عَنْ مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «الْعِبَادَةُ فِي الْهَرْجِ كَهِجْرَةٍ إِلَيَّ».
माक़िल बिन यसार -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "फ़ितना के समय इबादत मेरी ओर हिजरत करने की तरह है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें फ़ितना व फ़साद, हत्या, विनाश और अराजकता के समय में अल्लाह की इबादत के लिए खुद को समर्पित करने का मार्गदर्शन किया है, और कहा है कि इसका सवाब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर हिजरत करने के सवाब के बराबर है। इसका कारण यह है कि लोग इस तरह के समय में अल्लाह की इबादत से दूर हो जाते हैं और इससे कुछ ही लोग जुड़े होते हैं।
फ़ायदे
फ़ितनों के दिनों फ़ितना व फ़साद से सुरक्षित रहने के लिए इबादत में व्यस्त हो जाने और अल्लाह से अपना रिश्ता जोड़ लेने की प्रेरणा।
फ़ितनों तथा अचेतना के समयों में इबादत करने की फ़ज़ीलत का बयान।
एक मुसलमान को फ़ितनों एवं अचेतना के स्थानों से दूर रहना चाहिए।
हवाला
صحيح مسلم (4/ 2268) (2948).
كشف المشكل من حديث الصحيحين (2/ 42).
البحر المحيط الثجاج في شرح صحيح الإمام مسلم بن الحجاج (45/ 5).
بهجة الناظرين (2/ 455).
نزهة المتقين (ص942).
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com