عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ المُؤْمِنينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: مَا أَكَلَ آلُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكْلَتَيْنِ فِي يَوْمٍ إِلَّا إِحْدَاهُمَا تَمْرٌ.
मोमिनों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक दिन में कभी दो बार पेट भरकर भोजन नहीं किया, परंतु उनमें से एक बार का भोजन अनिवार्य रूप से खजूर होता था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा बताती हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के घर वालों ने एक ही दिन में कभी भी दो समय का ऐसा भोजन नहीं किया जिसमें से एक समय का भोजन खजूर न रहा हो।
फ़ायदे
- अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके घर वालों का सादा रहन-सहन कि उन्हें दिन में कभी-कभी सिर्फ़ एक वक़्त का खाना ही मिल पाता था।
- खजूर उनके लिए अन्य चीज़ों से अधिक सुलभ था।
- ज़ुह्द और थोड़े पर संतोष करने की फ़ज़ीलत। यह नबियों का अख़लाक़ और रसूलों के सरदार की सीरत है।
- एक दिन में दो बार भोजन करना एक जायज़ और अनुमत कार्य है। यह अरबों की एक प्रसिद्ध आदत थी। वे दिन में दो भोजन करते थे : दोपहर का भोजन और रात का भोजन।
हवाला
صحيح البخاري (8/ 97) (6455). صحيح مسلم (4/ 2282) (2971). فتح الباري لابن حجر (11/ 292).