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तशरीह के साथ हदीसें

व्यभिचार की हद (दंड)

11 हदीसें

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में थे कि एक मुसलमान आपके पास आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं व्यभिचार में लिप्त हो गया हूँ।

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: «أَتَى رجل مِنَ المسلمين رسولَ صلى الله عليه وسلم وهو في المسجد فَنَادَاهُ: يا رسول الله، إنِّي زَنَيْتُ، فَأَعْرَضَ عنه، فَتَنَحَّى تِلْقَاءَ وَجْهِهِ فَقَالَ: يا رسول الله، إنِّي زَنَيْت، فأعرض عنه، حَتَّى ثَنَّى ذلك عليه أَرْبَعَ مَرَّاتٍ. فَلَمَّا شَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَرْبع شهادات: دَعَاهُ رَسُولُ الله صلى الله عليه وسلم ، فَقَالَ: أَبِكَ جُنُونٌ؟ قَالَ: لا، قَالَ: فَهَلْ أُحْصِنْت؟ قَالَ: نَعَمْ، فَقَالَ رَسُولُ الله: اذْهَبُوا بِهِ فَارْجُمُوهُ». قَالَ ابْنُ شِهَابٍ: فَأَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ. سَمِعَ جَابِرَ بنَ عَبْدِ الله يَقُولُ: «كُنْت فِيمَنْ رَجَمَهُ، فَرَجَمْنَاهُ بِالمُصَلَّى، فَلَمَّا أَذْلَقَتْهُ الْحِجَارَةُ هَرَبَ، فَأَدْرَكْنَاهُ بِالحَرَّةِ، فَرَجَمْنَاهُ».
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं किः अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में थे कि एक मुसलमान आपके पास आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं व्यभिचार में लिप्त हो गया हूँ। उसकी बात सुनकर आपने अपना चेहरा फेर लिया। लेकिन उसने फिर आपके सामने आकर कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं व्यभिचार में लिप्त हो गया हूँ। आपने फिर मुँह फेर लिया। यहाँ तक कि उसने यही बात आपके सामने चार बार दोहराई। जब उसने चार बार अपने विरुद्ध गवाही दे दी, तो अल्लाह के रसूल ने उसे बुलाकर पूछाः "क्या तू पागल है?" कहाः नहीं। फ़रमायाः "शादीशुदा है?" कहाः हाँ। तो अल्लाह के रसूल ने फ़रमायाः "इसे ले जाकर संगसार कर दो।" इब्ने शिहाब कहते हैंः मुझे अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान ने बताया कि उन्होंने जाबिर बिन अब्दुल्लाह को कहते सुना हैः पत्थर मारने वालों में मैं भी शामिल था। हमने उसे ईदगाह में पत्थर मारना आरंभ किया, जब उसे पत्थर की खूब चोट लगी, तो वह भाग खड़ा हुआ। फ़िर हमने उसे हर्रा में पकड़कर पत्थर मार-मारकर ख़त्म कर दिया)।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

माइज़ बिन मालिक अस्लमी -अल्लाह उन्से प्रसन्न हो- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर अपने ही विपरित ज़ेना करने का साक्ष्य दिया -उस समेय आप मसजिद में थे-, तो आप ने उन से मुख मोड़ लिया, ताकि वह वापस चले जाएं, और अल्लाह से क्षमा याचना कर लें। किन्तु वह अपने ऊपर क्रोधित और अपने उपर हद क़ायेम करके पवित्र करने के कठोर विचार के साथ आए थे, इस लिए फिर आप के सम्मुख आकर दोबारा इक़रार किया। तो भी नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन से मुख मोड़ लिया, यहाँ तक कि उन्हों ने अपने विरोध चार बार साक्ष्य देकर ज़ेना का इक़रार कर लिया, तब आप ने उन से पूछाः क्या तुम पागल हो? कहाः नहीं। उन्के घर वालों सो भी उन्के दिमाग के बारे में पूछा, तो उन्हों ने अच्छा ही कहा। फिर पूछाः तुम शादी कर चुके हो या नहीं, क्योंकि गैर शादी शुदा को रज्म नहीं किया जाता? कहाः हाँ, शादी कर चुका हुँ। आप ने उन से पूछा, कि शायद उन्होंने हद को अनिवार्य करनेवाला कर्म न किया हो, अर्थात केवल छुआ या चुंबन किया हो, तो उन्हों ने ज़ेना की पुष्टी कर दी। जब आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इन बातों की पुष्टी कर ली और हद लागू करना अनिवार्य हो गया, तो सहाबा को संगसाार करने का आदेश दिया। चुनांचे सहाबा उन्हें बक़ीउल-ग़रक़द -मसजिद ए नबली के समीप स्थित एक जनाज़ा गाह का नाम- ले गए, और उन्हें पत्थर मारना आरंभ कर दिया, जब पत्थर की चोट लगने लगी, तो भागना चाहा, इस लिए कि मनुष्य इसे सह नहीं सक्ता और भाग गए, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ कर मार डाला,अल्लाह उन पर दया करे तथा उन से प्रसन्न हो।

हवाला

- صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423هـ. - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426هـ. - عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381هـ. - الإعلام بفوائد عمدة الأحكام لابن الملقن، المحقق: عبد العزيز بن أحمد بن محمد المشيقح، دار العاصمة للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1417هـ - 1997م.

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यहूदियों ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहा कि उनमें से एक पुरुष एवं एक स्त्री ने व्यभिचार किया है।

عن عبدُ الله بنُ عمر رضي الله عنهما قال: «إن الْيهود جاءوا إلى رسول الله فَذَكَرُوا لَه: أَنَّ امرأة منهم وَرجلا زنيا. فَقَال لَهُمْ رَسُولُ الله صلى الله عليه وسلم : مَا تَجِدُون في التَّوراة، في شأْن الرَّجم؟ فَقَالوا: نَفضحهم وَيُجْلَدُون. قَال عبد الله بن سَلام: كذبتم، فيهَا آية الرَّجْم، فَأَتَوْا بِالتَّوراة فَنَشَرُوهَا، فَوَضعَ أحدهم يَده عَلَى آيَة الرَّجْم فقرأ ما قبلها وما بعدها. فَقَال لَه عبد الله بن سَلام: ارْفَعْ يدَك. فَرَفَعَ يده، فَإذا فيهَا آيَةُ الرَّجم، فَقَال: صدَقَ يا محَمَّد، فأمر بِهِما النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَرُجِما. قَال: فرأيت الرَّجلَ: يَجْنَأُ عَلَى المرأة يَقِيهَا الْحجارة».
अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि यहूदियों ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहा कि उनमें से एक पुरुष एवं एक स्त्री ने व्यभिचार किया है। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे कहा कि तुम तौरात में संगसार के बारे में क्या लिखा पाते हो? उन्होंने कहाः हम ऐसे लोगों को अपमानित करते हैं और कोड़े लगाते हैं। उनकी बात सुनकर अब्दुल्लाह बिन सलाम ने कहाः तुम झूठ बोलते हो। उसमें संगसार का आदेश मौजूद है। अतः, वे तौरात ले आए और उसे खोलकर रख दिया। फिर उनमें से एक व्यक्ति ने संगसार की आयत पर अपना हाथ रखकर आगे-पीछे की आयतें पढ़कर सुना दिया। यह देख, अब्दुल्लाह बिन सलाम ने कहाः अपना हाथ उठाओ। उसने हाथ उठाया, तो संगसार की आयत मौजूद थी। अब उसने कहाः ऐ मुहम्मद, अब्दुल्लाह बिन सलाम की बात सही है। अतः, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम- ने उन दोनों को संगसार करने का आदेश दिया और उन्हें संगसार कर दिया गया। वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैंने देखा कि वह व्यक्ति उस स्त्री पर गिर-गिरकर उसे पत्थर से बचा रहा था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

एक बार नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में एक यहूदी मर्द और महिला ने (ज़िना) अवैध संभोग किया, तो वह लोग आप के पास निर्णय के लिए आए, इस सोच के साथ कि हो सकता है आप कि यहाँ तौरात के विपरीत कोई आसान आदेश मिल जाए। अतः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन से तौरात में मौजूद हुक्म के बारे पूछा, ताकि उन्हें रुस्वा किया जाए, न कि उस पर अमल किया जाए, तो उन लोगों ने आप को झुठलाया और कहाः हमारे यहाँ दोनों का अपमान किया जाता है, तो अब्दुल्लाह बिन सलाम ने उन्हें झुठलाया और जब तौरात खोली गई, तो शादी शुदा ज़ानी का हु्कम संगसार पाया गया, फिर नबी सल्लल्लाहु अलै व सल्लम के आदेश अनुसार उन्हें संगसार कर दिया गया। हमारी शरीयत दूसरी शरिअतों पर हाकिम तथा उसे निरस्त करती है, लेकिन नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तौरात में रज्म के बारे पूछा, ताकि उन की ही पुस्तक से उन पर दलील क़ायम करें और यह बताएं कि अल्लाह की सारी पुस्तकें इस सदैव रहने वाले आदेश पर एकमत हैं, जिस के माध्यम से उपद्रव मचाने वालों को रोका जाता है।

हवाला

- صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422ه - صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، 1423 هـ - عمدة الأحكام من كلام خير الأنام صلى الله عليه وسلم لعبد الغني المقدسي، دراسة وتحقيق: محمود الأرناؤوط، مراجعة وتقديم: عبد القادر الأرناؤوط، ط2، دار الثقافة العربية، دمشق ، بيروت، مؤسسة قرطبة، 1408 هـ - تأسيس الأحكام للنجمي، ط2، دار علماء السلف، 1414ه - الإلمام بشرح عمدة الأحكام لإسماعيل الأنصاري، ط1، دار الفكر، دمشق، 1381ه - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الأمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ الإعلام بفوائد عمدة الأحكام لابن الملقن المحقق: عبد العزيز بن أحمد بن محمد المشيقح - دار العاصمة للنشر والتوزيع، المملكة العربية السعودية الطبعة: الأولى، 1417 هـ - 1997 م.

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नबी (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस दासी के बारे में पूछा गया, जो व्यभिचार में लिप्त हो गई हो और शादीशुदा न हो?

عن أبي هُرَيْرة وزَيْدُ بْنُ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ رضي الله عنهما أنه سُئِلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الأَمَةِ إذَا زَنَتْ وَلَمْ تُحْصَنْ؟ قَالَ: «إنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا، ثُمَّ إنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا، ثُمَّ إنْ زَنَتْ فَاجْلِدُوهَا، ثُمَّ بِيعُوهَا وَلَوْ بِضَفِيرٍ». قالَ ابنُ شِهابٍ: «ولا أَدري، أَبَعْدَ الثَّالِثَةِ أَوِ الرَّابِعةِ».
अबू हुरैरा और ज़ैद बिन खालिद जुहनी (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि नबी (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस दासी के बारे में पूछा गया, जो व्यभिचार में लिप्त हो गई और शादीशुदा न हो? तोआप ने फ़रमायाः यदि वह व्यभिचार करे, तो उसे कोड़े लगाओ। फिर व्यभिचार करे, तो फिर कोड़े लगाओ। फिर व्यभिचार करे, तो कोड़े लगाओ फिर उसे बेच दो, किसी रस्सी के बदले ही सही। इब्ने शिहाब कहते हैंः मैं नहीं जानता कि आपने बेचने की बात तीसरी बार के बाद कही या चौथी बार के बाद।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से व्यभिचार में लिप्त अविवाहित दासी के शरई दंड के बारे में पूछा गया, तो आपने फ़रमाया कि उसे कोड़े लगाए जाएँगे। ज्ञातो होकि दासी के लिए आज़ाद स्त्रियों का आधा दंड है, इसलिए उन्हें पचास कोड़े ही लगाए जाएँगे। अल्लाह तआला का फ़रमान है : {فَإِذَا أُحْصِنَّ فَإِنْ أَتَيْنَ بِفَاحِشَةٍ فَعَلَيْهِنَّ نِصْفُ مَا عَلَى الْمُحْصَنَاتِ مِنَ الْعَذَابِ} (फिर जब वह विवाहित हो जाएँ, तो यदि व्यभिचार कर जाएँ, तो उनपर उसका आधा दंड है, जो स्वतंत्र स्त्रियों पर है।) फिर यदि व्यभिचार कर बैठे, तो दोबारा पचास कोड़े लगाए जाएँगे, ताकि इस अश्लील कार्य से रुक जाए। लेकिन यदि उसे दंड से कोई फ़र्क़ न पड़े, वह तौबा न करे, बदनामी का भय भी न रखे और तीसरी बार व्यभिचार में लिप्त हो जाए, तो ऐसी परिस्थिति में उसे पचास कोड़े लगाने के बाद बेट डालो। चाहे कोड़ी के भाव ही क्यों न बेचना पड़े। क्योंकि, उसके अंदर न तो कोई भलाई है और न उसके सुधरने की उम्मीद बची है। अतः उसका दूर हो जाना ही बेहतर है, ताकि वह उस घर के लिए किसी फ़ितने का सबब न बन जाए, जिसमें रह रही है।

हवाला

صحيح البخاري، للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. الإلمام بشرح عمدة الأحكام، للشيخ إسماعيل الأنصاري -مطبعة السعادة، الطبعة الثانية، 1392هـ. تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، عبد الله البسام، تحقيق محمد صبحي حسن حلاق، مكتبة الصحابة، الشارقة، الطبعة العاشرة- 1426هـ.

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इसने ऐसी तौबा की है कि यदि उसे मदीने के सत्तर (70) लोगों के बीच बाँट दिया जाए, तो सबको काफ़ी हो जाए। क्या उसने इससे उत्तम भी कुछ पाया कि (सर्वशक्तिमान एवं महान) अल्लाह के लिए अपना प्राण त्याग दे?

عن أبي نُجَيد عمران بن حصين الخزاعي رضي الله عنه أن امرأة من جهينة أتت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - وهي حُبْلَى من الزنى، فقالت: يا رسول الله، أصبتُ حدًّا فَأَقِمْهُ عليَّ، فدعا نبيُّ الله صلى الله عليه وسلم وَلِيَّهَا، فقال: «أَحْسِنْ إِلَيْهَا، فإذا وَضَعَتْ فَأْتِنِي» ففعل، فأمر بها نبي الله صلى الله عليه وسلم فَشُدَّتْ عليها ثيابها، ثم أمر بها فَرُجِمَتْ، ثم صلى عليها. فقال له عمر: تُصَلِّي عليها يا رسول الله وقد زنت؟ قال: «لقد تابت توبةً لو قُسِمَتْ بين سبعين من أهل المدينة لَوَسِعَتْهُم، وهل وَجَدَتْ أفضل من أن جَادَتْ بنفسها لله عز وجل ؟!».
अबू नुजैद इमरान बिन हुसैन ख़ुज़ाई (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि (क़बीला) जुहैना की एक स्त्री अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई, जो ज़िना (व्यभिचार) के कारण गर्भवती थी। वह बोलीः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं हद की हक़दार हो चुकी हूँ, अतः मुझपर हद जारी कीजिए। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके वली (अभिभावक) को बुलाया और फ़रमायाः "इसके साथ अच्छा व्यवहार करो और जब यह बच्चे को जन्म दे, तो मेरे पास ले आओ।" उसने ऐसा ही किया। चुनांचे अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेश के मुताबिक़ उसके कपड़ों को उसके शरीर पर बाँध दिया गया और फ़िर आपने उसके बारे में आदेश दिया और उसका संगसार कर दिया गया। फिर आपने उसके जनाज़े की नमाज़ पढ़ी। ऐसे में उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) ने आपसे कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, वह व्यभिचारिणी है, इसके बावजूद आप उसके जनाज़े की नमाज़ पढ़ रहे हैं? तो फ़रमायाः "इसने ऐसी तौबा की है कि यदि उसे मदीने के सत्तर (70) लोगों के बीच बाँट दिया जाए, तो सबको काफ़ी हो जाए। क्या उसने इससे उत्तम भी कुछ पाया कि (सर्वशक्तिमान एवं महान) अल्लाह के लिए अपना प्राण त्याग दे?"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- صحيح البخاري -للإمام أبي عبد الله محمد بن إسماعيل البخاري، عناية محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة، الطبعة الأولى، 1422هـ. - صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. - شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ. - نزهة المتقين بشرح رياض الصالحين/تأليف مصطفى سعيد الخن-مصطفى البغا-محي الدين مستو-علي الشربجي-محمد أمين لطفي-مؤسسة الرسالة-بيروت –لبنان-الطبعة الرابعة عشرة1407-. -بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين –سليم بن عيد الهلالي دار ابن الجوزي –الطبعة الأولى 1418. - دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين -المؤلف: محمد علي بن محمد بن علان الصديقي-اعتنى بها: خليل مأمون شيحا-دار المعرفة للطباعة والنشر والتوزيع، بيروت – لبنان-الطبعة: الرابعة، 1425 هـ - 2004 م. -المعجم الوسيط-المؤلف: مجمع اللغة العربية بالقاهرة (إبراهيم مصطفى / أحمد الزيات / حامد عبد القادر / محمد النجار) -دار الدعوة.

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जुहैना नामक क़बीले की एक स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई, जो व्यभिचार के कारण गर्भवती थी।

عن عمران بن الحصين رضي الله عنهما : أنَّ امْرَأَةً مِنْ جُهَيْنَةَ أتَت النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَهِيَ حُبْلَى مِنَ الزِّنَا، فَقَالَتْ: يَا رسول الله، أصَبْتُ حَدّاً فَأقِمْهُ عَلَيَّ، فَدَعَا رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم وَلِيَّها، فقالَ: «أحْسِنْ إِلَيْهَا، فَإذَا وَضَعَتْ فَأتِنِي بِهَا» فَفَعَلَ، فَأمَرَ بها النبيُّ صلى الله عليه وسلم فَشُدَّتْ عَلَيْهَا ثِيَابُهَا، ثُمَّ أمَرَ بِهَا فَرُجِمَت، ثُمَّ صَلَّى عَلَيْهَا.
इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) का वर्णन है कि जुहैना नामक क़बीले की एक स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई, जो व्यभिचार के कारण गर्भवती थी, तथा बोलीः ऐ अल्लाह के रसूलः मैं हद (दंड) की पात्र हूँ। अतः आप मेरे ऊपर हद जारी कीजिए। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसके वली (अभिभावक) को बुलाया और फ़रमायाः "इसके साथ अच्छा व्यवहार करना और जब प्रसव हो जाए, तो इसे मेरे पास ले आना।" उन्होंने ऐसा ही किया। फिर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेश से उसके कपड़े कसकर बाँध दिए गए। फिर आपके आदेश से उसे संगसार कर दिया गया। फिर आपने उसके जनाज़े की नमाज़ पढ़ाई।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
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بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين؛ تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين؛ لمحمد بن علان الشافعي، دار الكتاب العربي-بيروت. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين؛ للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. شرح رياض الصالحين؛ للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن-الرياض، 1426هـ. صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبدالباقي، دار عالم الكتب-الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين؛ تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشر، 1407هـ.

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उस ज़ात की क़सम, जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह की पुस्तक के अनुसार ही निर्णय करूँगा। दासी और बकरियाँ तुम्हें वापस मिलेंगी। तुम्हारे बेटे को सौ कोड़े लगेंगे और उसे एक साल का देश निकाला दिया जाएगा। ऐ उनैस (असलम क़बीले का एक व्यक्ति), तुम इसकी पत्नी के पास जाओ। यदि वह स्वीकार कर ले, तो उसे संगसार (इस्लामी धर्मशास्त्र के अनुसार एक प्रकार का प्राणदंड जिसमें अपराधी को ज़मीन में कमर तक गाड़कर उसके सिर पर पत्थरों की वर्षा करके मार दिया जाता है) कर दो।

عن أبي هريرة، وزيد بن خالد الجهني رضي الله عنهما ، أنهما قالا: «إن رجلا من الأعراب أتى رسول صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله، أَنْشُدُكَ اللهَ إلا قضيتَ بيننا بكتاب الله. فقال الخَصْمُ الآخر -وهو أفْقه منه-: نعم، فاقْضِ بيننا بكتاب الله، وأْذَنْ لي. فقال النبي صلى الله عليه وسلم : قل. فقال: إنَّ ابني كان عَسِيفًا على هذا فزنى بامرأته، وإني أُخبرتُ أن على ابني الرَّجْمَ، فافْتَدَيْتُ منه بمائة شاة ووَلِيدَةٍ، فسألتُ أهل العلم فأخبروني أنما على ابني جَلْدُ مائة وتَغْرِيبُ عام، وأنَّ على امرأة هذا الرَّجْمَ. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : والذي نفسي بيده لأَقْضِيَنَّ بينكما بكتاب الله، الوَلِيدَةُ والغنم رَدٌّ عليك، وعلى ابنك جَلْدُ مائة وتَغْرِيبُ عام. واغْدُ يا أُنَيْسُ -لرجل مِن أَسْلَم- على امرأة هذا، فإن اعترفتْ فارْجُمْهَا، فَغَدَا عليها فاعترفتْ، فأَمَرَ بها رسول الله صلى الله عليه وسلم فرُجِمَتْ».
अबू हुरैरा और ज़ैद बिन ख़ालिद जुहनी -रज़ियल्लाहु अनहुमा- कहते हैं कि एक देहाती अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर कहता हूँ कि आप हमारे बीच केवल अल्लाह की पुस्तक के अनुसार निर्णय करेंगे। दूसरे व्यक्ति ने, (जो पहले की तुलना में अधिक समझदार था) कहाः ठीक है, आप हमारे बीच अल्लाह की किताब के अनुसार निर्णय कर दें और मुझे बोलने की अनुमति दें। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "ठीक है, कहो।" उसने कहाः मेरा बेटा इस आदमी के यहाँ काम करता था और उसने इसकी पत्नी से व्यभिचार कर लिया। मुझे बताया गया है कि मेरे बेटे को संगसार किया जाना है। अतः मैंने उसकी गरदन छुड़ाने के लिए सौ बकरी और एक दासी दे दी। फिर मैंने जानकारों से पूछा, तो बताया कि मेरे बेटे को सौ कोड़े लगाने हैं और एक साल देश निकाला देना है, जबकि उसकी पत्नी को संगसार किया जाना है। यह सुनकर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "उस ज़ात की क़सम, जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह की पुस्तक के अनुसार ही निर्णय करूँगा। दासी और बकरियाँ तुम्हें वापस मिलेंगी। तुम्हारे बेटे को सौ कोड़े लगेंगे और उसे एक साल का देश निकाला दिया जाएगा। ऐ उनैस (असलम क़बीले का एक व्यक्ति), तुम इसकी पत्नी के पास जाओ। यदि वह स्वीकार कर ले, तो उसे संगसार (इस्लामी धर्मशास्त्र के अनुसार एक प्रकार का प्राणदंड जिसमें अपराधी को ज़मीन में कमर तक गाड़कर उसके सिर पर पत्थरों की वर्षा करके मार दिया जाता है) कर दो।" चुनांचे उनैस -रज़ियल्लाहु अनहु- उसके पास गए और उसने स्वीकार कर लिया, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के आदेश पर उसे संगसार कर दिया गया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

इस हदीस में बताया गया है कि एक व्यक्ति दूसरे के यहाँ काम करता था और उसकी पत्नी से व्यभिचार कर लिया। व्यभिचार करने वाले के पिता ने सुन रखा था कि हर व्यभिचारी का संगसार होना है, इसलिए गरदन छुड़ाने के लिए उस स्त्री के पति को सौ बकरी और एक दासी दे दी। उसके बाद कुछ जानकार लोगों से पूछा, तो पता चला कि संगसार उसके बेटे का नहीं, बल्कि उस स्त्री का होना है। जबकि उसके बेटे को सौ कोड़ लगने हैं और एक वर्ष के लिए देश से निकालना है। अतः, व्यभिचारिणी का पति और व्यभिचारी का पिता, दोनों अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए, ताकि आप उनके बीच अल्लाह की किताब के अनुसार निर्णय कर दें। चुनांचे आपने सौ बकरियाँ और दासी व्यभिचारी के पिता को लौटा दी और उसे बताया कि उसके बेटे को सौ कोड़े लगने हैं और एक वर्ष के लिए देश से निकालना है, क्योंकि वह शादीशुदा नहीं है। फिर आपने व्यभिचारिणी से पूछताछ का आदेश दिया और जब उसने अपराध स्वीकार कर लिया, तो उसे संगसार कर दिया, क्योंकि वह शादीशुदा थी।

हवाला

- صحيح البخاري، دار طوق النجاة ط 1422هـ. - صحيح مسلم، ط دار إحياء التراث العربي .تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات - مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ. - الإلمام بشرح عمدة الأحكام، لإسماعيل الأنصاري، ط مكتبة السعادة، الطبعة الثانية. - تأسيس الأحكام للنجمي، ط دار المنهاج 1427هـ.

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कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो

عن عائشة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : "لا يَحِلّ دمُ امرئ مسلم، يشهد أن لا إله إلا الله، وأن محمدًا رسول الله، إلا بإحدى ثلاث: رجل زَنَى بَعْدَ إِحْصَان، فإنه يُرْجَم، ورجل خرج مُحاربًا لله ورسوله، فإنه يُقَتُل، أو يُصلَّبُ، أو يُنفى من الأرض، أو يَقتلَ نفسًا، فيُقتلُ بها".
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो : ऐसा व्यक्ति जो विवाह के पश्चात व्यभिचार करे, तो उसे संगसार किया जाएगा; ऐसा व्यक्ति जो अल्लाह तथा उसके रसूल से लड़ने के लिए निकले (अर्थात लोगों को रास्तों पर लूटे) तो उसे कत्ल किया जाएग अथवा सूली पर चढ़ाया जाएगा या फिर तड़ीपार (मुल्क बदर) कर दिया जाएगा और ऐसा व्यक्ति जो किसी को कत्ल कर दे, तो उसे भी कत्ल किया जाएगा।”
इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
तशरीह

यह हदीस इस बात का प्रमाण है कि ऐसे मुसलमानों का रक्तपात हराम है, जो गवाही देते हों कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, तथा उन्होंने कोई ऐसा काम भी न किया हो, जो इन दो गवाहियों के विरुद्ध हो और इन्सान को इस्लाम के दायरे से निकाल बाहर करता हो। इसका कारण यह है कि विधि-निर्माता पाक एवं महान अल्लाह का एक लक्ष्य जान की सुरक्षा तथा उसे शांति प्रदान करना भी है। उसने अपनी शरीयत में उसकी सुरक्षा का पूरा प्रबंध भी किया है। उसने अल्लाह का साझी बनाने के बाद सबसे बड़ा गुनाह किसी ऐसे व्यक्ति के क़त्ल को ही क़रार दिया है, जिसे क़त्ल करना उसने हराम घोषित कर रखा है। यहाँ उसने ऐसे मुसलमान के क़त्ल को हराम क़रार दिया है, जो अल्लाह के सत्य पूज्य होने और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के रसूल होने की गवाही देता हो, जब तक वह निम्नांकित तीन कामों में से किसी एक काम में संलिप्त न हो जाए : पहला : वह इसके बाद भी व्यभिचार में संलिप्त हो जाए कि अल्लाह ने उसे शादीशुदा बनाया और मान्य निकाह के द्वारा उसकी शर्मगाह की सुरक्षा का प्रबंध किया। दूसरा : वह किसी निर्दोष मुसलमान का नाहक़ क़त्ल कर दे। इस प्रकार के व्यक्ति के बारे में न्याय एवं समानता की बात यह है कि उसके साथ भी वही किया जाए, जो उसने दूसरे के साथ किया है, ताकि सत्य का बोलबाला रहे और अत्याचारियों को अत्याचार से रोका जा सके। तीसरा : ऐसा व्यक्ति जो मुसलमानों के विरुद्ध अल्लाह और उसके रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से युद्ध के लिए खड़ा हो जाए तथा लोगों का रास्ता रोक कर लूट-पाट करे, भयभीत करे और फ़साद मचाए। ऐसे व्यक्ति को क़त्ल किया जाएगा, सूली दी जाएगी या फिर ताड़ीपार कर दिया जाएगा, ताकि लोग उसकी बुराई एवं अत्याचार से सुरक्षित रह सकें। इन तीन लोगों को क़त्ल किया जाएगा कि इनके क़त्ल ही में धर्म, जान एवं मान-सम्मान की सुरक्षा निहित है।

हवाला

- سنن أبي داود , تحقيق: محمد محي الدين, المكتبة العصرية. - سنن للنسائي, تحقيق: عبد الفتاح أبو غدة, مكتب المطبوعات الإسلامية الطبعة: الثانية، 1406 - صحيح الجامع الصغير وزيادة للألباني , المكتب الإسلامي - بلوغ المرام من أدلة الأحكام لابن حجر تحقيق: سمير بن أمين الزهيري, دار الفلق - ط: السابعة، 1424 هـ - توضِيحُ الأحكَامِ مِن بُلوُغ المَرَام، للبسام، مكتَبة الأسدي، مكّة المكرّمة، الطبعة: الخامِسَة، 1423 هـ - عون المعبود شرح سنن أبي داود، للعظيم آبادي دار الكتب العلمية - بيروت, الطبعة: الثانية، 1415 هـ - تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف: صالح بن فوزان بن عبد الله الفوزان، الطبعة: الأولى، 1427 هـ 2006 م - تيسير العلام شرح عمدة الأحكام للبسام، حققه وعلق عليه وخرج أحاديثه وصنع فهارسه: محمد صبحي بن حسن حلاق، ط10، مكتبة الصحابة، الإمارات، مكتبة التابعين، القاهرة، 1426 هـ - فتح ذي الجلال والاكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين، المكتبة الإسلامية - الطبعة الأولى 1427.

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मुझसे सीख लो, मुझसे सीख लो। अल्लाह ने उनके लिए राह निकाल दी है (यानी व्यभिचारियों की समस्या का समाधान कर दिया है)। कुँवारा यदि कुँवारी के साथ व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा एक साल के लिए उसके नगर से निकाल दिया जाएगा और विवाहित पुरुष यदि विवाहिता के संग व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा संगसार किया जाएगा।

عن عبادة بن الصامت، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «خُذُوا عني، خُذُوا عني، قد َجَعَلَ الُله لَهُنَّ سبيلا، البِكْرُ بالبِكْر جَلْدُ مِائة ونَفْيُ سَنَةٍ، والثَّيِّبُ بالثيب جلد مائة والرجم».
उबादा बिन सामित (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “मुझसे सीख लो, मुझसे सीख लो। अल्लाह ने उनके लिए राह निकाल दी है (यानी व्यभिचारियों की समस्या का समाधान कर दिया है)। कुँवारा यदि कुँवारी के साथ व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा एक साल के लिए उसके नगर से निकाल दिया जाएगा और विवाहित पुरुष यदि विवाहिता के संग व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा संगसार किया जाएगा।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

صحيح مسلم؛ للإمام مسلم بن الحجاج، حققه ورقمه محمد فؤاد عبد الباقي، دار عالم الكتب - الرياض، الطبعة الأولى، 1417هـ. منحة العلام في شرح بلوغ المرام، تأليف عبد الله الفوزان، طبعة دار ابن الجوزي، الطبعة الأولى، 1428ه. توضيح الأحكام شرح بلوغ المرام، تأليف عبد الله البسام- مكتبة الأسدي، مكة المكرمة، الطبعة الخامِسَة، 1423هـ - 2003م. تسهيل الإلمام بفقه الأحاديث من بلوغ المرام، تأليف الشيخ صالح الفوزان- عناية عبد السلام السليمان - مؤسسة الرسالة، الطبعة الأولى. فتح ذي الجلال والإكرام بشرح بلوغ المرام، للشيخ ابن عثيمين- المكتبة الإسلامية، القاهرة، تحقيق صبحي رمضان وأم إسراء بيومي- الطبعة الأولى، 1427ه. بلوغ المرام من أدلة الأحكام، لابن حجر، دار القبس للنشر والتوزيع، الرياض - المملكة العربية السعودية، الطبعة الأولى، 1435هـ - 2014م.

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11 में से 8
11 हदीसें
  1. अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मस्जिद में थे कि एक मुसलमान आपके पास आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं व्यभिचार में लिप्त हो गया हूँ।
  2. यहूदियों ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहा कि उनमें से एक पुरुष एवं एक स्त्री ने व्यभिचार किया है।
  3. नबी (सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम) से उस दासी के बारे में पूछा गया, जो व्यभिचार में लिप्त हो गई हो और शादीशुदा न हो?
  4. इसने ऐसी तौबा की है कि यदि उसे मदीने के सत्तर (70) लोगों के बीच बाँट दिया जाए, तो सबको काफ़ी हो जाए। क्या उसने इससे उत्तम भी कुछ पाया कि (सर्वशक्तिमान एवं महान) अल्लाह के लिए अपना प्राण त्याग दे?
  5. जुहैना नामक क़बीले की एक स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई, जो व्यभिचार के कारण गर्भवती थी।
  6. उस ज़ात की क़सम, जिसके हाथ में मेरे प्राण हैं, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह की पुस्तक के अनुसार ही निर्णय करूँगा। दासी और बकरियाँ तुम्हें वापस मिलेंगी। तुम्हारे बेटे को सौ कोड़े लगेंगे और उसे एक साल का देश निकाला दिया जाएगा। ऐ उनैस (असलम क़बीले का एक व्यक्ति), तुम इसकी पत्नी के पास जाओ। यदि वह स्वीकार कर ले, तो उसे संगसार (इस्लामी धर्मशास्त्र के अनुसार एक प्रकार का प्राणदंड जिसमें अपराधी को ज़मीन में कमर तक गाड़कर उसके सिर पर पत्थरों की वर्षा करके मार दिया जाता है) कर दो।
  7. कोई मुसलमान, जो इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद (उपास्य) नहीं और मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं, उसका ख़ून केवल उसी समय हलाल होगा जब वह इन तीन लोगों में से कोई एक हो
  8. मुझसे सीख लो, मुझसे सीख लो। अल्लाह ने उनके लिए राह निकाल दी है (यानी व्यभिचारियों की समस्या का समाधान कर दिया है)। कुँवारा यदि कुँवारी के साथ व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा एक साल के लिए उसके नगर से निकाल दिया जाएगा और विवाहित पुरुष यदि विवाहिता के संग व्यभिचार करे तो उसको सौ कोड़े मारे जाएँगे तथा संगसार किया जाएगा।
  9. जब माइज़ बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए (तथा अपने व्यभिचार व दुष्कर्म का इक़रार किया) तो आपने उनसे कहा : “हो सकता है तुमने चुंबन लिया हो अथवा उसको छुआ हो अथवा उसकी ओर देखा हो।” उन्होंने कहा : नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल (ऐसी बात नहीं है)। तो आपने उनसे बिना किसी लाग-लपेट के पूछा : “क्या तुमने उसके संग संभोग किया है?” (जब उन्होंने इसका इक़रार कर लिया तो) आपने उनको संगसार करने का आदेश दिया।
  10. निःसंदेह अल्लाह ने मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को सत्य के साथ भेजा है और आपके ऊपर (कुरआन नामक) किताब उतारी है। आपपर जो आयतें उतारी गईं हैं, उनमें संगसार (इस्लामी धर्मशास्त्र के अनुसार एक प्रकार का प्राणदंड जिसमें अपराधी को ज़मीन में कमर तक गाड़कर उसके सिर पर पत्थरों की वर्षा करके मार दिया जाता है) की आयत भी थी। हमने उसको पढ़ा है, याद किया है तथा समझा है। चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने संगसार किया है और हमने भी आपके बाद संगसार किया है।
  11. नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने (कुँवारे को कुँवारी के साथ व्यभिचार करने पर) कोड़े मारे और नगर से निकाला, अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने भी कोड़े मारे और नगर से निकाला तथा उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने भी कोड़े मारे और नगर से निकाला।

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com