एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुम" आपने उसका उत्तर दे दिया और वह बैठ गया, तो आपने कहा : इसके लिए दस नेकियाँ लिख दी गईं। फिर दूसरा व्यक्ति आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह" आपने उसका उत्तर दे दिया और वह बैठ गया, तो आपने कहा : इसके लिए बीस नेकियाँ लिख दी गईं। फिर एक अन्य व्यक्ति आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुल व रहमतुल्लाहि व बरकातुह" आपने उसका भी उत्तर दिया और वह बैठ गया, तो फ़रमाया : इसके लिए तीस नेकियाँ लिख दी गईं। यानी एक-एक शब्द पर दस-दस नेकियाँ।
- आने वाला व्यक्ति बैठे हुए लोगों को सलाम करेगा।
- सलाम के शब्दों में वृद्धि होने से सवाब में वृद्धि हो जाती है।
- सलाम करने के सबसे संपूर्ण शब्द हैं : "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह" जबकि सलाम का उत्तर देने के सबसे संपूर्ण शब्द हैं : "व अलैकुमुस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।"
- सलाम करने और सलाम का जवाब देने के स्तर अलग-अलग होते हैं, और प्रतिफल भी अलग-अलग होते हैं।
- लोगों को भलाई की शिक्षा देना और उत्कृष्ट को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना।
- इब्न-ए-हजर कहते हैं : अगर सलाम करने वाला "ورحمة الله" बढ़ाए, तो "وبركاته" बढ़ाकर जवाब देना मुसतहब है। अगर वह "وبركاته" की वृद्धि करे, तो उत्तर में कुछ और वृद्धि करना शरीयत सम्मत होगा या नहीं? इसी तरह अगर सलाम करने वाला "وبركاته" के आगे कुछ और जोड़कर सलाम करना चाहे, तो जायज़ होगा या नहीं? (इस सवाल का जवाब यह है कि) इमाम मालिक ने मुवत्ता में अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनुमा का यह कथन नक़ल किया है : सलाम "وبركاته" पर समाप्त हो जाता है।
سنن أبي داود (7/ 491) (5195). سنن الترمذي (4/ 420) (2689). مسند أحمد (33/ 170) (19948). كنوز رياض الصالحين ، لمجموعة من الباحثين (11/ 246). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (3/ 132). نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (1/ 663). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 399).