वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना छोटा बच्चा लेकर आयीं जो अभी खाना नहीं खाता था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया तो उसने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। आपने पानी मंगवाकर उस पर छिड़क दिया, लेकिन उसे धोया नहीं।
उम्मे क़ैस बिंत मेहसन -रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि : वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना छोटा बच्चा लेकर आयीं जो अभी खाना नहीं खाता था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया तो उसने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। आपने पानी मंगवाकर उस पर छिड़क दिया, लेकिन उसे धोया नहीं।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
उम्मे क़ैस बिंत मेहसन रज़ियल्लाहु अन्हा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना बच्चा लेकर आयीं, जो अपनी कम उम्री के कारण अभी खाना नहीं खाता था। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया, तो बच्चे ने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। इस पर आपने पानी मँगवाया और उसे अपने कपड़े पर छिड़क दिया और उसे धोया नहीं।
फ़ायदे
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का उत्तम आचरण एवं आपकी अत्यधिक विनम्रता।
अच्छे व्यवहार, विनम्रता और छोटों के साथ नरमी बरतने, तथा बच्चों का सम्मान करके एवं उन्हें गोद में बिठाकर उनके बड़ों के दिलों को सांत्वना देने, इत्यादि के लिए प्रोत्साहन।
बालक का मूत्र नापाक होता है, यद्यपि उसने अभी तक अपनी इच्छा से भोजन करना आरंभ न किया हो।
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के इस कार्य को नज़्ह (पानी छिड़कना) कहा जाता है। यह उस छोटे लड़के के लिए ख़ास है, जो अभी खाना न खाता हो। अलबत्ता लड़की के पेशाब को धोना ज़रूरी है, भले ही वह छोटी हो।
माँ का दूध पीने वाले लड़के के पाख़ाने को अन्य सभी नापाक चीज़ों की तरह धोना आवश्यक है।
स्नान में पानी पहुँचाने के अतिरिक्त कुछ और चीज़ भी आवश्यक है।
बेहतर यह है कि नापाकी की जगह को पाक करने में जल्दी की जाए; ताकि नापाकी से पवित्रता जल्दी प्राप्त हो जाए और इन्सान भूले नहीं।
हवाला
صحيح البخاري (1/ 54) (223).
صحيح مسلم (1/ 238) (287).
الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 42).
تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص55).
تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 68).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com