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तशरीह के साथ हदीसें

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो अथवा तीन अथवा चार अंगुल समान रेशम पहनने की अनुमति दी है

عن عمر بن الخطاب رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ الله صلى الله عليه وسلم «نهى عن لُبُوسِ الحَرِيرِ إلا هكذا، ورَفَعَ لنا رسول الله صلى الله عليه وسلم أُصْبُعَيْهِ: السَّبَّابَةَ، والوُسْطَى». ولمسلم «نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن لُبْس ِالحَرِيرِ إلا مَوْضِعَ أُصْبُعَيْنِ، أو ثلاثٍ، أو أربعٍ».
उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने रेशम पहनने से मना किया है, परन्तु इतना-सा। तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें शहादत की और बीच वाली दो अंगुलियाँ उठाकर दिखाईं। तथा मुस्लिम की रिवायत में है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रेशम पहनने से मना किया है। यह और बात है कि दो, तीन या चार अंगुल के बराबर हो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मर्दों को रेशमी कपड़े के प्रयोग से मना किया है, सिवाय उसके जिसे अपवाद घोषित किया गया है। वैसे बुख़ारी तथा मुस्लिम की रिवायत में दो ऊँगली तक की छूट दी गई है, जबकि मुस्लिम की रिवायत में तीन या चार उँगली की छूट दी गई है। ऐसे में अधिकतर को लिया जाएगा। इसलिए वस्त्र में चार उँगली तक रेशम होने में कोई नुक़सान नहीं है।

हवाला

1- صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. 2- صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. 3- تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله بن عبد الرحمن البسام، تحقيق: محمد صبحي حلاق، مكتبة الصحابة، الأمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، الطبعة: العاشرة 1426هـ. 4- تأسيس الأحكام، أحمد بن يحيى النجمي، دار علماء السلف، الطبعة: الثانية 1414هـ.

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