सीधे कंटेंट पर जाएँ
तशरीह के साथ हदीसें

ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी मामले का ज़िम्मवार बने और उन्हें कठिनाई में डाले, तू भी उसे कठिनाई में डाल तथा जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी मामले का ज़िम्मेदार बने और उनके साथ नर्मी करे, तू भी उसके साथ नर्मी कर।

عن عائشة رضي الله عنها قَالَتْ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم- يقُولُ في بيتي هَذَا: «اللهم من وَلِيَ من أمر أمتي شيئًا فَشَقَّ عليهم، فَاشْقُقْ عليه، ومن وَلِيَ من أمر أمتي شيئًا فَرَفَقَ بهم، فَارْفُقْ به».
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः "ऐ अल्लाह! जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी मामले का ज़िम्मदार बने और उन्हें कठिनाई में डाले, तू भी उसे कठिनाई में डाल तथा जो व्यक्ति मेरी उम्मत के किसी मामले का ज़िम्मेदार बने और उनके साथ नर्मी करे, तू भी उसके साथ नर्मी कर।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में सत्ता के महत्व को बताया गया है। अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने दुआ की है कि जिसे किसी भी प्रकार की सत्ता प्राप्त हो और वह लोगों को कठिनाई में डाले तो अल्लाह उसके साथ उसी प्रकार का व्यवहार करे। इसी तरह जो उनके साथ न्याय, दया एवं नर्मी का व्यवहार करे, अल्लाह उसे इसका बदला दे। दरअसल अल्लाह की ओर से इनसान को उसी प्रकार का बदला दिया जाता है, जिस प्रकार का उसका अमल होता है।

हवाला

صحيح مسلم, ترقيم محمد فؤاد عبد الباقي, دار إحياء التراث العربي, بيروت. شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين, دار مدار الوطن للنشر، الرياض, الطبعة، 1426هـ. بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي, دار ابن الجوزي. تطريز رياض الصالحين، لفيصل بن عبد العزيز المبارك النجدي, تحقيق: عبد العزيز آل حمد, دار العاصمة, الطبعة الأولى، 1423هـ. كنوز رياض الصالحين، بإشراف حمد العمار, دار كنوز إشبيليا, الطبعة الأولى, 1430ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد بن علان الصديقي, دار الكتاب العربي. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين, مؤسسة الرسالة, الطبعة الرابعة عشر, 1407ه. فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي، دار الكتب العلمية، بيروت - لبنان، الطبعة الاولى، 1415ه - 1994م.

यह हदीस HadeethEnc.com पर
इमाम (शासनाध्यक्ष) के उत्तरदायित्व

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com