق، مكتبة الصحابة، الشارقة، الطبعة العاشرة، 1426ه. - خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي، الطبعة الثانية، 1412هـ - 1992م. - منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف عبد الله الفوزان - طبعة دار ابن الجوزي - الطبعة الأولى، 1428ه. - توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ - 2003م. - فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية، القاهرة، تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى، 1427ه. - الإفهام في شرح عمدة الأحكام، عبد العزيز بن عبد الله بن باز، حققه واعتنى به وخرج أحاديثه: د. سعيد بن علي بن وهف القحطاني- توزيع مؤسسة الجريسي.

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17 में से 8
17 हदीसें
  1. जब पति अपनी पत्नी को सहवास के लिए बुलाए, तो वह अवश्य आए, यद्यपि वह चूल्हे के पास ही क्यों न हो।
  2. सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।
  3. तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा।
  4. मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं।
  5. जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेहमान है, शीघ्र ही वह तुम्हें छोड़कर हमारे पास आने वाले हैं।
  6. यदि मैं किसी को इस बात का आदेश दे सकता कि किसी को सजदा करे, तो स्त्री को आदेश देता कि अपने पति को सजदा करे।
  7. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अज़्ल (संभोग के समय वीर्य-स्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना ताकि अंदर स्खलन न हो) के बारे में बताया गया तो फ़रमायाः तुममें से कोई ऐसा क्यों करता है? क्योंकि, जो भी जान पैदा होने वाली है, अल्लाह उसे पैदा करके रहेगा।
  8. हम अज़्ल (संभोग के दौरान वीर्यस्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना, ताकि अंदर वीर्यस्खलन न हो) करते थे, जबकि क़ुरआन उतर रहा था। सुफ़यान कहते हैं कि यदि यह कोई मना करने योग्य काम होता तो क़ुरआन हमें इससे रोक देता।
  9. सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी लड़की से विवाह करे तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी राँड स्त्री से विवाह करे तो उसके पास तीन दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए।
  10. मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से किसे एक के ऊपर उसकी पत्नी के किया अधिकार हैं? आपने उत्तर दिया : "जब तुम खाओ तो उसे खिलाओ, जब तुम पहनो या फ़रमाया जब तुम कमाओ तो उसे पहनाओ, चेहरे पर न मारो, बुरा-भला न कहो और उसे बिस्तर से अलग करके घर के सिवा कहीं और न रखो।
  11. यहूदी कहते हैं कि अज़्ल जीवित दफ़न करने की एक छोटी शक्ल है। आपने कहाः "यहूदी झूठ बोलते हैं। यदि अल्लाह पैदा करना चाहे, तो तुम उसे रोक नहीं सकते।"
  12. जिसकी दो पत्नियाँ हों और उसका झुकाव किसी एक की ओर हो, वह क़यामत के दिन इस अवस्था में आएगा कि उसका एक पहलू झुका हुआ होगा।
  13. सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी ग़ैरकुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास तीन दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए।
  14. तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो शेष स्त्रियों के पास भी सात दिन रहूँगा।
  15. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बारी का दिन बाँटते समय आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) को दो दिन दिया करते थे। उनका दिन और सौदा (रज़ियल्लाहु अंहा) का दिन।
  16. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे यहाँ ठहरने के दिन बाँटते समय हमें एक-दूसरे पर तरजीह नहीं देते थे। अकसर ऐसा होता कि आप हम सभों के पास आते और अपनी हर पत्नी के निकट बैठते। हाँ, मगर संभोग न करते। यहाँ तक कि अपनी उस पत्नी के पास पहुँच जाते, जिसकी बारी का दिन होता और उसके पास रात गुज़ारते।
  17. जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com