بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لابن علان، نشر دار الكتاب العربي.
तशरीह के साथ हदीसें
उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास जब भी यमन से सहायक सैन्यदल आते, तो वह पूछते थे कि क्या तुम्हारे बीच उवैस बिन आमिर हैं?
عن أُسَير بن عمرو، ويقال: ابن جابر قال: كَانَ عُمر بن الخطاب رضي الله عنه إِذَا أَتَى عَلَيه أَمْدَادُ أَهْلِ اليَمَن سَأَلَهُم: أَفِيكُم أُوَيس بنُ عَامِر؟ حَتَّى أَتَى عَلَى أُوَيس رضي الله عنه فقال له: أَنْت أُوَيس بنُ عَامِر؟ قال: نَعَم، قال: مِنْ مُرَادٍ ثُمَّ مِنْ قَرْنٍ؟ قَالَ: نَعَم، قَال: فَكَانَ بِكَ بَرَصٌ، فَبَرَأَتَ مِنُه إِلاَّ مَوْضِعّ دِرهَم؟ قال: نعم، قَالَ: لَكَ وَالِدة؟ قال: نعم، قال: سَمِعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «يَأتِي عَلَيكُم أُوَيس بنُ عَامِر مَعَ أَمْدَادِ أَهْلِ اليَمَن مِنْ مُرَاد، ثُمَّ مِنْ قَرْن كَانَ بِهِ بَرَصٌ، فَبَرَأَ مِنْهُ إِلاَّ مَوضِعَ دِرْهَم، لَهُ وَالِدَة هُوَ بِهَا بَرُّ، لَوْ أَقْسَمَ عَلَى الله لَأَبَرَّه، فَإِنْ اسْتَطَعْتَ أَنْ يَسْتَغْفِرَ لَكَ فَافْعَلْ» فَاسْتَغْفِرْ لِي فَاسْتَغْفَرَ لَهُ، فَقَالَ لَه عُمر: أَيْنَ تُرِيد؟ قَالَ: الكُوفَة، قال: أَلاَ أَكتُبُ لَكَ إِلَى عَامِلِهَا؟ قال: أَكُون فِي غَبْرَاءِ النَّاسِ أَحَبُّ إِلَيَّ، فَلَمَّا كَانَ مِنَ العَام الْمُقْبِل حَجَّ رَجُلٌ مِنْ أَشْرَافِهِم، فَوَافَقَ عُمَر، فَسَأَلَه عَنْ أُوَيس، فقال: تَرَكْتُهُ رَثَّ البَّيت قَلِيلَ الْمَتَاعِ، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «يَأْتِي عَلَيكُم أُوَيس بنُ عَامِر مَعَ أَمْدَادٍ مِنْ أَهْلِ اليَمَن مِنْ مُرَاد، ثُمَّ مِنْ قَرْن، كَانَ بِهِ بَرَص فَبَرَأَ مِنْه إِلاَّ مَوْضِعَ دِرْهَم، لَهُ وَالِدَة هُوَ بِهَا بَرٌّ لَوْ أَقْسَمَ عَلى الله لَأَبَرَّهُ، فَإِنْ اسْتَطَعْتَ أَنْ يَسْتَغْفِر لَكَ، فَافْعَلْ» فَأَتَى أُوَيسًا، فقال: اسْتَغْفِر لِي، قال: أَنْتَ أَحْدَثُ عَهْدًا بِسَفَرٍ صَالِحٍ، فَاسْتَغْفِرْ لِي، قال: لَقِيتَ عمر؟ قال: نَعَم، فاستغفر له، فَفَطِنَ لَهُ النَّاس، فَانْطَلَقَ عَلَى وَجْهِهِ.
وفي رواية أيضا عن أُسَير بن جابر: أنَّ أَهلَ الكُوفَةِ وَفَدُوا على عمر رضي الله عنه وفيهم رَجُلٌ مِمَّن كان يَسْخَرُ بِأُوَيْسٍ، فقال عمر: هَل هاهُنَا أَحَدٌ مِنَ القَرَنِيِّين؟ فَجَاء ذلك الرجل، فقال عمر: إِنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قَدْ قال: «إِنَّ رَجُلاً يَأْتِيكُم مِنَ اليَمَنِ يُقَالُ لَهُ: أُوَيْسٌ، لاَ يَدَعُ بِاليَمَنِ غَيرَ أُمٍّ لَهُ، قَد كَان بِهِ بَيَاضٌ فَدَعَا الله تعالى ، فَأَذْهَبَهُ إِلاَّ مَوضِعَ الدِّينَارِ أَو الدِّرْهَمِ، فَمَنْ لَقِيَهُ مِنْكُمْ، فَلْيَسْتَغْفِر لَكُم».
وفي رواية له: عن عمر رضي الله عنه قال: إِنِّي سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «إِنَّ خَيرَ التَّابِعِين رَجُلٌ يُقَال لَهُ: أُوَيسٌ، وَلَهُ وَالِدَةٌ وَكَانَ بِهِ بَيَاضٌ، فَمُرُوهُ، فَلْيَسْتَغْفِر لَكُم».
उसैर बिन अम्र तथा कुछ लोगों के अनुसार उसैर बिन जाबिर का वर्णन है, वह कहते हैं कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास जब भी यमन से सहायक सैन्यदल आते, तो वह पूछते थे कि क्या तुम्हारे बीच उवैस बिन आमिर हैं? यहाँ तक एक सैन्यदल के साथ उवैस बिन आमिर आ गए। चुनांचे उनसे कहाः क्या आप उवैस बिन आमिर हैं? उत्तर दियाः हाँ! फ़रमायाः आप मुराद क़बीले की क़र्न शाखा से हैं? कहाः हाँ! फ़रमायाः आपके शरीर पर सफ़ेद दाग़ थे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए हैं? फ़रमायाः हाँ! फ़रमायाः आपकी माता जीवित हैं? कहाः हाँ! फ़रमायाः मैंने अल्लाह रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "तुम्हारे पास यमन से आने वाले सहायक सैन्यदलों के साथ मुराद क़बीले की क़र्न शाखा का एक व्यक्ति उवैस बिन आमिर आएगा। उसके शरीर पर सफ़ेद दाग रहे होंगे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। उसकी माता जीवित होगी, जिसके साथ वह अच्छा व्यवहार कर रहा होगा। अगर वह अल्लाह पर क़सम खा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम को पूरा करेगा। अगर यह हो सके कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे, तो उससे ऐसा करवाना।" अतः, आप मेरे लिए क्षमा याचना करें। चुनांचे उवैस बिन आमिर ने उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के लिए क्षमा याचना की। उसके बाद उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उनसे कहाः आप कहाँ जाना चाहते हैं? उन्होंने उत्तर दियाः कूफ़ा। फ़रमायाः क्या मैं आपके लिए कूफ़ा के शासक के नाम एक पत्र लिख दूँ? उन्होंने उत्तर दियाः मुझे ग़रीब तथा गुमनाम लोगों के बीच रहना अधिक पसंद है। जब अगले साल कूफ़ा के सम्मानित लोगों में से एक व्यक्ति हज के लिए आया, तो उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) से उसकी मुलाक़ात हो गई। उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उससे उवैस के बारे में पूछा, तो उसने बतायाः मैंने उन्हें इस हाल में छोड़ा है कि उनका जीवन बहुत सादा है और वह सामान भी बहुत कम रखते हैं। तो फ़रमायाः मैंने अल्लाह रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "तुम्हारे पास यमन से आने वाले सहायक सैन्यदलों के साथ मुराद क़बीले की क़र्न शाखा का एक व्यक्ति उवैस बिन आमिर आएगा। उसके शरीर पर सफ़ेद दाग रहे होंगे, जो एक दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। उसकी माता जीवित होगी, जिसके साथ वह अच्छा व्यवहार कर रहा होगा। अगर वह अल्लाह पर क़सम खा ले, तो अल्लाह उसकी क़सम को पूरा करेगा। अगर यह हो सके कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे, तो उससे ऐसा करवाना।" चुनांचे यह यमनी व्यक्ति हज के बाद उवैस के पास गया और उनसे कहा कि मेरे लिए क्षमा याचना कीजिए। परन्तु, उन्होंने उत्तर दियाः तुम एक मुबारक सफ़र से नए-नए आए हो, इसलिए ख़ुद तुम मेरे लिए क्षमा याचना करो। फिर (मामले को भाँपते हुए) कहाः क्या तुमको उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) मिले थे? उसने कहाः हाँ! तो फिर उसके लिए क्षमा याचना की। इससे लोग उन्हें पहचान गए और वह वहाँ से कहीं चल दिए।
उसैर बिन जाबिर ही की एक रिवायत में है कि कूफ़ा के लोगों का एक प्रतिनिधि मंडल उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास आया। उनके अंदर एक व्यक्ति ऐसा भी था, जो उवैस का उपहास करने वालों में शामिल था। चुनांचे उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः क्या यहाँ क़र्न क़बीले का कोई व्यक्ति है? तो वही व्यक्ति आया। चुनांचे, उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया हैः "तुम्हारे पास एक यमनी व्यक्ति आएगा, जिसे उवैस कहा जाएगा। वह यमन में केवल अपनी माँ को छोड़कर आया होगा। उसके शरीर पर सफेद दाग रहे होंगे, लेकिन अल्लाह से दुआ करने के कारण एक दीनार या दिरहम के बराबर स्थान को छोड़कर ठीक हो गए होंगे। तुममें से जो उससे मिले, वह उससे तुम्हारे लिए क्षमा याचना ज़रूर करवाए।"
तथा उन्हीं की एक रिवायत में हैः "उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः "सबसे उत्तम ताबेई एक व्यक्ति है, जो उवैस कहा जाएगा। उसकी माँ जीवित होगी और उसके शरीर पर सफ़ेद दाग होंगे। उससे कहना कि वह तुम्हारे लिए क्षमा याचना करे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला
यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com