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तशरीह के साथ हदीसें

स्वप्न से संबंधित आदाब

9 हदीसें

जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की ओर से है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और उसे (लागों को) बताए। और जब इसके विपरीत ऐसा सपना देखे, जो उसे बुरा लगे, तो (जान ले कि) यह शैतान की ओर से है। अतः उससे अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इससे उसे कोई हानि नहीं होने वाली।

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الخُدْرِيِّ رضي الله عنه أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «إِذَا رَأَى أَحَدُكُمُ الرُّؤْيَا يُحِبُّهَا فَإِنَّهَا مِنَ اللَّهِ، فَلْيَحْمَدِ اللَّهَ عَلَيْهَا وَلْيُحَدِّثْ بِهَا، وَإِذَا رَأَى غَيْرَ ذَلِكَ مِمَّا يَكْرَهُ، فَإِنَّمَا هِيَ مِنَ الشَّيْطَانِ، فَلْيَسْتَعِذْ مِنْ شَرِّهَا، وَلاَ يَذْكُرْهَا لِأَحَدٍ، فَإِنَّهَا لَنْ تَضُرَّهُ».
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की ओर से है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और उसे (लागों को) बताए। और जब इसके विपरीत ऐसा सपना देखे, जो उसे बुरा लगे, तो (जान ले कि) यह शैतान की ओर से है। अतः उससे अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इससे उसे कोई हानि नहीं होने वाली।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि नींद की अवस्था में देखा जाने वाला अच्छा हर्षित करने वाला स्वप्न अल्लाह की ओर से होता है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करनी चाहिए और उसे बताना भी चाहिए। इसके विपरीत जब इन्सान को पसंद न आने वाला और दुखी करने वाला स्वप्न नज़र आए, तो जान ले कि यह शैतान की ओर से है। अतः उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इतना कर लेने के बाद उसे कोई हानि नहीं होगी। क्योंकि अल्लाह ने उपर्युक्त वस्तुओं को स्वप्न के नतीजे में सामने आने वाली बुराई से सुरक्षा का ज़रिया बनाया है।

फ़ायदे
  1. स्वप्न के प्रकार : 1- अच्छा स्वप्न। यह सच्चा स्वप्न अल्लाह की ओर से मिलने वाला सुसमाचार होता है, जो इन्सान देखता है या उसे दिखाया जाता है। 2- बिखरे हुए ख़्यालात, जिनके बारे में इन्सान जागृत अवस्था में सोचता रहता है। 3- शैतान द्वारा किसी व्यक्ति में दुःख तथा भय उत्पन्न करने का प्रयास।
  2. यहाँ अच्छे स्वप्न के बारे में जो कुछ बताया गया है उससे तीन बातें निकलकर सामने आती हैं : अच्छा स्वप्न देखने के बाद अल्लाह की प्रशंसा की जाए, उससे प्रसन्न हुआ जाए और उसे बताया जाए। लेकिन बताया उसी को जाए, जिससे मोहब्बत हो। उसे नहीं, जिससे नफ़रत हो।
  3. इसी तरह यहाँ बुरे स्वप्न के बारे में जो कुछ बताया गया, उससे पाँच बातें निकलकर आती हैं : उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, शैतान की बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, नींद से उठने के बाद तीन बार बाईं ओर थुतकारा जाए, उसका ज़िक्र किसी के सामने न किया जाए और जब सोने का इरादा हो, तो पहलू बदलकर सोया जाए। इतना कर लेने के बाद उसे कोई नुक़सान नहीं होगा।
  4. इब्न-ए-हजर कहते हैं : इसके अंदर यह हिकमत छुपी हुई है कि जब इन्सान अच्छे स्वप्न का ज़िक्र किसी ऐसे व्यक्ति के सामने करेगा, जो उससे मोहब्बत न रखता हो, तो वह द्वेष एवं ईर्ष्या के कारण उसका अनुचित अर्थ निकालेगा। ऐसे में हो सकता है कि स्वप्न का वही अर्थ सामने आ जाए और ऐसा न भी हो तो इन्सान दुखी ज़रूर होगा। इसी बात के मद्देनज़र किसी ऐसे व्यक्ति के सामने अच्छे स्वप्न का ज़िक्र करने से मना किया गया है, जो प्रिय न हो।
  5. नेमतें (कृपाएँ/अनुग्रह) प्राप्त होने पर और नए-नए एहसानों के मिलने पर अल्हम्दुलिल्लाह (सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है) कहना, क्योंकि यह कहना उन नेमतों की निरंतरता का कारण है।
हवाला

صحيح البخاري (9/ 43) (7045). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (11/ 181). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 370). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص510). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 124). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 657).

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जब दुनिया की समाप्ति का समय निकट आ जाएगा तो मोमिन का स्वप्न मुश्किल ही से झूठा निकलेगा। तथा मोमिन का स्वप्न नबुव्वत (ईशदौत्य) के छयालीस भागों में से एक भाग है।

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «إذا اقترب الزمان لم تَكَدْ رؤيا المؤمن تكذب، ورؤيا المؤمن جزء من ستة وأربعين جزءا من النبوة». وفي رواية: «أصدقكم رؤيا، أصدقكم حديثا».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जब दुनिया की समाप्ति का समय निकट आ जाएगा तो मोमिन का स्वप्न मुश्किल ही से झूठा निकलेगा। तथा मोमिन का स्वप्न नबुव्वत के छयालीस भागों में से एक भाग है। तथा एक रिवायत में हैः तुममें से उस व्यक्ति का स्वप्न सबसे सच्चा होगा, जो सबसे ज़्यादा सच बोलता है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415ه. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425ه. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، ط1، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ. سلسلة الأحاديث الصحيحة وشيء من فقهها وفوائدها للألباني، مكتبة المعارف، ط1، الرياض، 1422ه. مدارج السالكين بين منازل إياك نعبد وإياك نستعين لابن قيم الجوزية ، تحقيق: محمد المعتصم بالله البغدادي، ط3، دار الكتاب العربي، بيروت، 1416 ه. عون المعبود شرح سنن أبي داود، ومعه حاشية ابن القيم: تهذيب سنن أبي داود وإيضاح علله ومشكلاته للعظيم آبادي ط3، دار الكتب العلمية، بيروت، 1415 هـ.

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अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।

عَنْ أَبِي قَتَادَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ مِنَ اللَّهِ، وَالحُلُمُ مِنَ الشَّيْطَانِ، فَإِذَا حَلَمَ أَحَدُكُمْ حُلُمًا يَخَافُهُ فَلْيَبْصُقْ عَنْ يَسَارِهِ، وَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ مِنْ شَرِّهَا، فَإِنَّهَا لاَ تَضُرُّهُ».
अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने बताया कि अच्छा और ख़ुशी देने वाला स्वप्न अल्लाह की ओर से है। जबकि अप्रिय एवं चिंतित करने वाला स्वप्न शैतान की ओर से है। अतः जो व्यक्ति अप्रिय स्वप्न देखे, वह बाईं ओर थुत्कारे और उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगे। क्योंकि अल्लाह ने उक्त कार्य को बुरे स्वप्न के नतीजे में सामने आने वाली अप्रिय घटना से सुरक्षा का साधन बनाया है।

फ़ायदे
  1. अरबी शब्द "अल-रूअ्या" एवं "अल-हुल्मु" से मुराद ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें इन्सान सोने की अवस्था में देखता है। लेकिन पहले शब्द का इस्तेमाल आम तौर से उन अच्छी और भली चीज़ों के लिए होता है जिन्हें वह स्वप्न में देखता है और दूसरे शब्द का इस्तेमाल आम तौर से उन बुरी और खराब चीज़ों के लिए होता है जिन्हें वह अपने स्वप्न में देखता है। वैसे, दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक-दूसरे के स्थान पर भी होता है।
  2. सपनों के प्रकार : 1- अच्छा सपना : यह दरअसल अल्लाह की ओर से मिलने वाला सुसमाचार हुआ करता है, जो इन्सान देखता है या उसे दिखाया जाता है। 2- बिखरे हुए ख़्यालात : यानी ऐसी बातें जो इन्सान जगे हुए अवस्था में सोचता रहता है। 3- शैतान द्वारा इन्सान को दुखी एवं भयभीत करने के प्रयास में दिखाई जाने वाली चीज़ें।
  3. यहाँ अच्छे सपने के बारे में जो कुछ बताया गया है, उससे तीन बातें निकलकर सामने आती हैं : अच्छा सपना देखने के बाद अल्लाह की प्रशंसा की जाए, उससे ख़ुश हुआ जाए और उसे बता दिया जाए, लेकिन बताया उसी को जाए, जिससे प्रेम हो, उसे नहीं, जिससे नफ़रत हो।
  4. इसी तरह बुरे सपने के बारे में जो कुछ बताया गया है, उससे पाँच बातें निकलकर सामने आती हैं : उसकी बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, शैतान की बुराई से अल्लाह की शरण माँगी जाए, नींद से उठने के बाद तीन बार बाईं ओर थुतकारा जाए, उसका ज़िक्र किसी के सामने कतई न किया जाए और जब दोबारा सोने का इरादा हो तो करवट बदलकर सोया जाए। इतना कर लेने के बाद कोई नुक़सान नहीं होगा।
हवाला

صحيح البخاري (4/ 125) (3292). صحيح مسلم (4/ 1771) (2261). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (11/ 190). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (2/ 125). بهجة قلوب الأبرار، لعبد الرحمن آل سعدي (ص149). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (6/ 170). منار القاري، لحمزة محمد قاسم (1/ 44). المنهاج شرح صحيح مسلم، للنووي (15/ 18).

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सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो

عن وَاثِلَةَ بن الأَسْقَعِ ـ رضي الله عنه ـ مرفوعاً: «إن من أعظم الفِرَى أن يَدَّعِيَ الرجلُ إلى غير أبيه، أو يُرِي عَيْنَهُ ما لم تَرَ، أو يقول على رسول الله صلى الله عليه وسلم ما لم يَقْلْ».
वासिला बिन असक़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة . - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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नुबुव्वत में से केवल शुभ सूचनाएँ बाकी रह गई हैं।

عن أبي هريرة ـ رضي الله عنه ـ قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «لم يبقَ من النُّبُوَّةِ إلا المُبَشِّرَاتُ» قالوا: وما المُبَشِّرَاتُ ؟ قال: «الرؤيا الصالحة».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः नुबुव्वत में से केवल शुभ सूचनाएँ बाकी रह गई हैं। सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! शुभ सूचनाएँ क्या हैं? फ़रमायाः अच्छा स्वप्न।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में बताया है कि अच्छे स्वप्न शुभ सूचना देने वाली चीज़ें और वह्य का सिलसिला बंद होने के बाद शेष रहने वाले नबूवत के आसार में से है। अब आने वाले समय में क्या कुछ होने वाला है, उसे जानने का एकमात्र साधन अच्छे स्वप्न हैं।

हवाला

- صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق محمد الناصر، دار طوق النجاة. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى 1418ه. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - كنوز رياض الصالحين»، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि उसने मानो, मुझे जागते में देखा क्योंके शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «من رآني في المنام فَسَيَرَانِي في اليَقظة -أو كأنما رآني في الْيَقَظَةِ- لا يَتَمَثَّلُ الشيطان بي».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि मानो, उसने मुझे जागते में देखा, क्योंकि शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

उलेमा ने इस हदीस के कई अर्थ बयान किए हैं : पहला : इससे मुराद अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने के लोग हैं और मतलब यह है कि जिसने आपको स्वप्न में देखा और उसने अभी तक हिजरत नहीं की थी, उसे अल्लाह हिजरत और आपके पास उपस्थित होकर जागने की अवस्था में आपको देखने का सुयोग प्रदान करेगा। दूसरा : स्वप्न में जो नज़र आता है, वह सचमुच अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ही होते हैं। यानी आत्मा के जगत में। इनसान का इस प्रकार का स्वप्न सच्चा होता है। बस शर्त यह है कि उसने आपको उसी रंग-रूप के साथ देखा हो, जो हदीस की किताबों में बयान किए गए हैं। तीसरा : उसे उस स्वप्न का मूर्त रूप आख़िरत में जागने की अवस्था में नज़र आएगा, जब उसे आपकी निकटता एवं सिफ़ारिश आदि प्राप्त होगी। "या फिर कहा कि मानो, उसने मुझे जागते में देखा" यह मुस्लिम की रिवायत है, जिसमें इस बात में संदेह व्यक्त किया गया है कि आपने वह जागते हुए भी मुझे देखेगा कहा था या मानो उसने मुझे जागते में देखा कहा था। इसका अर्थ यह है कि जिसने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को स्वप्न में आपकी असल शक्ल-सूरत में देखा, गोया उसने आपको जागते में देखा। इस प्रकार आपका यह वाक्य आपकी एक अन्य हदीस की तरह है, जो सहीह बुख़ारी एवं सहीह मुस्लिम में है : "जिसने मुझे स्वप्न में देखा, उसने मुझे ही देखा।" इसी तरह सहीह बुख़ारी एवं सहीह मुस्लिम की एक अन्य रिवायत में है : "जिसने मुझे स्वप्न में देखा, उसने सचमुच मुझे ही देखा।" आगे आपने कहा : "शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।" जबकि एक रिवायत के शब्द हैं : "जिसने मुझे स्वप्न में देखा, उसने मुझे ही देखा। शैतान के वश में नहीं है कि वह मेरा रूप धारण कर सामने आए।" यानी शैतान के लिए अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की असल रूप धारण करना संभव नहीं है। वरना कभी-कभी शैतान आता है और कहता है कि वह अल्लाह का रसूल है। लेकिन उसकी शक्ल व सूरत अल्लाह के रसूल जैसी नहीं होती। अतः वह अल्लाह का रसूल नहीं होता। इसलिए जब इनसान स्वप्न में किसी व्यक्ति को देखे और उसके दिल में आए कि वह अल्लाह का नबी है, तो यह जानने का प्रयास करे कि उसके स्वप्न में आने वाले व्यक्ति की विशषताएँ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की विशेषताओं के अनुरूप हैं या नहीं? यदि अनुरूप हैं, तो उसने सचमुच अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देखा है और अगर अनुरूप नहीं हैं, तो वह अल्लाह का रसूल नहीं हो सकता। दरअसल होता यह है कि शैतान सोए हुए व्यक्ति के दिल में यह भ्रम डालता है कि यह अल्लाह का रसूल है। हालाँकि वह रसूल होता नहीं है। इमाम अहमद ने मुसनद और इमाम तिरमिज़ी अश-शमाइल में यज़ीद अल-फ़ारसी से रिवायत किया है कि वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को स्वप्न में देखा, तो अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से कहा कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को स्वप्न में देखा है, तो उन्होंने बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाया करते थे : "शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता। अतः जिसने मुझे स्वप्न में देखा, उसने सचमुच मुझे ही देखा।" अतः तुमने जिस व्यक्ति को देखा है, क्या तुम उसका रंग-रूप बयान कर सकते हो? मैंने कहा कि अवश्य। फिर मैंने उसका हुलिया बयान किया, तो उन्होंने कहा : यदि तुमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जागते में देखा होता, तब भी आपका हुलिया इससे अधिक बयान नहीं कर पाते। यानी उन्होंने सचमुच अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देखा था।

हवाला

كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر العمار، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430هـ. بهجة الناظرين، تأليف: سليم بن عيد الهلالي، نسخة الكترونية، لا يوجد بها بيانات نشر. صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، تأليف: مسلم بن الحجاج النيسابوري، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي الناشر: دار إحياء التراث العربي – بيروت. شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426هـ. رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل، الطبعة الأولى، 1428هـ. التنوير شرح الجامع الصغير، تأليف: محمد بن إسماعيل الصنعاني، تحقيق: د. محمد إسحاق محمد إبراهيم، الناشر: مكتبة دار السلام، الطبعة الأولى، 1432هـ.

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क्या तुममें से किसी ने कोई सपना देखा है? फिर अल्लाह जिसे चाहता, वह आपके सामने अपने स्वप्न बयान करता। एक दिन सुबह के समय आपने हमसे कहा : आज रात मेरे पास दो व्यक्ति (फ़रिश्ते) आए और बोले : चलो। चुनांचे मैं उनके साथ चल पड़ा।

عن سَمُرة بن جندب رضي الله عنه قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم مما يُكثر أن يقول لأصحابه: «هل رأى أحدٌ منكم من رؤيا؟» فَيَقُصُّ عليه من شاء الله أن يَقُص، وإنه قال. لنَّا ذات غَدَاة: «إنه أتَاني اللَّيلة آتِيَان، وإنَّهما قالا لي: انْطَلق، وإني انْطَلَقت معهما، وإنا أتَيْنا على رجُلٍ مُضْطَجِعٍ، وإذا آخر قائِمٌ عليه بِصَخْرة، وإذا هو يَهْوي بالصَّخْرَة لرَأْسِه، فَيَثْلَغُ رأسَه، فَيَتَدَهْدَهُ الحَجَر ها هنا، فَيَتْبَعُ الحجر فَيَأخُذُهُ فلا يرْجِع إليه حتى يَصِحَّ رأسه كما كان، ثم يَعُود عليه، فَيُفْعَل به مِثْل ما فعل المرَّة الأولى!» قال: «قلت لهما: سُبحان الله! ما هذان؟ قالا لي: انْطَلق انْطَلق، فانْطَلقنا، فأتَيْنا على رجُل مُسْتَلْقٍ لِقَفَاهُ، وإذا آخر قائم عليه بِكَلُّوبٍ من حديد، وإذا هو يَأتِي أحَدَ شِقَّيْ وجْهه فَيُشَرْشِرُ شِدْقَهُ إلى قَفَاهُ، ومِنْخَرَه إلى قَفَاه، وعَيْنَه إلى قَفَاه، ثم يَتَحَوَّلُ إلى الجانب الآخر، فيفعل به مِثْل ما فعل بالجَانِب الأول، فما يَفْرَغُ من ذلك الجانب حتى يَصِحَّ ذلك الجَانب كما كان، ثم يَعُود عليه فَيَفْعل مثل ما فعل في المرَّة الأولى» قال: «قلت: سُبْحان الله! ما هذان؟ قالا لي: انْطَلق انْطَلق، فانْطَلقْنا، فَأَتَيْنَا على مِثْلِ التَّنُّورِ» فأحْسِب أنه قال: «فإذا فيه لَغَطٌ، وأصوات، فَاطَّلَعْنَا فيه فإذا فيه رِجَال ونساء عُرَاةٌ، وإذا هُمْ يَأتِيِهمْ لَهَبٌ من أسْفَلَ منهم، فإذا أتاهُمْ ذلك اللَّهَبُ ضَوْضَوْا. قلت: ما هؤلاء؟ قالا لي: انْطَلق انْطَلق، فانْطَلقنا، فأتينا على نهر» حَسِبْت أنه كان يقول: «أحْمَر مِثْل الدَّم، وإذا في النهر رجُل سَابِحٌ يَسْبَح، وإذا على شط النَّهر رجُل قد جَمَعَ عنده حِجَارة كثيرة، وإذا ذلك السَّابحُ يَسْبَحُ، ما يَسْبَح، ثم يأتي ذلك الذي قد جَمَعَ عنده الحِجَارة، فَيَفْغَرُ له فَاهُ، فَيُلْقِمُهُ حَجَرًا، فَينْطَلِقُ فَيَسْبَحُ، ثم يَرْجِع إليه، كلَّما رَجَعَ إليه، فَغَرَ له فَاهُ، فَألْقَمَهُ حجرا، قلت لهما: ما هذان؟ قالا لي: انْطَلق انْطَلق، فَانْطَلَقْنَا، فَأَتَيْنَا على رَجُل كَريهِ المرْآةِ، أو كَأكْرَهِ ما أنت رَاءٍ جُلًا مَرْأىً، فإذا هو عنده نار يَحُشُّهَا ويَسْعَى حولها. قلت لهما: ما هذا؟ قالا لي: انْطَلِق انْطَلِق، فَانْطَلَقْنَا، فَأَتَيْنَا على رَوضَة مُعْتَمَّةٍ فيها من كلِّ نَوْر الرَّبيعِ، وإذا بين ظَهْرَي الرَّوْضَةِ رجُلٌ طَويل لا أكَادُ أرى رأسه طُولا في السماء، وإذا حَول الرجُل من أكثر ولدان رَأيْتُهُمْ قَطُّ، قلت: ما هذا؟ وما هؤلاء؟ قالا لي: انْطَلق انْطَلق، فَانْطَلَقْنَا، فَأَتَيْنَا إلى دَوْحَة عظيمة لم أرَ دَوْحَة قَطُّ أعظم منها، ولا أحْسَن! قالا لي: ارْقِ فيها، فارْتَقَيْنَا فيها إلى مدينة مَبْنِيَّةٍ بِلَبنٍ ذَهب ولَبَن فِضَّةٍ، فَأَتَيْنَا باب المدينة فَاسْتَفْتَحْنَا، فَفُتِحَ لنا فَدَخَلْنَاها ، فَتَلَقَّانَا رِجال شَطْرٌ من خَلْقِهِم كأحْسَن ما أنت راءٍ! وشطْر منهم كأقْبَح ما. أنت رَاء! قالا لهم: اذْهَبُوا فَقَعُوا في ذلك النَّهر، وإذا هو نهر مُعْتَرِضٌ يَجري كأن ماءه المَحْضُ في البَيَاضِ، فَذَهَبُوا فَوَقَعُوا فيه. ثم رجَعُوا إلينا قد ذهب ذلك السُّوءُ عنهم، فصاروا في أحسن صورة» قال: «قالا لي: هذه جَنَّةُ عَدْنٍ، وهَذَاكَ مَنْزِلُكَ، فسَمَا بصري صُعُدً، فإذا قصر مِثْل الرَّبَابَةِ البَيْضَاء، قالا لي: هذاك مَنْزِلُكَ؟ قلت لهما: بارك الله فيكما، فَذَراني فأدخُلَه. قالا لي: أما الآن فلا، وأنت داخله، قلت لهما: فإني رأيت منذ الليلة عَجَبَا؟ فما هذا الذي رأيت؟ قالا لي: أما إنَّا سَنُخْبِرُكَ: أما الرُّجُل الأول الذي أتيت عليه يُثْلَغُ رأسه بالحَجَر، فإنه الرجل يأخذ القرآن فَيَرفُضُهُ، وينام عن الصلاة المَكتُوبة. وأما الرجل الذي أتيت عليه يُشَرْشَرُ شِدْقُهُ إلى قَفَاهُ، ومِنْخَرُهُ إلى قَفَاهُ، وَعَيْنُه إلى قَفَاهُ، فإنه الرَّجُل يَغْدُو من بَيْتِهِ فَيَكْذِبُ الكِذْبَةَ تَبْلُغُ الآفَاقَ. وأما الرجال والنساء العُراةُ الذين هُمْ في مثل بناء التَّنُّورِ، فَإنَّهُمُ الزُّنَاةُ والزَّوَاني، وأما الرَّجل الذي أتيت عليه يَسْبَح في النَّهر، ويُلْقِم الحِجَارة، فإنه آكل الربا، وأما الرجل الكَريهُ المرآة الذي عند النار يَحُشُّهَا وَيَسْعَى حَوْلَها، فإنه مَالك خَازِن جَهَنَّمَ، وأما الرَّجُل الطَّويل الذي في الرَّوْضَةِ، فإنه إبراهيم صلى الله عليه وسلم وأما الوِلْدَان الَّذِينَ حَوْلَهُ، فَكُلُّ مَوْلُودٍ ماتَ على الفِطْرَةِ» وفي رواية البرقاني: «وُلِدَ على الفِطْرة» فقال بعض المسلمين: يا رسول الله، وأولاد المشركين فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «وأولاد المشركين، وأما القوم الذين كانوا شَطْر منهم حَسَنٌ، وشَطْر منهم قَبِيِح، فإنهم قوم خَلَطُوا عملا صالحا وآخر سيئا، تجاوز الله عنهم». وفي رواية له: «رأيت اللَّيلة رجلين أتَيَانِي فأخْرَجَاني إلى أرض مُقَدَسة» ثم ذكره وقال: «فَانْطَلَقْنَا إِلَى نَقْبٍ مثل التَّنُّورِ، أعْلَاه ضَيِّقٌ وَأسْفَلُه واسِع؛ يَتَوَقَّدُ تَحْتَهُ نارًا، فإذا ارْتَفَعَتِ ارْتَفَعُوا حتى كَادُوا أن يَخْرُجُوا، وإذا خَمَدَتْ! رَجعُوا فيها، وفيها رجال ونساء عُرَاة». وفيها: «حتى أتَيْنَا على نَهْرٍ من دَمٍ» ولم يَشُكَّ «فيه رجل قائم على وَسَطِ النَّهر وعلى شَطِّ النَّهر رجُل، وبَيْنَ يَدَيه حِجَارة، فأقبل الرَّجُل الذي في النَّهر، فإذا أراد أن يَخرج رَمى الرَّجُل بِحَجر في فِيهِ، فَرَدَّه حيث كان، فَجَعل كلَّما جاء لِيَخْرُجَ جَعَل يَرْمِي. في فِيهِ بِحَجَر، فَيَرْجع كما كان». وفيها: « فَصَعِدَا بي الشَّجرة، فَأدْخَلاَنِي دَارًا لم أرَ قَطُّ أحْسَنَ منها، فيها رجال شُيُوخٌ وشباب». وفيها: «الذي رَأيْتَهُ يُشَقُّ شِدْقُهُ فَكَذَّابٌ، يُحَدِّثُ بِالكِذْبَةِ فتُحْمَلُ عنه حتى تَبْلُغَ الآفَاقَ، فَيُصْنَعُ به ما رأيت إلى يوم القيامة»، وفيها: «الَّذي رَأيْتَهُ يُشْدَخُ رأسه فرَجُل عَلَّمَه الله القرآن، فَنَام عنه بالليل، ولم يَعْمَل فيه بالنَّهار، فَيُفْعَلُ به إلى يوم القيامة، والدار الأولى التي دخلت دار عَامَّةِ المؤمنين، وأما هذه الدار فدار الشَّهداء، وأنا جِبْرِيلُ، وهذا مِيْكَائيل، فارفع رأسك، فرفعت رأسي، فإذا فَوْقِي مِثْلُ السَّحابِ، قالا: ذاك مَنْزِلُك، قلت: دَعَانِي أدخل منزلي، قالا: إنه بَقِي لك عُمُرٌّ لم تَسْتَكْمِلْهُ، فلو اسْتَكْمَلْتَهُ أتيت مَنْزِلك».
समुरा बिन जुन्दुब -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- प्रायः अपने सहाबा से फ़रमाया करते थे कि क्या तुममें से किसी ने कोई सपना देखा है? फिर अल्लाह जिसे चाहता, वह आपके सामने अपना स्वप्न बयान करता। एक दिन सुबह के समय आपने हमसे कहा : “आज रात मेरे पास दो व्यक्ति (फ़रिश्ते) आए और बोले : चलो। चुनाँचे मैं उनके साथ चल पड़ा। हम एक ऐसे स्थान पर पहुँचे, जहाँ एक व्यक्ति लेटा हुआ था और दूसरा व्यक्ति एक बड़ा-सा पत्थर लेकर उसके पास खड़ा था। वह पत्थार लेकर उसकी ओर बढ़ता और उसके सिर को फड़ देता। जब पत्थर लुढ़ककर दूर चला जाता, तो वह पत्थर के पास जाकर उसे उठा लाता और उस व्यक्ति के पास आता। इतने में उसका सिर दाबारा पहले जैसा हो चुका होता था। चुनाँचे, वह जो कुछ पहले किया था, उसे फिर से दोहराता था।" नबी –सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैं कि मैंने उन दोनों से पूछा : "अल्लाह की ज़ात पवित्र है! यह दोनों कौन हैं?" फ़रिश्तों ने कहा : अभी आगे चोल, अभी आगे चलो। "चुनाँचे हम चल दिए। फिर हम एक एसे व्यक्ति के पास पहुँचे, जो गुद्दी के बल चित लेटा हुआ था और एक व्यक्ति लोहे का अंकुड़ा लेकर उसके पास खड़ा था। वह उसके चेहरे के एक भाग में अंकुड़ा रखता और उसके जबड़े को गुद्दी तक फाड़ देता। फिर उसके नथने को गुद्दी तक तथा उसकी आँख को गुद्दी तक फाड़ देता। फिर चेहरे के दूसरे भाग की ओर जाता और उसके साथ भी वही करता, जो पहले भाग के साथ किया था। वह जब तक इस भाग का काम संपन्न करता, पहला भाग पूर्व की भाँति सही हो जाता। अतः, वह फिर से उसे फाड़ना शुरू कर देता।" आप –सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैं : यह देख मैंने कहा : "अल्लाह की ज़ात पवित्र है! यह दोनों कौन हैं?" फ़रिश्तों ने कहा : अभी आगे चलो, अभी आगे चलो। "चुनाँचे, हम चल दिए। फिर हम तंदूर जैसी एक वस्तु के पास पहुँचे।" वर्णनकर्ता कहते हैं : मुझे लगता है कि आपने फ़रमाया था : "वहाँ से हमें बड़ी चीख़ और पुकार सुनाई दी। हमने झाँककर देखा, तो उसमें नग्न पुरूष और महिलाएँ थीं। जब उनके नीचे से आग की लपटें आती थीं, तो वे सहायता के लिए फ़रियाद करने लगते। मैंने कहा : यह कौन लोग हैं? दोनों ने मुझसे कहा : अभी आगे चलो, अभी आगे चलो। चुनाँचे हम चल पड़े। यहाँ तक कि एक नहर के पास पहुँचे।" वर्णनकर्ता कहते हैं : मुझे लगता है कि आपने फ़रमाया था: “नहर लहू की तरह लाल थी और उसमें एक व्यक्ति तैर रहा था और एक व्यक्ति नहर के किनारे बैठा था, जिसके पास बहुत-से पत्थर जमा थे। जब तैराक तैरकर उसके पास आता, तो अपना मुँह खोल देता और किनारे में खड़ा व्यक्ति उसके मुख में एक पत्थर डाल देता। फिर वह तैरने लगता। फिर लौटकर उसके पास आता और मुँह खोल देता, तो पत्थरों के पास खड़ा व्यक्ति उसके मुँह में एक पत्थर डाल देता। मैंने फ़रिश्तों से कहा : यह दोनों कौन हैं? दोनों ने कहा : अभी और आगे चलो, अभी और आगे चलो। फिर हम चल पड़े और एक ऐसे व्यक्ति के पास पहुँचे, जो अत्यंत बदसूरत था। तुमने उससे अधिक बदसूरत व्यक्ति नहीं देखे होगा। मैंने देखा कि उसके पास आग जल रही है, जिसे वह जला रहा है और उसके चारों ओर चक्कर लगा रहा है। मैंने पूछा : यह कौन है? दोनो फ़रिश्तों ने उत्तर दिया : अभी और आगे चलो, अभी और आगे चलो। फिर हम चलने लगे, यहाँ तक कि एक गहरे हरे रंग की घनी वनस्पतियों वाले बाग के पास पहुँचे, जिसमें बसंत के प्रत्येक प्रकार के फूल थे और बाग के सामने एक बड़ा लंबा व्यक्ति खड़ा था, जिसका सिर मुझे बमुश्किल दिखाई पड़ रहा था और उसके आस-पास इतनी बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे कि मैंने कभी नहीं देखा होगा। मैंने कहा : यह कौन हैं? उन्होंने उत्तर दिया : अभी और आगे चलो, अभी और आगे चलो। फिर हम चलने लगे, यहाँ तक कि एक बहुत बड़े पेड़ के पास पहुँचे। उससे बड़ा और उससे सुंदर पेड़ मैंने कभी नहीं देखा था। यहाँ दोनों ने मुझसे कहा : उसपर चढ़ो। हम चढ़ते हुए एक ऐसे शहर में पहुँचे, जो सोने और चाँदी की ईँटों से बना था। हम शहर के द्वार पर पहुँचे, तो हमने द्वार खोलने को कहा। द्वार खोला गया और हम उसमें प्रवेश कर गए। हमने वहाँ कुछ ऐसे आदमी देखे, जिनका आधा भाग बहुत ही खूबसूरत और आधा भाग बहुत बदसूरत था। दोनों फ़रिश्तों ने उन लोगों से कहा : जाओ उस नहर में डुबकी लगाओ। वहाँ नगर के बीच से एक ऐसी नहर बह रही थी, जिसका पानी खालिस सफ़ेद था। वे गए और उसमें डुबकी लगाकर वापस आए, तो उनकी बदसूरती ख़त्म हो चुकी थी और वे अति सुंदर बन चुके थे।" नबी –सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाते हैं : "दोनों फ़रिश्तों ने मुझसे कहा : यह अद्न नामी जन्नत है और यह आपका स्थान है। मेरी निगाह ऊपर की ओर उठी, तो देखा कि एक महल है, जो सफ़ेद बादल की तरह है। दोनों फ़रिश्तों ने कहा : यही आपका मकान है। मैंने दोनों से कहा : अल्लाह तुम्हें बरकत दे! मुझे इसमें प्रवेश करने दो। दोनों ने कहा : अभी नहीं। हाँ, आप उसके अंदर प्रवेश ज़रूर करेंगे। मैंने उनसे कहा : आज रात मैंने कई आश्चर्यजनक चीज़ें देखी हैं! अब बताओ कि मेरी देखी हुई यह चीज़ें क्या हैं? दोनों ने कहा : अब हम आपको उनके बारे में बताते हैं। जहाँ तक पहले व्यक्ति की बात है, जिसके पास आप गए थे और जिसके सिर को पत्थर से फोड़ा जा रहा था, तो वह ऐसा व्यक्ति था, जो क़ुरआन की शिक्षा प्राप्त करता था, लेकिन उसे नकार देता था और फ़र्ज़ नमाज़ छोड़कर सोया रहता था। जहाँ तक उस व्यक्ति की बात है, जिसके पास आप गए और जिसके जबड़े को गुद्दी तक, नथने को गुद्दी तक और आँख को गुद्दी तक चीरा जा रहा था, तो वह ऐसा वयक्ति था, जो जब घर से निकलता, तो ऐसा झुठ बोलता, जो चारों ओर फैल जाता था। जहाँ तक उन पुरुषों तथा महिलाओं की बात है, जो तंदूर जैसी चीज़ में नंगे मौजूद थे, तो वे व्यभिचारी तथा व्यभिचारिणी थे। जहाँ तक उस व्यक्ति की बात है, जिसके पास आप आए और जो नहर में तैर रहा था और पत्थर निगल रहा था, तो वह सूदखोर था। जहाँ तक उस कुरूप व्यक्ति की बात है, जो आग जलाकर उसके आस-पास घूम रहा था, तो वह जहन्नम का दरोगा था। जहाँ तक बगीचे में मौजूद लंबे आदमी की बात है, तो वह इबराहीम -अलैहिस्सलाम- थे और जो बच्चे उनके आस-पास मौजूद थे, वे वह सारे बच्चे थे, जिनकी मृत्यु फ़ितरत पर हुई थी।" बुरकानी की रिवायत में है : "जो फ़ितरत पर पैदा हुए थे।" यह सुन कुछ मुसलमानों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! अनेकेश्वरवादियों के बच्चों का क्या होगा? तो अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : "अनेकेश्वरवादियों के बच्चे भी। जहाँ तक उन लोगों की बात है, जिनका आधा भाग खूबसूरत और आधा भाग बदसूरत था, तो ये वे लोग थे, जिनके कुछ काम अच्छे थे तो कुछ बुरे। अतः, अल्लाह ने उन्हें क्षमा कर दिया।" एक अन्य रिवायत में है : “मैंने आज रात दो आदमी को देखा, जो मेरे पास आए और मुझे पवित्र भूमि लेकर गए।" फिर शेष हदीस बयान करते हुए फ़रमाया : “हम तंदूर जैसी एक गुफ़ा के पास आए, जिसका ऊपरी भाग तंग था और निचला भाग चौड़ा था और उसके नीचे आग जल रही थी। जब आग ऊपर की तरफ़ उठती, तो लोग ऊपर की ओर उठने लगते और ऐसा प्रतीत होता कि वे निकल पड़ेंग। लेकिन जब आग बुझने लगती, तो वे उसमें वापस चले जाते। उसमें नंगे पुरुष तथा महिलाएँ मौजूद थीं।" उसमें आगे है : “यहाँ तक कि हम खून की एक नहर के पास आए।" इस रिवायत में शक का ज़िक्र नहीं है। आगे है : “एक व्यक्ति नहर के बीच में खड़ा था और एक व्यक्ति नहर के किनारे खड़ा था, जिसके सामने बहुत-से पत्थर रखे थे। नहर के बीच में खड़ा व्यक्ति जब आगे बढ़ता और निकलना चाहता, तो किनारे में खड़ा व्यक्ति उसके मुँह में एक पत्थर मार देता और उसे वहीं लौटा देता, जहाँ पहले था। इसी तरह जब-जब वह निकलने के लिए आगे बढ़ता, वह उसके मुँह पर एक पत्थर मार देता और वह वहीं लौट जाता, जहाँ पहले था।" उसमें आगे है : "दोनों फ़रिश्ते मुझे लेकर पेड़ पर चढ़ गए और मुझे एक ऐसे घर में दाख़िल किया, जिससे सुंदर घर मैंने कभी नहीं देखा था। उसमें बहुत-से बूढ़े और जवान मौजूद थे।" उसमें और आगे है : “जिसे आपने इस अवस्था में देखा था कि उसके जबड़े को फाड़ा जा रहा था, तो वह एक झूठा व्यक्ति था, जो झूठी बात बोल देता था, जो उससे निकलकर चारों दिशाओं में फैल जाती थी। आपने उसके साथ जो कुछ होते देखा है, वह उसके साथ क़यामत के दिन तक होता रहेगा।" उसमें और आगे है : “जिसको आपने इस अवस्था में देखा था कि उसके सिर को फोड़ा जा रहा है, तो वह ऐसा व्यक्ति था, जिसे अल्लाह ने क़ुरआन सिखाया था, लेकिन वह रात को उससे निश्चेत होकर सोता रहा और दिन में भी उसपर अमल नहीं किया। अतः, जो आपने उसके साथ होते देखा, वह क़यामत के दिन तक जारी रहेगा। इसी तरह पहला घर, जिसमें आप प्रवेश किए थे, वह साधारण ईमान वालों का धर है और यह घर शहीदों का घर है। मैं जिबरील हूँ और यह मीकाईल है। अब आप अपना सिर ऊपर करके देखें। मैंने सिर ऊपर करके देखा, तो मुझे अपने ऊपर बादल की तरह नज़र आया। दोनों ने कहा : यह आपका घर है। मैंने कहा : मुझे अपने घर में प्रवेश करने दो। उन दोनों ने कहा : अभी आपकी कुछ आयु शेष है, जो पूरी नहीं हुई है। यदि वह पूरी हो गई होती, तो आप अपने घर में प्रवेश कर सकते थे। "
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

نزهة المتقين، تأليف: مصطفى الخن وآخرون، الناشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى: 1397 هـ الطبعة الرابعة عشر 1407 هـ. كنوز رياض الصالحين، تأليف: حمد بن ناصر بن العمار ، الناشر: دار كنوز أشبيليا، الطبعة الأولى: 1430 هـ. رياض الصالحين، تأليف: محيي الدين يحيى بن شرف النووي ، تحقيق: د. ماهر بن ياسين الفحل ، الطبعة: الأولى، 1428 هـ. صحيح البخاري، تأليف: محمد بن إسماعيل البخاري، تحقيق: محمد زهير الناصر، الناشر: دار طوق النجاة الطبعة: الأولى، 1422هـ. شرح رياض الصالحين، تأليف: محمد بن صالح العثيمين، الناشر: دار الوطن للنشر، الطبعة: 1426 هـ. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، تأليف: علي بن سلطان القاري، الناشر: دار الفكر، الطبعة: الأولى، 1422هـ. فتح الباري شرح صحيح البخاري، تأليف: أحمد بن علي بن حجر العسقلاني، رقمه وبوب أحاديث: محمد فؤاد عبد الباقي، الناشر: دار المعرفة - بيروت، 1379 هـ. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، تأليف: علي بن سلطان القاري، الناشر: دار الفكر، الطبعة: الأولى، 1422هـ. شرح الطيبي على مشكاة المصابيح، تأليف: شرف الدين الحسين بن عبد الله الطيبي، تحقيق: د. عبد الحميد هنداوي، الناشر: مكتبة نزار مصطفى الباز - مكة المكرمة - الرياض - الطبعة: الأولى، 1417 هـ - 1997 م. منار القاري، تأليف: حمزة محمد قاسم ، الناشر: مكتبة دار البيان ، عام النشر: 1410 هـ.

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सबसे बड़ा झूट यह है कि इनसान अपनी आँखों को ऐसी चीज़ दिखाए, जो उन्होंने न देखी हों।

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم : «أَفْرَى الفِرَى أن يُرِيَ الرجل عينيه ما لم تَرَيَا».
इब्ने उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि रसूलुल्लाह -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमाया : "सबसे बड़ा झूट यह है कि इनसान अपनी आँखों को ऐसी चीज़ दिखाए, जो उन्होंने न देखी हों।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428ه . - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى، 1418ه - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - صحيح البخاري، للإمام محمد بن إسماعيل البخاري، دار طوق النجاة. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430ه - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان بن إبراهيم البكري الصديقي الشافعي اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

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9 में से 8
9 हदीसें
  1. जब तुममें से कोई व्यक्ति ऐसा सपना देखे, जो उसे अच्छा लगे, तो (जान ले कि) यह सपना अल्लाह की ओर से है। अतः उसपर अल्लाह की प्रशंसा करे और उसे (लागों को) बताए। और जब इसके विपरीत ऐसा सपना देखे, जो उसे बुरा लगे, तो (जान ले कि) यह शैतान की ओर से है। अतः उससे अल्लाह की शरण माँगे और किसी को न बताए। इससे उसे कोई हानि नहीं होने वाली।
  2. जब दुनिया की समाप्ति का समय निकट आ जाएगा तो मोमिन का स्वप्न मुश्किल ही से झूठा निकलेगा। तथा मोमिन का स्वप्न नबुव्वत (ईशदौत्य) के छयालीस भागों में से एक भाग है।
  3. अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।
  4. सबसे बड़ी झूठी बातों में से यह है कि आदमी अपने पिता के अलावा किसी और से संबंध जोड़े या अपनी आँख को वह दिखाए जो उसने देखा न हो या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से संबद्ध वह बात कहे, जो आपने न कही हो
  5. नुबुव्वत में से केवल शुभ सूचनाएँ बाकी रह गई हैं।
  6. जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि उसने मानो, मुझे जागते में देखा क्योंके शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।
  7. क्या तुममें से किसी ने कोई सपना देखा है? फिर अल्लाह जिसे चाहता, वह आपके सामने अपने स्वप्न बयान करता। एक दिन सुबह के समय आपने हमसे कहा : आज रात मेरे पास दो व्यक्ति (फ़रिश्ते) आए और बोले : चलो। चुनांचे मैं उनके साथ चल पड़ा।
  8. सबसे बड़ा झूट यह है कि इनसान अपनी आँखों को ऐसी चीज़ दिखाए, जो उन्होंने न देखी हों।
  9. तुमने स्वप्नफल कुछ सही बताया है और कुछ ग़लत।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com