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तशरीह के साथ हदीसें

ज्ञान तथा विद्या की फ़ज़ीलत

16 हदीसें

मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि जिबरील अलैहिस्सलाम मेरे पास आए और बताया कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह फ़रिश्तों के निकट तुम लोगों पर गर्व कर रहा है।

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ: خَرَجَ مُعَاوِيَةُ عَلَى حَلْقَةٍ فِي الْمَسْجِدِ، فَقَالَ: مَا أَجْلَسَكُمْ؟ قَالُوا: جَلَسْنَا نَذْكُرُ اللهَ، قَالَ آللَّهِ مَا أَجْلَسَكُمْ إِلَّا ذَاكَ؟ قَالُوا: وَاللهِ مَا أَجْلَسَنَا إِلَّا ذَاكَ، قَالَ: أَمَا إِنِّي لَمْ أَسْتَحْلِفْكُمْ تُهْمَةً لَكُمْ، وَمَا كَانَ أَحَدٌ بِمَنْزِلَتِي مِنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقَلَّ عَنْهُ حَدِيثًا مِنِّي: وَإِنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ عَلَى حَلْقَةٍ مِنْ أَصْحَابِهِ، فَقَالَ: «مَا أَجْلَسَكُمْ؟» قَالُوا: جَلَسْنَا نَذْكُرُ اللهَ وَنَحْمَدُهُ عَلَى مَا هَدَانَا لِلْإِسْلَامِ، وَمَنَّ بِهِ عَلَيْنَا، قَالَ: «آللَّهِ مَا أَجْلَسَكُمْ إِلَّا ذَاكَ؟» قَالُوا: وَاللهِ مَا أَجْلَسَنَا إِلَّا ذَاكَ، قَالَ: «أَمَا إِنِّي لَمْ أَسْتَحْلِفْكُمْ تُهْمَةً لَكُمْ، وَلَكِنَّهُ أَتَانِي جِبْرِيلُ فَأَخْبَرَنِي أَنَّ اللهَ عَزَّ وَجَلَّ يُبَاهِي بِكُمُ الْمَلَائِكَةَ».
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु मस्जिद में लोगों की एक सभा के पास आए और पूछा : तुम यहाँ किसलिए बैठे हो? लोगों ने जवाब दिया : हम अल्लाह का ज़िक्र करने के लिए बैठे हैं। मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : क़सम खाकर बताओ कि क्या तुम केवल इसी उद्देश्य से बैठे हो? लोगों ने कहा : अल्लाह की क़सम, हम केवल इसी उद्देश्य से बैठे हैं। इसपर मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा कि मैंने तुमसे क़सम इस कारण नहीं उठवाई कि मुझे तुमपर संदेह था। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है, मेरी तरह अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से निकट रहा हो और आपसे इतनी कम हदीसें रिवायत करता हो। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथियों की एक सभा में गए और फरमाया : "तुम लोग क्यों बैठे हुए हो?" उन लोगों ने कहा : हम लोग इसलिए बैठे हैं, ताकि अल्लाह को याद करें और इस बात पर उसकी प्रशंसा करें कि उसने हमें इस्लाम का रास्ता दिखाया और इस्लाम जैसा धर्म प्रदान किया। आपने कहा : "अल्लाह की क़सम तुम लोग इसी के लिए बैठे हो?" उन लोगों ने कहा : अल्लाह की क़सम हम इसी लिए बैठे हैं। आपने फरमाया: "मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि जिबरील अलैहिस्सलाम मेरे पास आए और बताया कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह फ़रिश्तों के निकट तुम लोगों पर गर्व कर रहा है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

मुआविया बिन अबू सुफ़यान रज़ियल्लाहु अनहुमा मस्जिद में मौजूद लोगों की एक सभा के पास पहुँचे और सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि वह किस उद्देश्य से बैठे हुए हैं? लोगों ने जवाब दिया : हम अल्लाह का ज़िक्र करने के लिए बैठे हुए हैं। तब उन्होंने उनको क़सम खाने को कहा कि क्या वाक़ई उनके बैठने और एकत्र होने का उद्देश्य अल्लाह के ज़िक्र के सिवा कुछ और नहीं है? जब उन्होंने क़सम खा ली, तो फ़रमाया : मैंने तुम लोगों को क़सम खाने को इसलिए नहीं कहा कि मैं तुम्हें झूठा समझता हूँ और तुम्हारे सच्चे होने में मुझे संदेह है। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के यहाँ उनको क्या स्थान प्राप्त था। बताया कि उनको आपसे जो निकटता प्राप्त थी, वह किसी और को नहीं थी। क्योंकि उनकी बहन उम्म-ए-हबीबा रज़ियल्लाहु अनहा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी थीं और खुद वह वह्य लिखने वाले सहाबा में शामिल थे। इसके बावजूद उन्होंने आपसे बहुत कम हदीसें नक़ल की हैं। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक दिन घर से निकले, तो देखा कि कुछ सहाबा मस्जिद में बैठकर अल्लाह का ज़िक्र और इस्लाम की राह दिखाने पर उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। तब आपने उनसे बैठने का उद्देश्य पूछा और क़सम भी खाने को कहा, जैसा कि मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने किया था। फिर आपने अपने साथियों को बैठने का सबब पूछने और क़सम खाने को कहने का कारण भी बता दिया। बताया कि आपके पास जिबरील अलैहिस्सलाम आए थे और बता रहे थे कि अल्लाह फ़रिश्तों के सामने उनपर अभिमान एव फ़ख़्र कर रहा है, उनकी फ़ज़ीलत बता रहा है, उनकी प्रशंसा कर रहा है और फ़रिश्तों को उनका अच्छा अमल दिखा रहा है।

फ़ायदे
  1. मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु की फ़ज़ीलत और अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पद्चिह्नों पर चलते हुए उनका ज्ञान के प्राचर-प्रसार का प्रयास करना।
  2. झूठ का संदेह न होने पर भी इस उद्देश्य से क़सम खिलाना जायज़ है कि सूचना का महत्व स्पष्ट हो जाए।
  3. ज़िक्र एवं ज्ञान पर आधारित सभाओं की फ़ज़ीलत। अल्लाह इस तरह की सभाओं से मोहब्बत रखता है और फ़रिश्तों के सामने इनपर अभिमान करता है।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2075) (2701). نزهة المتقين (2/ 993). بهجة الناظرين، لسليم الهلالي (2/ 522). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (17/ 271).

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नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में दो भाई थे। एक अल्लाह के रसूल-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया करता था और दूसरा काम किया करता था। अतः काम करने वाले ने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास अपने भाई की शिकायत की, तो आप ने फ़रमायाः शायद तुझे रोज़ी उसी के कारण मिलती है।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: كان أخوانِ على عهد النبي صلى الله عليه وسلم وكان أحدُهما يأتي النبي صلى الله عليه وسلم والآخر يَحتَرِف، فَشَكَا الُمحتَرِف أَخَاه للنبي صلى الله عليه وسلم فقال: «لعَلَّك تُرزَقُ بِهِ».
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में दो भाई थे। एक अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया करता था और दूसरा काम किया करता था। अतः काम करने वाले ने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास अपने भाई की शिकायत की, तो फ़रमायाः "शायद तुझे रोज़ी उसी के कारण मिलती है।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. جامع الترمذي، تحقيق وتعليق: أحمد محمد شاكر وآخرون، ط2، شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، مصر، 1395هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425هـ. صحيح الجامع الصغير وزياداته، للألباني، نشر: المكتب الإسلامي. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए निकला, वह वापस आने तक अल्लाह के मार्ग में है।

عن أنس رضي الله عنه مرفوعاً: «من خَرج في طلب العلم فهو في سَبِيلِ الله حتى يرجع».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जो ज्ञान हासिल करने के लिए निकला, वह वापस आने तक अल्लाह के मार्ग में है।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
तशरीह

हदीस का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति अपने घर या नगर से धार्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए निकला, वह वापस आने तक अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकले हुए व्यक्ति के समान है। क्योंकि वह धर्म के पुनरोद्धार, शैतान को नाकाम करने और नफ़्स को थकाने के मामले में जिहाद करने वाले ही की तरह है।

फ़ायदे
  1. ज्ञान प्राप्त करना भी अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना है।
  2. ज्ञान प्राप्त करने वाले को युद्ध के मैदानों में जिहाद करने वाले के समान प्रतिफल मिलेगा, क्योंकि दोनों ऐसे कार्य करते हैं, जो अल्लाह की शरीयत को शक्ति प्रदान करते हैं और उससे उन चीज़ों को दूर करते हैं, जो उसका अंश नहीं हैं।
  3. इससे मालूम होता है कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए निकलने वाले को, घर वापस आने तक, जाने और आने के क्रम में चलने की भी नेकी मिलेगी।
हवाला

جامع الترمذي، تحقيق وتعليق:أحمد محمد شاكر وآخرون، مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، ط2، مصر، 1395هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425ه. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. صحيح الترغيب والترهيب، للألباني، ط5، مكتبة المعارف – الرياض. مرعاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، للمباركفوري، الطبعة الثالثة، إدارة البحوث العلمية والدعوة والإفتاء، الجامعة السلفية - بنارس الهند، 1404هـ. مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، للقاري، ط1، دار الفكر، بيروت، 1422هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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अल्लाह तआला ने जो हिदायत और ज्ञान देकर मुझे भेजा है, उसकी मिसाल तेज़ बारिश की सी है, जो ज़मीन पर बरसती है। फिर धरती का कुछ भाग उपजाऊ होता है। वह पानी को सोख लेता है और बड़ी मात्रा में घास तथा हरियाली उगा देता है। जबकि धरती का कुछ भाग पैदावार के लायक नहीं होता। वह पानी को रोक लेता है और उसके द्वारा अल्लाह लोगों को फ़ायदा पहुँचाता है। तो लोग वह पानी पीते हैं, अपने जानवरों को पिलाते हैं और उससे खेती-बाड़ी की सिंचाई करते हैं।

عَنْ أَبِي مُوسَى رَضيَ اللهُ عنه عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَثَلُ مَا بَعَثَنِي اللَّهُ بِهِ مِنَ الهُدَى وَالعِلْمِ كَمَثَلِ الغَيْثِ الكَثِيرِ أَصَابَ أَرْضًا، فَكَانَ مِنْهَا نَقِيَّةٌ، قَبِلَتِ المَاءَ، فَأَنْبَتَتِ الكَلَأَ وَالعُشْبَ الكَثِيرَ، وَكَانَتْ مِنْهَا أَجَادِبُ، أَمْسَكَتِ المَاءَ، فَنَفَعَ اللَّهُ بِهَا النَّاسَ، فَشَرِبُوا وَسَقَوْا وَزَرَعُوا، وَأَصَابَتْ مِنْهَا طَائِفَةً أُخْرَى، إِنَّمَا هِيَ قِيعَانٌ لاَ تُمْسِكُ مَاءً وَلاَ تُنْبِتُ كَلَأً، فَذَلِكَ مَثَلُ مَنْ فَقُهَ فِي دِينِ اللَّهِ وَنَفَعَهُ مَا بَعَثَنِي اللَّهُ بِهِ، فَعَلِمَ وَعَلَّمَ، وَمَثَلُ مَنْ لَمْ يَرْفَعْ بِذَلِكَ رَأْسًا، وَلَمْ يَقْبَلْ هُدَى اللَّهِ الَّذِي أُرْسِلْتُ بِهِ».
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से बयान करते हैं कि आपने फ़रमायाः अल्लाह तआला ने जो हिदायत और ज्ञान देकर मुझे भेजा है, उसकी मिसाल तेज़ बारिश की सी है, जो ज़मीन पर बरसती है। फिर धरती का कुछ भाग उपजाऊ होता है। वह पानी को सोख लेता है और बड़ी मात्रा में घास तथा हरियाली उगा देता है। जबकि धरती का कुछ भाग पैदावार के लायक नहीं होता। वह पानी को रोक लेता है और उसके द्वारा अल्लाह लोगों को फ़ायदा पहुँचाता है। तो लोग वह पानी पीते हैं, अपने जानवरों को पिलाते हैं और उससे खेती-बाड़ी करते हैं। साथ ही बारिश धरती के कुछ ऐसे भाग पर भी बरसती है, जो टीलों की शक्ल में होता है। न पानी को जमा रखता है और न हरियाली उगाता है। यही मिसाल उस आदमी की है, जिसने अल्लाह के धर्म की समझ हासिल की और जो शिक्षा देकर अल्लाह तआला ने मुझे भेजा है, उससे फ़ायदा उठाया। उसने उसे ख़ुद सीखा और दूसरों को सिखाया तथा यह उस आदमी की मिसाल भी है, जिसने इसपर तवज्जो नहीं दी और अल्लाह की हिदायत को, जो मैं लेकर आया हूँ, स्वीकार नहीं किया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح البخاري (1/ 27) (79). صحيح مسلم (4/ 1787) (2282). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 464). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 294). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 950).

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जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के दिन की परेशानियों में से किसी परेशानी को दूर करेगा।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ نَفَّسَ عَنْ مُؤْمِنٍ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ الدُّنْيَا نَفَّسَ اللهُ عَنْهُ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ يَوْمِ الْقِيَامَةِ، وَمَنْ يَسَّرَ عَلَى مُعْسِرٍ يَسَّرَ اللهُ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، وَمَنْ سَتَرَ مُسْلِمًا سَتَرَهُ اللهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، وَاللهُ فِي عَوْنِ الْعَبْدِ مَا كَانَ الْعَبْدُ فِي عَوْنِ أَخِيهِ، وَمَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ، وَمَا اجْتَمَعَ قَوْمٌ فِي بَيْتٍ مِنْ بُيُوتِ اللهِ يَتْلُونَ كِتَابَ اللهِ وَيَتَدَارَسُونَهُ بَيْنَهُمْ إِلَّا نَزَلَتْ عَلَيْهِمِ السَّكِينَةُ، وَغَشِيَتْهُمُ الرَّحْمَةُ، وَحَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ، وَذَكَرَهُمُ اللهُ فِيمَنْ عِنْدَهُ، وَمَنْ بَطَّأَ بِهِ عَمَلُهُ لَمْ يُسْرِعْ بِهِ نَسَبُهُ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के दिन की परेशानियों में से किसी परेशानी को दूर करेगा। जिसने तंगी में पड़े हुए किसी व्यक्ति के साथ आसानी बरती, अल्लाह दुनिया एवं आख़िरत में उसके साथ आसानी करेगा। जिसने किसी मुसलमान की कमी एवं अवगुण को छुपाया, अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसके अवगुण एवं कमियों को छुपाएगा। अल्लाह अपने बंदे की मदद में रहता है, जब तक बंदा अपने भाई की मदद में रहता है। जो ज्ञान अर्जित करने के लिए किसी मार्ग पर चलता है, अल्लाह इसके बदले में उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। जब कुछ लोग अल्लाह के किसी घर में एकत्र होकर अल्लाह की किताब की तिलावत हैं और उसे आपस में समझने एवं समझाने का कार्य करते हैं, तो उनपर शांति अवतरित होती है, उन्हें अल्लाह की कृपा ढाँप लेती है, फ़रिश्ते घेरे रहते हैं और अल्लाह उनकी चर्चा उनके बीच करता है, जो उसके पास हैं (अर्फ़थात: रिश्तों के सामने)। जिसका कर्म उसे पीछे छोड़ दे, उसका कुल उसे आगे नहीं ले जा सकता।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया है कि अल्लाह के यहाँ मुसलमान को उसी के अनुरूप प्रतिफल मिलता है, जो वह मुसलमानों के साथ करता है। जिसने इस संसार की कठिनाइयों और संकटों में से किसी भी कठिनाइ और संकट को किसी मुस्लिम से दूर किया, बदले में अल्लाह उसे क़यामत के दिन की कठिनाइयों में से किसी कठिनाइ से मुक्ति प्रदान करेगा। जो व्यक्ति तंगी में पड़े हुए किसी व्यक्ति को सहूलत प्रदान करता है और उसकी कठिनाई को दूर करता है, अल्लाह उसके लिए इस दुनिया और आख़िरत दोनों जगह में सहूलत पैदा करेगा। जो व्यक्ति किसी मुसलमान की गलतियों और त्रुटियों को छुपाता है, अल्लाह उसकी कमियों एवं त्रुटियों पर इस दुनिया और आख़िरत में पर्दा डालेगा। अल्लाह अपने बंदे की मदद करता रहता है, जब तक बंदा अपने भाई की धार्मिक और सांसारिक हितों में सहायता करता है। यह सहायता दुआ, शारीरिक श्रम, धन और अन्य तरीकों से की जा सकती है। जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता के उद्देश्य से शरई ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग में निकलता है, अल्लाह उसके लिए इस कार्य के माध्यम से जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। जब भी कोई समूह अल्लाह के घरों में से किसी एक घर में एकत्र होता है, अल्लाह की किताब का पाठ करता है तथा आपस में उसका अध्ययन करता है, तब उनपर शांति और सुकून उतरता है, अल्लाह की दया उन्हें ढाँप लेती है, फरिश्ते उन्हें घेरे रहते हैं, अल्लाह अपने निकटवर्ती लोगों (फरिश्तों) में उनकी प्रशंसा करता है। ज़रा सोचिए कि अल्लाह के द्वारा निकटवर्तियों के बीच किसी की प्रशंसा हो जाना कितने बड़े सौभाग्य की बात है। जिसका कर्म अपूर्ण हो उसका वंश उसे कर्मशील समकक्षों की श्रेणी में नहीं ला सकता। इस लिए उसे अपने वंश एवं पूर्वजों की प्रतिष्ठा पर निर्भर नहीं होना चाहिए तथा कर्तव्यों के पालन में कमी नहीं करनी चाहिए।

फ़ायदे
  1. इब्न-ए-दक़ीक़ अल-ईद कहते हैं : यह एक महान हदीस है, जो विभिन्न प्रकार के ज्ञान, नियमों एवं शिष्टाचार को अपने अंदर समाहित की हुई है। इसमें मुसलमानों की आवश्यकताओं को पूरा करने और उनकी मदद करने का गुणगान किया गया है। चाहे वह ज्ञान, धन, सहयोग, सलाह या अन्य किसी भी तरीक़े से हो।
  2. तंगी में फंसे लोगों को सहूलत प्रदान करने का प्रोत्साहन।
  3. मुस्लिम भाई की सहायता करने को प्रेरित करना तथा इस बात पर ज़ोर देना कि अल्लाह सहायता करने वाले की वैसी ही मदद करता है, जैसी मदद वह अपने भाई की करता है।
  4. मुस्लिम के दोषों पर पर्दा डालने में उसके दोषों की खोज-बीन न करना भी शामिल है। किसी सदाचारी पूर्वज (सलफ़) ने कहा है : मैंने ऐसे लोगों को देखा है जिनके अंदर प्रत्यक्ष रूप से कोई दोष नहीं था। परंतु जब उन्होंने दूसरों के दोषों का ज़िक्र किया, तो लोगों ने भी उनके दोषों को सामने ला दिया। जबकि मैंने ऐसे लोगों को भी पाया है जिनमें दोष था। किंतु जब उन्होंने दूसरों के दोषों की चर्चा नहीं की, तो उनके अपने दोष भी भुला दिए गए।
  5. किसी व्यक्ति के दोषों को छुपाने का कदापि यह अर्थ नहीं है कि बुराई को जस का तस छोड़ दिया जाए या उसे बदलने का प्रयास न किया जाए। बल्कि, बुराई को बदलना और उसपर पर्दा डालना दोनों आवश्यक हैं। यहाँ बात उन लोगों की हो रही है, जिनका बुरा होना तथा बड़ा अत्याचारी होना प्रसिद्ध न हो। जो इस मामले में प्रसिद्ध हो चुके हों, उनके दोष छुपाना उचित नहीं है। ऐसे लोगों का मामला प्रशासन तक पहुँचाना चाहिए, बशर्ते कि इससे कोई बुराई जन्म लेने का भय न हो। क्योंकि ऐसे लोगों की बुराई को छुपाने से उनका मनोबल बढ़ेगा और बिगाड़ के मार्ग पर और अधिक चल पड़ेंगे, दूसरे लोगों का अहित करेंगे और उनके अंदर बुराई करने का दुस्साहस पैदा करेंगे।
  6. ज्ञान की प्राप्ति, कुरआन का पाठ और उसका अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहन।
  7. नववी कहते हैं : इस हदीस में मस्जिद के अंदर कुरआन का पाठ करने के लिए एकत्र होने का महत्व बताया गया है... इस पुण्य की प्राप्ति के लिए, मस्जिद के अतिरिक्त, मदरसा या रबात इत्यादि में एकत्र होना भी इसी श्रेणी में आता है।
  8. प्रतिफल को अल्लाह ने कर्मों पर निर्धारित किया है, न कि वंश पर।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 2074) (2699). التحفة الربانية، لإسماعيل الأنصاري (ص82). الأحاديث الأربعون النووية وعليها الشرح الموجز المفيد، لعبد الله المحسن (ص69). شرح الأربعين النووية ، لابن عثيمين (ص355).

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अल्लाह तआला जिसके साथ भलाई का इरादा करता है, उसे दीन की समझ प्रदान करता है

عن معاوية رضي الله عنه قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «مَنْ يُرِدِ اللهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ، وَإِنَّمَا أَنَا قَاسِمٌ، وَاللهُ يُعْطِي، وَلَنْ تَزَالَ هَذِهِ الْأُمَّةُ قَائِمَةً عَلَى أَمْرِ اللهِ، لَا يَضُرُّهُمْ مَنْ خَالَفَهُمْ، حَتَّى يَأْتِيَ أَمْرُ اللهِ».
मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "अल्लाह तआला जिसके साथ भलाई का इरादा करता है, उसे दीन की समझ प्रदान करता है। मैं केवल बाँटने वाला हूँ, देता तो अल्लाह है। यह उम्मत अल्लाह के आदेश पर क़ायम रहेगी, उसे उसका विरोध करने वाले नुक़सान नहीं पहुँचा सकेंगे, यहाँ तक कि क़यामत आ जाए।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि अल्लाह जिसके साथ भलाई का इरादा करता है, उसे अपने दीन की समझ प्रदान करता है। साथ ही यह कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम केवल बाँटने वाले हैं, जो अल्लाह की दी हुई जीविका एवं ज्ञान आदि को बाँटते हैं। असल देने वाला अल्लाह है। उसके सिवा सब बस साधन हैं, जो अल्लाह की अनुमति के बिना लाभ नहीं दे सकते। आपने आगे बताया कि यह उम्मत अल्लाह के आदेश पर क़ायम रहेगी, उसे उसका विरोध करने वाले नुक़सान नहीं पहुँचा सकेंगे, यहाँ तक कि क़यामत आ जाए।

फ़ायदे
  1. शरई ज्ञान तथा उसे सीखने की फ़ज़ीलत और प्रेरणा।
  2. इस उम्मत के अंदर हमेशा सत्य पाया जाएगा। एक गिरोह के अंदर नहीं तो दूसरे गिरोह के अंदर ही सही।
  3. दीन की समझ इस बात की निशानी है कि अल्लाह बंदे के साथ भलाई का इरादा रखता है।
  4. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के आदेश तथा उसके इरादे से देते हैं। आप किसी चीज़ के मालिक नहीं हैं।
हवाला

صحيح البخاري (1/ 25) (71). صحيح مسلم (2/ 718) (1037). توضيح الأحكام من بلوغ المرام، للبسام (7/ 485). منحة العلام في شرح بلوغ المرام، لعبد الله الفوزان (10/ 324). فتح ذي الجلال والإكرام، لابن عثيمين (6/ 424). سبل السلام بشرح بلوغ المرام، للصنعاني (2/ 688).

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आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है।

عَنْ أَبِي أُمَامَةَ البَاهِلِيِّ رَضيَ اللهُ عنه قَالَ: ذُكِرَ لِرَسُولِ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلاَنِ أَحَدُهُمَا عَابِدٌ وَالآخَرُ عَالِمٌ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «فَضْلُ العَالِمِ عَلَى العَابِدِ كَفَضْلِي عَلَى أَدْنَاكُمْ»، ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنَّ اللَّهَ وَمَلاَئِكَتَهُ وَأَهْلَ السَّمَوَاتِ وَالأَرَضِينَ حَتَّى النَّمْلَةَ فِي جُحْرِهَا وَحَتَّى الحُوتَ لَيُصَلُّونَ عَلَى مُعَلِّمِ النَّاسِ الخَيْرَ».
अबू उमामा बाहिली (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह, उसके फ़रिश्ते, आकाशों और धरती वाले, यहाँ तक कि चींटियाँ अपने बिलों में और मछलियों भी उन लोगों के हक़ में रहमत की दुआ करते हैं, जो लोगों को भलाई की तालीम देते हैं।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों के साथ मिलकर हसन)
हवाला

سنن الترمذي (4/ 416) (2685). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (16/ 481). مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي القاري (1/ 298). فيض القدير شرح الجامع الصغير، للمناوي (4/ 432). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (2/ 469). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص758). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (2/ 954).

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जो ज्ञान प्राप्त करने के पथ पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है

عن أبي الدرداء رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «مَنْ سَلَكَ طَريقا يَبْتَغي فيه عِلْما سَهَّل الله له طريقا إلى الجنة، وإنَّ الملائكةَ لَتَضَعُ أجْنِحَتها لطالب العلم رضًا بما يَصنَع، وإنَ العالم لَيَسْتَغْفِرُ له مَنْ في السماوات ومَنْ في الأرض حتى الحيتَانُ في الماء، وفضْلُ العالم على العَابِدِ كَفَضْلِ القمر على سائِرِ الكواكب، وإنَّ العلماء وَرَثَة الأنبياء، وإنَّ الأنبياء لم يَوَرِّثُوا دينارا ولا دِرْهَماً وإنما وَرَّثُوا العلم، فَمَنْ أَخَذَهُ أَخَذَ بحَظٍّ وَافِرٍ».
अबू दरदा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जो ज्ञान प्राप्ती के एक पथ पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का एक रास्ता आसान कर देता है और फ़रिश्ते उसके कार्य से अपनी खुशी का प्रदर्शन करते हुए, उस के लिए अपने परों को बिछा देते हैं। निश्चय ही, आकाश तथा धरती में जो कुछ भी है, यहाँ तक कि पानी की मछलियाँ भी ज्ञानी के लिए क्षमा की प्रार्थना करती हैं। ज्ञानी को उपासक पर वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो चाँद को सितारों पर हासिल है। उलेमा, नबियों के वारिस हैं और नबी दीनार तथा दिर्हम विरासत में नहीं छोड़ते बल्कि ज्ञान को विरासत में छोड़कर गए हैं। तो जिस ने इसे प्राप्त कर लिया, उसने बड़ा भाग प्राप्त कर लिया।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।दर्जाह़सन
हवाला

- الجامع الصحيح -وهو سنن الترمذي-؛ للإمام محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق أحمد شاكر وآخرين، مكتبة الحلبي-مصر، الطبعة الثانية، 1388هـ. - رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. - سنن أبي داود؛ للإمام أبي داود سليمان بن الأشعث السجستاني، تعليق عزت الدعاس وغيره، دار ابن حزم-بيروت، الطبعة الأولى، 1418هـ. - سنن ابن ماجه؛ للحافظ محمد بن يزيد القزويني، حققه محمد فؤاد عبدالباقي، دار إحياء الكتب العربية. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. - صحيح الترغيب والترهيب؛ تأليف محمد ناصر الدين الألباني، مكتبة المعارف-الرياض، الطبعة الخامسة. - كنوز رياض الصالحين؛ فريق علمي برئاسة أ.د. حمد العمار، دار كنوز إشبيليا-الرياض، الطبعة الأولى، 1430هـ. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ. - سنن أبي داود, أبو داود سليمان بن الأشعث بن إسحاق بن بشير بن شداد بن عمرو الأزدي السِّجِسْتاني, المحقق: محمد محيي الدين عبد الحميد, المكتبة العصرية، صيدا – بيروت. - سنن الترمذي، تأليف: محمد بن عيسى الترمذي، تحقيق أحمد شاكر وغيره ، الناشر: شركة مكتبة ومطبعة مصطفى البابي الحلبي، الطبعة: الثانية، 1395 هـ. - مسند الإمام أحمد بن حنبل، تحقيق: شعيب الأرنؤوط - عادل مرشد، وآخرون، نشر: مؤسسة الرسالة، الطبعة: الأولى، 1421هـ - 2001 م. - صَحِيحُ التَّرْغِيب وَالتَّرْهِيب, محمد ناصر الدين الألباني, مكتَبة المَعارف لِلنَشْرِ والتوزيْع، الرياض - المملكة العربية السعودية, الطبعة: الأولى، 1421 هـ - 2000 م. - بهجة الناظرين, سليم بن عيد الهلالي، الناشر: دار ابن الجوزي ، سنة النشر: 1418 هـ- 1997م. - مفتاح دار السعادة ومنشور ولاية العلم والإرادة, محمد بن أبي بكر بن أيوب بن سعد شمس الدين ابن قيم الجوزية, دار الكتب العلمية – بيروت. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين, محمد علي بن محمد البكري الصديقي الشافعي, اعتنى بها: خليل مأمون شيحا, الناشر: دار المعرفة للطباعة والنشر والتوزيع، بيروت – لبنان, الطبعة: الرابعة، 1425 هـ - 2004 م. - تطريز رياض الصالحين, فيصل بن عبد العزيز بن فيصل ابن حمد المبارك الحريملي النجدي, المحقق: د. عبد العزيز بن عبد الله آل حمد, دار العاصمة للنشر والتوزيع، الرياض, الطبعة: الأولى، 1423 هـ - 2002 م. - مرقاة المفاتيح شرح مشكاة المصابيح، لعلي بن سلطان الملا الهروي القاري، الناشر: دار الفكر، بيروت – لبنان، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2002م. - حاشية السندي على سنن ابن ماجه = كفاية الحاجة في شرح سنن ابن ماجه, محمد بن عبد الهادي التتوي، أبو الحسن، نور الدين السندي, دار الجيل - بيروت، بدون طبعة. - تاج العروس من جواهر القاموس, محمّد بن محمّد بن عبد الرزّاق الحسيني، الملقّب بمرتضى، الزَّبيدي, مجموعة من المحققين, الناشر: دار الهداية.

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13 हदीसें
  1. मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि जिबरील अलैहिस्सलाम मेरे पास आए और बताया कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह फ़रिश्तों के निकट तुम लोगों पर गर्व कर रहा है।
  2. नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में दो भाई थे। एक अल्लाह के रसूल-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया करता था और दूसरा काम किया करता था। अतः काम करने वाले ने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास अपने भाई की शिकायत की, तो आप ने फ़रमायाः शायद तुझे रोज़ी उसी के कारण मिलती है।
  3. जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए निकला, वह वापस आने तक अल्लाह के मार्ग में है।
  4. अल्लाह तआला ने जो हिदायत और ज्ञान देकर मुझे भेजा है, उसकी मिसाल तेज़ बारिश की सी है, जो ज़मीन पर बरसती है। फिर धरती का कुछ भाग उपजाऊ होता है। वह पानी को सोख लेता है और बड़ी मात्रा में घास तथा हरियाली उगा देता है। जबकि धरती का कुछ भाग पैदावार के लायक नहीं होता। वह पानी को रोक लेता है और उसके द्वारा अल्लाह लोगों को फ़ायदा पहुँचाता है। तो लोग वह पानी पीते हैं, अपने जानवरों को पिलाते हैं और उससे खेती-बाड़ी की सिंचाई करते हैं।
  5. जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के दिन की परेशानियों में से किसी परेशानी को दूर करेगा।
  6. अल्लाह तआला जिसके साथ भलाई का इरादा करता है, उसे दीन की समझ प्रदान करता है
  7. आलिम को आबिद के मुक़ाबले में वही श्रेष्ठता प्राप्त है, जो मुझे तुम्हारे एक साधारण व्यक्ति के मुक़ाबले में प्राप्त है।
  8. जो ज्ञान प्राप्त करने के पथ पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है
  9. लोग सोने चाँदी के खदान की तरह खदान हैं। जो लोग जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि इस्लाम की समझ प्राप्त कर लें। सारे प्राण एकत्र सेना थे; जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे को पहचाना, वह दुनिया में एक-दूसरे से प्रेम रखते हैं, और जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे की पहचान न की, वह यहाँ एक-दूसरे से बेगाना रहते हैं।
  10. अल्लाह उस व्यक्ति को ख़ुश व आबाद रखे, जिसने मुझसे कोई बात सुनी और उसे उसी प्रकार दूसरों तक पहुँचा दिया, जिस प्रकार मुझसे सुनी थी। क्योंकि बहुत बार सुनने वाले से वह व्यक्ति अधिक याद रखता है (या अधिक समझदार होता है) जिस तक बात पहुँचाई गई हो।
  11. क़यामत की निशानियों में से कुछ निशानियाँ यह हैं कि ज्ञान उठा लिया जाए, अज्ञान अधिक हो जाए, व्यभिचार अधिक हो जाए, मदिरा पीने का चलन अधिक हो जाए, पुरुष कम हो जाएँ और स्त्रियाँ इतनी अधिक हो जाएँ कि पचास-पचास स्त्रियों का एक ही अभिभावक हो।
  12. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस आयतें पढ़ते और दूसरी दस आयतों को पढ़ना उस समय तक शुरू नहीं करते, जब तक उन दस आयतों के ज्ञान एवं अमल को सीख न लेते
  13. अल्लाह की क़सम! ऐ अबुल मुंज़िर! तुमको यह ज्ञान मुबारक हो।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com