नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए अपनी मस्जिद के अंदर एक गुंबदनुमा ख़ेमे में एतिकाफ़ में थे, तो आपने अपने सहाबा को बहुत ऊँची आवाज़ में क़ुरआन पाठ करते हुए सुना, जिसके कारण वे एक-दूसरे को तकलीफ़ पहुँचा रहे थे। अतः, आपने ख़ेमे से पर्दा हटाया और ऐसा करने वाले को मलामत की तथा डाँटा। फिर फ़रमाया : तुममें से प्रत्येक व्यक्ति क़ुरआन पढ़कर अपने रब से संवाद कर रहा है। अतः, तुममें से कोई किसी दूसरे को कष्ट न पहुँचाए और न ही क़ुरआन पाठ करते समय या नमाज़ में एक-दूसरे के सामने अपनी आवाज़ ऊँची करे।
- ऊँची आवाज़ में क़ुरआन की तिलावत करने से रुकने का आदेश, यदि उससे किसी को हानि पहुँचती हो।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अपने सहाबा को क़ुरआन की तिलावत के आदाब सिखाना।
سنن أبي داود (2/ 494) (1332). شرح سنن أبي داود للعباد (162/ 18). شرح أبي داود للعيني (5/238). شرح سنن ابي داود لابن رسلان (6/515). ذخيرة العقبى (11/669).