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तशरीह के साथ हदीसें

जब लोग समूह में जा रहे हों, तो यह काफ़ी है कि उनकी ओर से उनमें से एक आदमी सलाम करे तथा यह भी काफ़ी है कि समूह की ओर से एक व्यक्ति सलाम का उत्तर दे।

عن علي بن أبي طالب رضي الله عنه مرفوعاً: «يُجْزِئُ عن الجماعة إذا مَرُّوا أن يُسَلِّم أحدهم، ويُجْزِئُ عن الجماعة أن يَرُدَّ أحدهم».
अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "जब लोग समूह में जा रहे हों, तो यह काफ़ी है कि उनकी ओर से उनमें से एक आदमी सलाम करे तथा यह भी काफ़ी है कि समूह की ओर से एक व्यक्ति सलाम का उत्तर दे।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار الفلق، الرياض، الطبعة: السابعة، 1424هـ. توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة.الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - 2003 م. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان، دار ابن الجوزي، ط1، 1428هـ. مشكاة المصابيح، للتبريزي، تحقيق الألباني، الناشر: المكتب الإسلامي - بيروت، الطبعة: الثالثة 1405هـ -1985م.

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सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com