जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बताती हैं कि जब से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वाले मदीना आए, उन्होंने लगातार तीन दिन तक गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई, यहाँ तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मृत्यु को प्राप्त हो गए।
फ़ायदे
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके घर वालों की तंगदस्ती का बयान। क्योंकि असल जीवन तो आख़िरत का जीवन है।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : ज़ाहिर बात यह है कि ज़्यादातर उनके पेट न भरने का कारण उनके पास चीज़ों की कमी थी। हालाँकि, कभी-कभी उन्हें कुछ मिल भी जाता था, लेकिन वे अपने ऊपर दूसरों को तरजीह देते थे।
हवाला
صحيح البخاري (7/ 75) (5416).
صحيح مسلم (4/ 2282) (2970).
المفهم لما أشكل من تلخيص كتاب مسلم (7/ 129).
البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (45/ 129).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com