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तशरीह के साथ हदीसें

एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहा : 'अस्सलामु अलैकुम' (आपपर शांति अवतरित हो)। आपने उसके सलाम का उत्तर दिया और वह बैठ गया। फिर आपने कहा : "इसके लिए दस नेकियाँ लिखी गईं।

عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: السَّلَامُ عَلَيْكُمْ، فَرَدَّ عَلَيْهِ ثُمَّ جَلَسَ، فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «عَشْرٌ» ثُمَّ جَاءَ آخَرُ فَقَالَ: السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ، فَرَدَّ عَلَيْهِ فَجَلَسَ، فَقَالَ: «عِشْرُونَ» ثُمَّ جَاءَ آخَرُ فَقَالَ: السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، فَرَدَّ عَلَيْهِ فَجَلَسَ، فَقَالَ: «ثَلَاثُونَ».
इम्रान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहा : 'अस्सलामु अलैकुम' (आपपर शांति अवतरित हो)। आपने उसके सलाम का उत्तर दिया और वह बैठ गया। फिर आपने कहा : "इसके लिए दस नेकियाँ लिखी गईं।" फिर दूसरा व्यक्ति आया और बोला : 'अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह' (आप पर शांति एवं अल्लाह की दया अवतरित हो)। तो आपने कहा : "इसके लिए बीस नेकियाँ लिखी गईं।" फिर तीसरा व्यक्ति आया और बोला : 'अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह' (आप पर शांति, अल्लाह की दया और उसकी बरकतें अवतरित हों।) तो आपने कहा : "इसके लिए तीस नेकियाँ लिखी गईं।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, अह़मद और दारिमी ने रिवायत किया हैदर्जाह़सन
तशरीह

एक व्यक्ति अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुम" आपने उसका उत्तर दे दिया और वह बैठ गया, तो आपने कहा : इसके लिए दस नेकियाँ लिख दी गईं। फिर दूसरा व्यक्ति आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह" आपने उसका उत्तर दे दिया और वह बैठ गया, तो आपने कहा : इसके लिए बीस नेकियाँ लिख दी गईं। फिर एक अन्य व्यक्ति आया और बोला : "अस्सलामु अलैकुल व रहमतुल्लाहि व बरकातुह" आपने उसका भी उत्तर दिया और वह बैठ गया, तो फ़रमाया : इसके लिए तीस नेकियाँ लिख दी गईं। यानी एक-एक शब्द पर दस-दस नेकियाँ।

फ़ायदे
  1. आने वाला व्यक्ति बैठे हुए लोगों को सलाम करेगा।
  2. सलाम के शब्दों में वृद्धि होने से सवाब में वृद्धि हो जाती है।
  3. सलाम करने के सबसे संपूर्ण शब्द हैं : "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह" जबकि सलाम का उत्तर देने के सबसे संपूर्ण शब्द हैं : "व अलैकुमुस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह।"
  4. सलाम करने और सलाम का जवाब देने के स्तर अलग-अलग होते हैं, और प्रतिफल भी अलग-अलग होते हैं।
  5. लोगों को भलाई की शिक्षा देना और उत्कृष्ट को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना।
  6. इब्न-ए-हजर कहते हैं : अगर सलाम करने वाला "ورحمة الله" बढ़ाए, तो "وبركاته" बढ़ाकर जवाब देना मुसतहब है। अगर वह "وبركاته" की वृद्धि करे, तो उत्तर में कुछ और वृद्धि करना शरीयत सम्मत होगा या नहीं? इसी तरह अगर सलाम करने वाला "وبركاته" के आगे कुछ और जोड़कर सलाम करना चाहे, तो जायज़ होगा या नहीं? (इस सवाल का जवाब यह है कि) इमाम मालिक ने मुवत्ता में अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनुमा का यह कथन नक़ल किया है : सलाम "وبركاته" पर समाप्त हो जाता है।
हवाला

سنن أبي داود (7/ 491) (5195). سنن الترمذي (4/ 420) (2689). مسند أحمد (33/ 170) (19948). كنوز رياض الصالحين ، لمجموعة من الباحثين (11/ 246). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (3/ 132). نزهة المتقين، لمجموعة من الباحثين (1/ 663). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (4/ 399).

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सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com