सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

पानी के अहकाम

6 हदीसें

तुममें से कोई ठहरे हुए पानी में, जो बहता न हो, पेशाब न करे कि फिर उससे नहाए भी।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: "لا يَبُولَنَّ أحَدُكم في الماء الدَّائِم الذي لا يجْرِي، ثمَّ يَغتَسِل مِنه". وفي رواية: "لا يغتسل أحدكُم في الماء الدَّائم وهو جُنُب".
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तुममें से कोई ठहरे हुए पानी में, जो बहता न हो, पेशाब न करे कि फिर उससे नहाए भी।" तथा एक रिवायत में हैः "तुममें से कोई जनाबत की हालत में ठहरे हुए पानी में स्नान न करे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ठहरे हुए पानी में, जो बहता न हो, पेशाब करने से मना किया है। क्योंकि इससे पानी गंदा होता है और कभी-कभी पेशाब के माध्यम से उसमें कुछ बीमारियाँ प्रवेश कर जाती हैं, जो पानी का प्रयोग करने वाले हर व्यक्ति को हानि पहुँचा सकती हैं। बल्कि ऐसा भी संभव है खुद पेशाब करने वाले को उस पानी से नहाना पड़े। तो आदमी उस पानी में पेशाब कैसे कर सकता है, जिससे बाद में खुद उसीको पवित्रता प्राप्त करनी हो? इसी तरह, ठहरे हुए पानी से जनाबत का स्नान करने से मना किया है। क्योंकि इससे पानी में जनाबत की गंदगियाँ प्रवेश कर जाती हैं।

हवाला

تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام لابن عثيمين، ط1، مكتبة الصحابة، الإمارات، 1426هـ. عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

समुद्र का पानी स्वयं पाक है एवं दूसरों को पाक करने वाला है और उसका मरा हुआ जानवर हलाल है।

عَن أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: سَأَلَ رَجُلٌ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنَّا نَرْكَبُ البَحْرَ، وَنَحْمِلُ مَعَنَا القَلِيلَ مِنَ الْمَاءِ، فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا، أَفَنَتَوَضَّأُ مِنَ الْبَحْرِ؟ فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ، الحِلُّ مَيْتَتُهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम समुद्री यात्रा पर निकलते हैं और हमारे साथ थोड़ा-सा पानी होता है। उससे वज़ू कर लें, तो प्यासे रह जाएँगे। ऐसे मे क्या हम समुद्र के पानी से वज़ू कर लिया करें? अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : "समुद्र का पानी स्वयं पाक है एवं दूसरों को पाक करने वाला है और उसका मरा हुआ जानवर हलाल है।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहा : हम शिकार, व्यवसाय एवं इस प्रकार के दूसरे उद्देश्यों के तहत कश्तियों पर सवार होकर समुद्र का सफ़र करते हैं। हमारे पास पीने का पानी बस थोड़ा-सा होता है। अगर हम उसका प्रयोग वज़ू एवं स्नान में करेंगे, तो वह ख़त्म हो जाएगा और पीने का पानी नहीं बचेगा। ऐसे में क्या हमारे लिए समुद्र के पानी से वज़ू करन जायज़ होगा।? तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने समुद्र के पानी के बारे में फ़रमाया : उसका पानी खुद भी पाक है और उसके अंदर दूसरे को पाक करने की क्षमता भी मौजूद है। उससे वज़ू एवं स्नान जायज़ हैं। उससे निकलने वाली मछलियों आदि का खाना भी जायज़ है, यद्यपि वह मरी हुई अवस्था में पानी के ऊपर तैरती हुई ही क्यों न पाई जाएँ, किसी ने उनका शिकार न भी किया हो, तब भी कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

फ़ायदे
  1. समुद्री जानवर मरी हुई अवस्था में भी जायज़ हैं। यानी ऐसे जानवर, जो समुद्र ही में रहते हैं, अगर उसके अंदर मर जाएँ, तो उन्हें खाना जायज़ है।
  2. सवाल करने वाले को उसके फ़ायदे को देखते हुए सवाल से अधिक जवाब देना।
  3. किसी पाक चीज़ के मिलने से पानी का स्वाद, रंग या गंध बदल जाए, तो वह पाक ही रहता है, बस शर्त यह है कि पानी असली हालत पर बाक़ी रहे, यद्यपि वह सख़्त नम्कीन, सख़्त गर्म या सख़्त ठंडा ही क्यों न हो जाए।
  4. समुद्र का पानी छोटी और बड़ी नापाकियों को दूर कर देता है और किसी पाक वस्तु, जैसे शरीर या कपड़े आदि की गंदगी को भी उससे दूर किया जा सकता है।
हवाला

سنن أبي داود (1/ 62) (83). سنن الترمذي (1/ 111) (69). سنن النسائي (1/ 50) (59). سنن ابن ماجه (1/ 250) (386). مسند أحمد (12/ 171) (7233). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (1/ 28). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (1/ 59). توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، لعبد الله البسام (1/ 116).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

पानी पवित्र तथा पवित्र करने वाला है। उसे कोई वस्तु अपवित्र नहीं करती।

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه أنه قيل لرسول الله صلى الله عليه وسلم : أنتوضأ من بِئر بُضَاعَةَ وهي بئر يُطرحُ فيها الحَيضُ ولحم الكلاب والنَّتَنُ؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «الماء طهور لا ينجسه شيء».
अबू सईद खुदरी -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा गया : क्या हम बूज़ाआ नामी कुएँ से वज़ू करें, जिसमें माहवाारी के कपड़े और कुत्ते के गोश्त तथा सड़ी और बदबूदार चीज़ें डाली जाती हैं? अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “पानी पवित्र तथा पवित्र करने वाला है। उसे कोई वस्तु अपवित्र नहीं करती।”
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- سنن أبي داود، سليمان بن الأشعث السِّجِسْتاني، تحقيق: محمد محيي الدين عبد الحميد، المكتبة العصرية، صيدا - بيروت. - مسند الإمام أحمد بن حنبل، المحقق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون إشراف: د عبد الله بن عبد المحسن التركي، مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. - السنن الكبرى، للنسائي، حققه وخرج أحاديثه: حسن عبد المنعم شلبي. أشرف عليه: شعيب الأرناؤوط مؤسسة الرسالة – بيروت الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2001 م. - مرعاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح: أبو الحسن عبيد الله المباركفوري - إدارة البحوث العلمية والدعوة والإفتاء - الجامعة السلفية - بنارس الهند الطبعة: الثالثة - 1404 هـ، 1984. - توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

जब पानी दो क़ुल्ला (दो बड़े-बड़े घड़ों के बराबर) हो जाए, तो वह गंदगी को प्रभावी होने नहीं देता।

عَن عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رضي الله عنهما قَالَ: سُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنِ الْمَاءِ وَمَا يَنُوبُهُ مِنَ الدَّوَابِّ وَالسِّبَاعِ، فَقَالَ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ لَمْ يَحْمِلِ الْخَبَثَ».
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से उस पानी के बारे में पूछा गया, जिसपर चौपाये और दरिंदे आते-जाते रहते हों। अतः आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : "जब पानी दो क़ुल्ला (दो बड़े-बड़े घड़ों के बराबर) हो जाए, तो वह गंदगी को प्रभावी होने नहीं देता।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा गया कि वह पानी पाक है या नहीं, जिसपर चौपाये और दरिंदे पानी पीने आदि के लिए आते-जाते रहते हों, तो आपने जवाब दिया कि जब पानी दो बड़े-बड़े घड़ों के बराबर हो जाए, जो आज के हिसाब से 210 लीटर होता है, तो वह ज़्यादा पानी है और वह नापाक नहीं होता। यह और बात है कि कोई नापाक चीज़ मिलने के कारण उसके रंग या स्वाद या गंध में से कोई विशेषता बदल जाए, तो नापाक हो जाएगा।

फ़ायदे
  1. कोई नापाक वस्तु मिलने के कारण पानी के रंग या स्वाद या गंध में से कोई एक विशेषता बदल जाए, तो वह नापाक हो जाता है। इस हदीस में जो बात कही है, वह आम हालात को ध्यान में रखकर कही गई है, कोई निश्चित बात नहीं।
  2. उलेमा इस बात पर एकमत हैं कि अगर कोई नापाक चीज़ पानी को बदल दे, तो पानी नापाक हो जाएगा, कम हो कि ज़्यादा।
हवाला

سنن أبي داود (1/ 46) (63). سنن الترمذي (1/ 109) (67). سنن النسائي (1/ 46) (52). سنن ابن ماجه (1/ 324) (517). مسند أحمد (8/ 211) (4605). توضيح الأحكام، للبسام (1/ 121). فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، لابن عثيمين (1/ 67). منحة العلام، لعبد الله الفوزان (1/ 35).

यह हदीस HadeethEnc.com पर

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मैमूना- रज़ियल्लाहु अन्हा- के स्नान के शेष पानी से स्नान कर लिया करते थे

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما أن النبي صلى الله عليه وسلم كان يغتسل بفضل ميمونة رضي الله عنها .
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मैमूना -रज़ियल्लाहु अन्हा- के स्नान के शेष पानी से स्नान कर लिया करते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- منحة العلام في شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله الفوزان - طبعة دار ابن الجوزي - الطبعة الأولى 1428. - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام: تأليف الشيخ صالح الفوزان- مؤسسة الرسالة. - توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام: تأليف عبد الله البسام - مكتبة الأسدي – مكة المكرمة – الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

पानी नापाक नहीं होता।

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: اغتسل بعض أزواج النبي صلى الله عليه وسلم في جَفْنَةٍ، فجاء النبي صلى الله عليه وسلم ليتوضأ منها أو يغتسل، فقالت: له يا رسول الله، إني كنت جُنُبًا؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إن الماء لا يَجْنُبُ».
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की एक पत्नी ने एक बड़े बरतन के पानी से स्नान किया और उसके बाद नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उसी पानी से वज़ू अथवा स्नान करने के लिए आए, तो उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं अपवित्र थी! यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "पानी नापाक नहीं होता।"
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

توضيح الأحكام للشيخ البسام، ط5، مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، 1423ه. سُبل السلام، للصنعاني، دار الحديث. تسهيل الإلمام للشيخ صالح الفوزان، بعناية: عبدالسلام السليمان، ط1، 1427ه. شرح الشيخ ابن عثيمين، تحقيق صبحي رمضان وآخر، ط1، المكتبة الإسلامية، مصر، 1427ه. منحة العلَّام للشيخ عبد الله بن صالح الفوزان، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1427ه.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com