मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा-ए-तूर पढ़ते सुना।
عن جُبَيْرُ بْنُ مُطْعِم رضي الله عنه قال: «سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقرأ في المغرب بِالطُّور».
जूबैर बिन मुतइम (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा-ए-तूर पढ़ते सुना।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सामान्य रुप से फ़ज्र की नमाज़ में तिलावत लंबी करते थे और मग़रिब की नमाज़ में हल्की, जबकि इनके सिवा अन्य नमाज़ों में दरमियानी तिलावत करते थे।
लेकिन कभी-कभी यह बताने के लिए ऐसा अनिवार्य नहीं है, इस आदत को छोड़ भी देते थे। जैसा कि इस हदीस में आया है कि आपने मग़रिब की नमाज़ में सूरा "वत-तूर" पढ़ी, जो तिवाल-ए-मुफस्सल की सूरतों में शामिल है।
हवाला
تيسير العلام، للبسام، الناشر: مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة العاشرة، 1426هـ - 2006 م .
تنبيه الأفهام، للعثيمين، طبعة مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة الأولى 1426هـ.
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، طبعة دار الفكر، دمشق، الطبعة الأولى 1381هـ.
صحيح البخاري، لأبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد زهير بن ناصر الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة: الأولى 1422هـ.
صحيح مسلم، المحقق: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار إحياء التراث العربي - بيروت.
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com