अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि जब दो मुसलमान किसी रास्ते आदि में मिलते हैं और एक-दूसरे को सलाम तथा मुसाफ़हा करते हैं, तो दोनों के अलग होने से पहले उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। याद रहे कि यहाँ अलग होने से मुराद शारीरिक रूप से अलग होना भी हो सकता है और मुसाफ़हा सम्पन्न करना भी।
- मुलाक़ात के समय मुसाफ़हा करना मुसतहब है और इसकी प्रेरणा दी गई है।
- मुनावी कहते हैं : सुन्नत यह है कि अगर कोई मजबूरी न हो तो दाएँ हाथ को दाएँ हाथ पर रखा जाए।
- सलाम को आम करने की प्रेरणा और एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान भाई से मुसाफ़हा करने के बड़े प्रतिफल का बयान।
- इस हदीस के दायरे में हराम मुसाफ़हा बाहर है। जैसे किसी अजनबी महिला से मुसाफ़हा करना।
سنن أبي داود (7/ 502) (5212). سنن الترمذي (4/ 447) (2727). سنن ابن ماجه (4/ 654) (3703). مسند أحمد (30/ 517) (18547). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 152). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 680).