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तशरीह के साथ हदीसें

नापाकियों से पवित्रता प्राप्त करना

13 हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُ الْخَلَاءَ، فَأَحْمِلُ أَنَا وَغُلَامٌ نَحْوِي إِدَاوَةً مِنْ مَاءٍ وَعَنَزَةً فَيَسْتَنْجِي بِالْمَاءِ.
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। चुनांचे आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सेवक अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) बयान करते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब शौच के स्थान पर जाते, तो वह और उनके साथ एक और लड़का आपके लिए चमड़े के बरतन में इस्तिंजा का पानी लेकर जाते, इसी तरह एक छोटी-सी बरछी भी लेकर जाते, जिसे ज़मीन पर गाड़ देते और उसपर चादर या इस तरह की कोई ओर चीज़ डाल देते, जो गुज़रने वालों की नज़र से बचाने का काम करती। साथ ही यदि नमाज़ पढ़ने का इरादा होता, तो वह सुतरा का भी काम देती।

हवाला

صحيح البخاري (1/ 42) (152). صحيح مسلم (1/ 227) (271). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص40). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 43). الإفهام في شرح عمدة الأحكام، لابن باز (ص84).

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एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: «جاء أعرابِيُّ، فبَالَ في طَائِفَة المَسجد، فَزَجَرَه النَّاسُ، فَنَهَاهُمُ النبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَلمَّا قَضَى بَولَه أَمر النبي صلى الله عليه وسلم بِذَنُوب من ماء، فَأُهرِيقَ عليه».
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा। यह देख, लोग उसे डाँटने लगे, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने लोगों को इससे रोका। फिर जब वह पेशाब कर चुका, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बालटी पानी लाने का आदेश दिया और उसे पेशाब के ऊपर बहा दिया गया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

देहात के लोग चूँकि अल्लाह की ओर से मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतरने वाली शरीयत को सीख नहीं सके थे, इसलिए उनके अंदर अज्ञानता और उद्दंडता जैसी चीज़ें मौजूद थीं। एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने साथियों के साथ मस्जिदे नबवी में बैठे थे कि एक देहाती आया और उसे एक साधारण स्थान समझकर उसके एक किनारे में पेशाब करने लगा। सहाबा के दिल में चूँकि मस्जिद का बड़ा सम्मान था, इसलिए उसका यह काम उनपर भारी पड़ा। अतः, उन्होंने उसे पेशाब करते देख डाँटना शुरू कर दिया। लेकिन, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने, जो आदर्श व्यवहार के स्वरूप थे और खुशखबरी देने वाले तथा आसानी पैदा करने वाले के रूप में आए थे, उन्हें डाँटने से मना किया। क्योंकि आप अरबों का स्वभाव जानते थे। साथ ही डाँटने से उसका शरीर अथवा कपड़ा गंदा हो सकता था और अचानक पेशाब रुकने के कारण उसे नुकसान भी पहुँच सकता था। यह भी उद्देश्य सामने था कि डाँटने के बजाय बाद में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब उसे समझाएं तो वह आप की बात क़बूल करे। आपने आदेश दिया कि उसके पेशाब के स्थान को एक बालटी पानी बहाकर साफ कर लिया जाए।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة لأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت.

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मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवित्रता की अवस्था में आपके पास बैठूँ! तो आपने फरमायाः सुबहानल्लाह! मोमिन नापाक -अपवित्र- नहीं होता।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضيَ اللهُ عنه: أَنَّهُ لَقِيَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي طَرِيقٍ مِنْ طُرُقِ الْمَدِينَةِ وَهُوَ جُنُبٌ، فَانْسَلَّ فَذَهَبَ فَاغْتَسَلَ، فَتَفَقَّدَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَلَمَّا جَاءَهُ قَالَ: «أَيْنَ كُنْتَ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ؟» قَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، لَقِيتَنِي وَأَنَا جُنُبٌ فَكَرِهْتُ أَنْ أُجَالِسَكَ حَتَّى أَغْتَسِلَ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «سُبْحَانَ اللهِ، إِنَّ الْمُؤْمِنَ لَا يَنْجُسُ».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाह अन्हु- का वर्णन है किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उन्हें मदीने के किसी रास्ते में मिल गए, जबकि वह उस समय जुंबी- अपवित्र- थे। वह कहते हैंः सो मैं चुपके से निकल लिया और जाकर स्नान कर आया। आप बोलेः अबू हुरैरा! तुम इतनी देर कहाँ थे? उन्होंने जवाब दियाः मैं जुंबी था। अतः मुझे अच्छा न लगा कि नापाकी- अपवित्रता- की अवस्था में आपके पास बैठूँ! आपने फरमायाः "सुबहानल्लाह! मोमिन नापाक नहीं होता।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

मदीने के किसी रास्ते में अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) की भेंट अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से हो गई। इत्तेफ़ाक से उस समय वह जनाबत की अवस्था में थे। चूँकि उनके दिल में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का बड़ा सम्मान था, इसलिए इस अवस्था में आपके पास बैठने एवं आपसे बात करने को, उनका दिल गवारा न किया। अतः, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बताए बिना चुपके से निकल लिए और स्नान कर आए। जब आए, तो आपने पूछा कि कहाँ गए थे? उन्होंने सब कुछ बताया और कहा कि नापाकी की अवस्था में आपके पास बैठना गवारा न हुआ। चूँकि अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) जुंबी को नापाक समझते थे, इसलिए आपने उन पर आश्चर्य प्रकट किया और उन्हें बताया कि मोमिन किसी भी हाल में अपवित्र नहीं होता।

हवाला

صحيح البخاري (1/ 65) (285). صحيح مسلم (1/ 282) (371). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 46). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص61). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 74).

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''जब तुम शौच के लिए जाओ, तो पेशाब तथा पाखाना करते समय न क़िबला की ओर मुँह करो, न उसकी ओर पीठ ही करो; बल्कि पूरब अथवा पश्चिम की ओर मुँह कर लो।''

عَنْ أَبِي أَيُّوبَ الأَنْصَارِيِّ رضي الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِذَا أَتَيْتُمُ الغَائِطَ فَلاَ تَسْتَقْبِلُوا القِبْلَةَ، وَلاَ تَسْتَدْبِرُوهَا وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوا» قَالَ أَبُو أَيُّوبَ: فَقَدِمْنَا الشَّأْمَ فَوَجَدْنَا مَرَاحِيضَ بُنِيَتْ قِبَلَ القِبْلَةِ فَنَنْحَرِفُ، وَنَسْتَغْفِرُ اللَّهَ تَعَالَى.
अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ''जब तुम शौच के लिए जाओ, तो पेशाब तथा पाखाना करते समय न क़िबला की ओर मुँह करो, न उसकी ओर पीठ ही करो; बल्कि पूरब अथवा पश्चिम की ओर मुँह कर लो।'' अबू अय्यूब कहते हैं : जब हम शाम गए, तो देखा कि वहाँ शौचालय काबा की दिशा में बने हुए हैं। सो हम वहाँ तिरछे होकर बैठते और अल्लाह से क्षमा याचना करते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पेशाब और पाखाना करने का इरादा रखने वाले को क़िबला और काबा की ओर मुँह या पीठ करके बैठने से मना किया है। अगर उसके क़िबले की दिशा वही है, जो मदीने वालों की है, तो उसे पूरब या पश्चिम की ओर तिरछा होकर बैठना चाहिए। फिर अबू अय्यूब रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया कि जब वह शाम पहुँचे, तो देखा कि वहाँ शौचालय काबा की दिशा में बने हुए हैं। इसलिए वह शौचालय जाते समय तिरछे होकर बैठ जाते, ताकि सीधे काबा की ओर मुँह या पीठ न हो और उसके बाद अल्लाह से क्षमा याचना कर लिया करते।

फ़ायदे
  1. इस मनाही का कारण काबा का सम्मान है।
  2. शौचालय से निकलने के बाद क्षमा याचना करनी चाहिए।
  3. इस हदीस से अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शिक्षा देने का सुंदर तरीक़ा सामने आता है कि जब अवैध तरीक़े का उल्लेख किया, तो वैध तरीक़े का भी ज़िक्र कर दिया।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 88) (394). صحيح مسلم (1/ 224) (264). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص37). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 39).

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जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: إِنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: «إِذَا شَرِبَ الْكَلْبُ فِي إِنَاءِ أَحَدِكُمْ فَلْيَغْسِلْهُ سَبْعًا». ولمسلم: « أولاهُنَّ بالتُراب».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।" मुस्लिम की रिवायत में है : "पहली बार मिट्टी से धोए।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आदेश दिया है कि जब कुत्ता बरतन में मुँह डाल दे, तो उसे सात बार धोया जाए। सात में से पहली बार मिट्टी से धोया जाए, ताकि उसके बाद जब पानी से धोया जाए, तो बरतन पूरी तरह साफ़ हो जाए और गंदगी तथा हानिकारक चीज़ बाक़ी न रहे।

फ़ायदे
  1. कुत्ते का मुखस्राव बड़े ही सख़्त प्रकार का नापाक वस्तु है।
  2. किसी बरतन में कुत्ते के मुँह डाल देने से वह बरतन और उसमें मौजूद पानी गंदा हो जाता है।
  3. मिट्टी से पाक करने और सात बार धोने का आदेश कुत्ते के मुँह डाले हुए बर्तन को साफ़ करने के लिए है। उसके पेशाब, पाखाना और उसके द्वारा अन्य तरीक़ों से गंदे की गई चीज़ों को साफ़ करने के लिए नहीं।
  4. बर्तन को मिट्टी से धोने का तरीक़ा यह है कि बर्तन में पानी डालकर उसमें उस मिट्टी को मिला दिया जाए और उस मिश्रण से बर्तन को धोया जाए।
  5. हदीस का ज़ाहिर यह कहता है कि यह आदेश सभी कुत्तों के लिए है। उन कुत्तों के लिए भी, जिन्हें शरीयत ने अपने घर में रखने की अनुमति दी है। जैसे शिकार के लिए और घर एवं मवेशियों की सुरक्षा के लिए पाले जाने वाले कुत्ते।
  6. साबुन एवं इस प्रकार की अन्य चीज़ें मिट्टी का स्थान नहीं ले सकतीं। क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने स्पष्ट रूप से मिट्टी का ज़िक्र किया है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 45) (172). صحيح مسلم (1/ 234) (279). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 14). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص24).

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मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे बहुत ज़्यादा मज़ी (चिपचिपा सफ़ेद तरल जो पेशाब के रास्ते से) आती थी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दामाद होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि मैं आपसे इस बारे में पूछूँ। अतः मैंने मिक़दाद बिन असवद को पूछने का आदेश दिया (और उन्हों ने पूछा) तो आपने कहा : "ऐसा व्यक्ति अपना लिंग धोने के बाद वजू करेगा।

عَنْ عَلِيٍّ رضي الله عنه قَالَ: كُنْتُ رَجُلًا مَذَّاءً وَكُنْتُ أَسْتَحْيِي أَنْ أَسْأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِمَكَانِ ابْنَتِهِ فَأَمَرْتُ الْمِقْدَادَ بْنَ الْأَسْوَدِ فَسَأَلَهُ فَقَالَ: «يَغْسِلُ ذَكَرَهُ وَيَتَوَضَّأُ». وَلِلبُخَاريِّ: فَقَالَ: «تَوَضَّأْ وَاغْسِلْ ذَكَرَكَ».
अली रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे बहुत ज़्यादा मज़ी (चिपचिपा सफ़ेद तरल जो पेशाब के रास्ते से) आती थी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दामाद होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि मैं आपसे इस बारे में पूछूँ। अतः मैंने मिक़दाद बिन असवद को पूछने का आदेश दिया (और उन्हों ने पूछा) तो आपने कहा : "ऐसा व्यक्ति अपना लिंग धोने के बाद वजू करेगा।" बुखारी में है : "वज़ू करो और अपना लिंग धोओ।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि उनको अकसर मज़ी निकल जाया करती थी। दरअसल मज़ी एक प्रकार का पतला, चिपचिपा, सफ़ेद पानी है, जो वासना के समय या संभोग से पहले लिंग से निकलता है। और उनको पता भी नहीं था कि मज़ी निकलने के बाद क्या करना चाहिए। परंतु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछने में लज्जा बाधा बन रही थी, क्योंकि आपकी बेटी फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अनहा उनके निकाह में थीं। अतः मिक़दाद रज़ियल्लाहु अनहु से कहा कि वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इसके बारे में पूछें। तब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा कि वह पहले अपना लिंग धो लें और उसके बाद वज़ू कर लें।

फ़ायदे
  1. अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु की फ़ज़ीलत कि लज्जा उनके लिए किसी माध्यम द्वारा पूछने में बाधा नहीं बनी।
  2. फ़तवा पूछने के लिए किसी को अपना प्रतिनिधि बनाना जायज़ है।
  3. किसी मसलहत की बिना पर इन्सान वह बातें बता सकता है, जिनको बताने से लज्जा बाधा बनती है।
  4. मज़ी नापाक है और उसे शरीर एवं कपड़े से धोना वाजिब है।
  5. मज़ी निकलने से वज़ू टूट जाता है।
  6. लिंग के साथ अंडकोश को धोना भी ज़रूरी है, क्योंकि इसका उल्लेख एक अन्य हदीस में हुआ है।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 62) (269). صحيح مسلم (1/ 247) (303). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 39). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص53). خلاصة الكلام شرح عمدة الأحكام، لفيصل آل مبارك (ص29).

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वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना छोटा बच्चा लेकर आयीं जो अभी खाना नहीं खाता था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया तो उसने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। आपने पानी मंगवाकर उस पर छिड़क दिया, लेकिन उसे धोया नहीं।

عَنْ أُمِّ قَيْسٍ بِنْتِ مِحْصَنٍ رَضيَ اللهُ عنها: أَنَّهَا أَتَتْ بِابْنٍ لَهَا صَغِيرٍ لَمْ يَأْكُلِ الطَّعَامَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَجْلَسَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حَجْرِهِ، فَبَالَ عَلَى ثَوْبِهِ، فَدَعَا بِمَاءٍ، فَنَضَحَهُ وَلَمْ يَغْسِلْهُ.
उम्मे क़ैस बिंत मेहसन -रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि : वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना छोटा बच्चा लेकर आयीं जो अभी खाना नहीं खाता था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया तो उसने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। आपने पानी मंगवाकर उस पर छिड़क दिया, लेकिन उसे धोया नहीं।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

उम्मे क़ैस बिंत मेहसन रज़ियल्लाहु अन्हा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना बच्चा लेकर आयीं, जो अपनी कम उम्री के कारण अभी खाना नहीं खाता था। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया, तो बच्चे ने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। इस पर आपने पानी मँगवाया और उसे अपने कपड़े पर छिड़क दिया और उसे धोया नहीं।

फ़ायदे
  1. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का उत्तम आचरण एवं आपकी अत्यधिक विनम्रता।
  2. अच्छे व्यवहार, विनम्रता और छोटों के साथ नरमी बरतने, तथा बच्चों का सम्मान करके एवं उन्हें गोद में बिठाकर उनके बड़ों के दिलों को सांत्वना देने, इत्यादि के लिए प्रोत्साहन।
  3. बालक का मूत्र नापाक होता है, यद्यपि उसने अभी तक अपनी इच्छा से भोजन करना आरंभ न किया हो।
  4. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के इस कार्य को नज़्ह (पानी छिड़कना) कहा जाता है। यह उस छोटे लड़के के लिए ख़ास है, जो अभी खाना न खाता हो। अलबत्ता लड़की के पेशाब को धोना ज़रूरी है, भले ही वह छोटी हो।
  5. माँ का दूध पीने वाले लड़के के पाख़ाने को अन्य सभी नापाक चीज़ों की तरह धोना आवश्यक है।
  6. स्नान में पानी पहुँचाने के अतिरिक्त कुछ और चीज़ भी आवश्यक है।
  7. बेहतर यह है कि नापाकी की जगह को पाक करने में जल्दी की जाए; ताकि नापाकी से पवित्रता जल्दी प्राप्त हो जाए और इन्सान भूले नहीं।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 54) (223). صحيح مسلم (1/ 238) (287). الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري (1/ 42). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام (ص55). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (1/ 68).

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उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: بال أعرابي في المسجد، فقام الناس إليه لِيَقَعُوا فيه، فقال النبي صلى الله عليه وسلم : «دعوه وأريقوا على بوله سَجْلاً من ماء، أو ذَنُوبًا من ماء، فإنما بُعِثْتُمْ مُيَسِّرِينَ، ولم تُبْعَثُوا مُعَسِّرِينَ».
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि एक देहाती मस्जिद में पेशाब करने लगा, तो लोग उसे डाँटने के उद्देश्य से उसकी ओर बढ़े। लेकिन, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है और शब्द बुख़ारी के हैं।दर्जासह़ीह़
हवाला

الجامع المسند الصحيح (صحيح البخاري), تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري, تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر, دار طوق النجاة ترقيم محمد فؤاد عبدالباقي, ط 1422. رياض الصالحين-النووي-تعليق وتحقيق: الدكتور ماهر ياسين الفحل الناشر: دار ابن كثير للطباعة والنشر والتوزيع، دمشق - بيروت-الطبعة: الأولى، 1428 هـ - 2007 م. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين, تأليف: سليم بن عيد الهلالي, دار ابن الجوزي. إرشاد الساري لشرح صحيح البخاري, تأليف: أبو العباس أحمد بن محمد القسطلاني, الناشر: المطبعة الكبرى الأميرية, ط7 عام 1323.

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13 में से 8
13 हदीसें
  1. अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।
  2. एक देहाती आया और मस्जिद के एक किनारे में पेशाब करने लगा
  3. मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवित्रता की अवस्था में आपके पास बैठूँ! तो आपने फरमायाः सुबहानल्लाह! मोमिन नापाक -अपवित्र- नहीं होता।
  4. ''जब तुम शौच के लिए जाओ, तो पेशाब तथा पाखाना करते समय न क़िबला की ओर मुँह करो, न उसकी ओर पीठ ही करो; बल्कि पूरब अथवा पश्चिम की ओर मुँह कर लो।''
  5. जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।
  6. मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे बहुत ज़्यादा मज़ी (चिपचिपा सफ़ेद तरल जो पेशाब के रास्ते से) आती थी। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दामाद होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि मैं आपसे इस बारे में पूछूँ। अतः मैंने मिक़दाद बिन असवद को पूछने का आदेश दिया (और उन्हों ने पूछा) तो आपने कहा : "ऐसा व्यक्ति अपना लिंग धोने के बाद वजू करेगा।
  7. वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास अपना छोटा बच्चा लेकर आयीं जो अभी खाना नहीं खाता था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया तो उसने आपके कपड़े पर पेशाब कर दिया। आपने पानी मंगवाकर उस पर छिड़क दिया, लेकिन उसे धोया नहीं।
  8. उसे छोड़ दो और उसके पेशाब पर एक डोल पानी बहा दो। क्योंकि तुम आसानी पैदा करने के लिए भेजे गए हो। तुम्हें सख़्ती करने के लिए नहीं भेजा गया है।
  9. बिल्ली अपवित्र नहीं है। यह तुम्हारे आप-पास घूमने-फिरने वालों तथा घूमने-फिरने वालियों में से है।
  10. लड़की का पेशाब धोया जाएगा और लड़के के पेशाब पर छींटे मारे जाएँगे।
  11. वह उसे खुर्चेगी, फिर पानी से रगड़कर साफ़ करेगी, फिर धोएगी और उसी में नमाज़ पढ़ेगी।
  12. ख़ून को धो लेना ही तुझे काफ़ी है और उसका निशान तेरे लिए हानिकारक नहीं।
  13. जब कोई व्यक्ति अपने जूतों से गंदी रौंदे, तो उन्हें पाक करने वाली वस्तु मिट्टी है।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com