अल्लाह के नबी के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने पहले खर्च करने की कुछ जगहों को बयान किया। फ़रमाया कि एक दीनार जिसे तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए खर्च करते हो, एक दीनार जिसे तुम किसी ग़ुलाम को ग़ुलामी के बंधन से आज़ाद करने के लिए खर्च करते हो, एक दीनार जिसे तुम किसी ज़रूरतमंद निर्धन को दान करते हो और एक दीनार जिसे तुम अपने बीवी-बच्चों पर खर्च करते हो। फिर आपने बताया कि अल्लाह के यहाँ इनमें सबसे अधिक सवाब वाला दीनार वह है, जिसे तुम अपने बीवी-बच्चों और ऐसे लोगों पर खर्च करते हो, जिनका खर्च उठाना तुमपर वाजिब है।
- अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए खर्च करने के बहुत-से रास्ते हैं।
- जब खर्च करने के कई विकल्प सामने हों, तो अधिक बेहतर विकल्प को प्राथमिकता दी जाएगी। जब सारे स्थानों पर खर्च करना संभव न हो, बाल-बच्चों पर खर्च किया जाएगा।
- नववी सहीह मुस्लिम की व्याख्या में कहते हैं : अपने मातहतों पर खर्च करने की प्रेरणा और उससे मिलने वाले प्रतिफल का बयान। क्योंकि मातहतों पर खर्च करना कभी उनसे रिश्तेदारी के कारण वाजिब, मुसतहब तथा सदक़ा होता है, तो कभी निकाह या दासता के कारण मालिकाना अधिकार की वजह से वाजिब होता है। इन सभी लोगों पर खर्च करना नेकी का काम है और शरीयत ने इसकी प्रेरणा दी है। इनपर ख़र्च करना नफ़ल सदक़े से बेहतर है।
- सिंधी कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शब्दों "वह दीनार जो वह अपने परिजनों पर खर्च करता है" का अर्थ है : जिसे खर्च करते समय अल्लाह की प्रसन्नता सामने हो और पारिवारिक कर्तव्य को पूरा करना उद्देश्य हो।
- अबू क़िलाबा कहते हैं : उस व्यक्ति से बढ़कर प्रतिफल का हक़दार कौन हो सकता है, जो अपने छोटे-छोटे बच्चों पर ख़र्च करके उनको किसी के सामने हाथ फैलाने से बचाए रखे या अल्लाह उसके द्वारा उन्हें लाभान्वित करे तथा बेनियाज़ रखे।
صحيح مسلم (2/ 692) (995). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (3/ 156). نزهة المتقين بشرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 291). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 374). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص209).