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तशरीह के साथ हदीसें

सहाबा रज़ियल्लाहु अनहुम की फ़ज़ीलतें

31 हदीसें

मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।

عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ: أَنَّهُ جَاءَ إِلَى الحَجَرِ الأَسْوَدِ فَقَبَّلَهُ، فَقَالَ: إِنِّي أَعْلَمُ أَنَّكَ حَجَرٌ، لاَ تَضُرُّ وَلاَ تَنْفَعُ، وَلَوْلاَ أَنِّي رَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقَبِّلُكَ مَا قَبَّلْتُكَ.
उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित है कि वह हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फ़रमाया : मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अमीरुल मोमिनीन उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु काबा के एक किनारे में लगे, हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फिर कहा : मैं भली-भाँति जानता हूँ कि तुम एक पत्थर हो, न तो हानि पहुँचा सकते हो और न ही लाभ, यदि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को तुम्हें चूमते हुए न देखा होता, तो मैं तुम्हें न चूमता।

फ़ायदे
  1. तवाफ़ के समय अगर आसानी से संभव हो, तो हजर-ए-असवद के सामने पहुँचने पर उसे चूमना शरीयत सम्मत है।
  2. हजर-ए-असवद को चूमने का उद्देश्य अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण है।
  3. नववी कहते हैं : इस हदीस का अर्थ यह है कि हजर-ए-असवद के अंदर किसी का भला या बुरा करने की शक्ति नहीं है। अन्य सृष्टियों की तरह, जिनमें लाभ या हानि पहुँचाने की शक्ति नहीं होती, यह भी एक सृष्टि है। उमर रज़ियल्लाहु अनहु ने हज के दौरान यह बात इसलिए कही, ताकि विभिन्न क्षेत्रों और शहरों से आए हुए लोग इसे सुनें और अपने मन-मस्तिष्क में बसा लें।
  4. सारी इबादतें 'तौकीफ़िया' हैं (अर्थात ये अल्लाह के आदेशों पर रुकी हुई हैं); केवल वही इबादत शरीयत सम्मत मानी जाएगी, जिसकी अनुमति अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दी हो।
  5. जब कोई इबादत साबित हो, तो उसपर अमल किया जाएगा, यद्यपि उसकी हिकमत मालूम न भी हो। क्योंकि आदेश का पालन तथा अनुसरण करना भी अपेक्षित हिकमतों में से एक है।
  6. इबादत के तौर पर पत्थरों आदि, जिनको चूमना शरीयत से साबित न हो, को चूमना मना है।
हवाला

صحيح البخاري (2/ 149) (1597). صحيح مسلم (2/ 925) (1270). تيسير العلام شرح عمدة الأحكام، لعبد الله البسام (ص394). تنبيه الأفهام شرح عمدة الأحكام، لابن عثيمين (3/ 527).

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ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भली बात का आदेश दें और अज्ञानियों से मुँह फेर लें।) और यह अज्ञानियों में हैं।

عن عبد الله بن عباس رضي الله عنهما قال: قَدِم عُيَينَة بن حِصنٍ، فَنزَل على ابنِ أَخِيه الحُرِّ بن قَيسٍ، وكان من النَّفَر الذين يُدنِيهِم عمر رضي الله عنه ، وكان القُرَّاء أصحاب مَجلِس عُمر رضي الله عنه ومُشاوَرَتِه كُهُولا كانوا أو شُبَّانًا، فقال عيينة لابن أَخِيه: يَا ابن أخي، لك وَجْه عند هذا الأمير فَاسْتَأذِن لِي عليه، فَاسْتَأذَن فَأَذِن لَه عُمر، فَلَمَّا دَخَل قال: هي يا ابن الخطَّاب، فَوالله مَا تُعطِينَا الجَزْلَ ولا تَحكُمُ فِينَا بِالعَدلِ، فغضب عمر رضي الله عنه حَتَّى هَمَّ أَنْ يُوقِعَ بِه، فقال له الحُرُّ: يا أمير المؤمنين، إنَّ الله تعالى قال لِنَبِيِّه صلى الله عليه وسلم : {خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين}، وإِنَّ هذا مِن الجَاهِلِين، والله مَا جَاوَزَها عُمر حِين تَلاَهَا، وكان وَقَّافًا عند كِتَاب الله تعالى .
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैंः उययना बिन हिस्न आया और अपने भतीजे हुर्र बिन क़ैस के पास ठहरे। हुर्र बिन क़ैस उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- अपने निकट रखा करते थे। उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास बैठने वाले उलमा ही हुआ करते थे; अधेड़ हों या जवान। चुनांचे उययना ने हुर्र बिन क़ैस से कहाः ऐ भतीजे, तुम्हारा खलीफ़ा के पास एक विशेष स्थान है। अतः मुझे उनसे मिलने की अनुमति लेकर दो। सो उन्होंने अनुमति माँगी और उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें अमुमति दे दी। जब वे उनके पास आए, तो कहाः ऐ ख़त्ताब के बेटे, अल्लाह की क़सम, तुम हमें अधिक नहीं देते और हमारे बीच न्याय के साथ निर्णय नहीं करते। इसपर उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- गुस्से में आ गए, यहाँ तक उन्हें मारने का इरादा कर लिया। यह देखकर हुर्र ने कहाः 'ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भली बात का आदेश दें और अज्ञानियों से मुँह फेर लें।) और यह अज्ञानियों में हैं।' अल्लाह की क़सम, उमर - रज़ियल्लाहु अन्हु- यह आयत सुनने के बाद इससे ज़रा भी आगे न बढ़े। दरअसल, वे अल्लाह की किताब के निकट बहुत ज़्यादा ठहरने वाले थे।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. تطريز رياض الصالحين، للشيخ فيصل المبارك، ط1، تحقيق: عبد العزيز بن عبد الله آل حمد، دار العاصمة، الرياض، 1423هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. شرح رياض الصالحين، للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر، ط1، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ. تاج العروس من جواهر القاموس، لمحمّد بن محمّد بن عبد الرزّاق الحسيني، الملقّب بمرتضى، الزَّبيدي، تحقيق مجموعة من المحققين، دار الهداية. الدلائل في غريب الحديث، لقاسم بن ثابت بن حزم العوفي السرقسطي، تحقيق: د. محمد بن عبد الله القناص، الناشر: مكتبة العبيكان، الرياض، الطبعة: الأولى، 1422هـ - 2001م.

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मैं अल्लाह के निकट इस बात से बरी होने का एलान करता हूँ कि तुममें से कोई मेरा 'ख़लील' (अनन्य मित्र) हो। क्योंकि अल्लाह ने जैसे इबराहीम को 'ख़लील' बनाया था, वैसे मुझे भी 'ख़लील' बना लिया है

عن جندب رضي الله عنه قال: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبْلَ أَنْ يَمُوتَ بِخَمْسٍ وَهُوَ يَقُولُ «إِنِّي أَبْرَأُ إِلَى اللهِ أَنْ يَكُونَ لِي مِنْكُمْ خَلِيلٌ فَإِنَّ اللهَ تَعَالَى قَدِ اتَّخَذَنِي خَلِيلًا كَمَا اتَّخَذَ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا، وَلَوْ كُنْتُ مُتَّخِذًا مِنْ أُمَّتِي خَلِيلًا لَاتَّخَذْتُ أَبَا بَكْرٍ خَلِيلًا! أَلَا وَإِنَّ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ كَانُوا يَتَّخِذُونَ قُبُورَ أَنْبِيَائِهِمْ وَصَالِحِيهِمْ مَسَاجِدَ، أَلَا فَلَا تَتَّخِذُوا الْقُبُورَ مَسَاجِدَ! إِنِّي أَنْهَاكُمْ عَنْ ذَلِكَ».
जुंदुब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मृत्यु से पाँच दिन पहले कहते सुना है : "मैं अल्लाह के निकट इस बात से बरी होने का एलान करता हूँ कि तुममें से कोई मेरा 'ख़लील' (अनन्य मित्र) हो। क्योंकि अल्लाह ने जैसे इबराहीम को 'ख़लील' बनाया था, वैसे मुझे भी 'ख़लील' बना लिया है। हाँ, अगर मैं अपनी उम्मत के किसी व्यक्ति को 'ख़लील' बनाता, तो अबू बक्र को बनाता। सुन लो, तुमसे पहले के लोग अपने नबियों की कब्रों को मस्जिद बना लिया करते थे। सुन लो, तुम कब्रों को मस्जिद न बनाना। मैं तुम्हें इससे मना करता हूँ।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अल्लाह के यहाँ अपना स्थान स्पष्ट किया है। आपने बताया है कि अल्लाह के निकट आप प्रेम के उच्चतम स्थान पर विराजमान हैं, जो स्थान केवल इबराहीम अलैहिस्सलाम को प्राप्त था। इसी कारण, स्पष्ट कर दिया कि अल्लाह के सिवा आपका कोई 'खलील' (अनन्य मित्र) नहीं है, क्योंकि आपके दिल का गागर उसके प्रेम, सम्मान और उसके ज्ञान से परिपूर्ण है। अतः उसमें अब कोई खाली स्थान नहीं है। हाँ, यदि मख़लूक में से कोई आपका खलील होता, तो अबू बक्र रज़ियल्लाहु अनहु होते। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मोहब्बत के बारे में जायज़ सीमा से आगे बढ़ने से मना किया है, जिससे आगे बढ़ने का काम यहूदियों एवं ईसाइयों ने अपने नबियों की क़ब्रों तथा अपने में से नेक लोगों की क़ब्रों के सिलसिले में किया था। उन्होंने तो उन क़ब्रों को पूज्य बनाकर अल्लाह के साथ उनकी पूजा शुरू कर दी थी और उनके ऊपर मस्जिदें तथा इबादतखाने बना डाले थे। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी उम्मत को उनके जैसा काम करने से मना किया है।

फ़ायदे
  1. अबू बक्र रज़ियल्लाहु अनहु की फ़ज़ीलत, उनका सबसे उत्तम सहाबी तथा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मृत्यु के बाद आपकी ख़िलाफ़त का सबसे अधिक हक़दार होना।
  2. क़ब्रों पर मस्जिद बनाना पिछले समुदायों द्वारा किए गए ग़लत कामों में से एक है।
  3. क़ब्रों को इबादत की जगह बनाने की मनाही कि उनके पास या उनकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी जाए तथा उनके ऊपर मस्जिद या गुंबद बनाए जाएँ, क्योंकि इसके नतीजे में शिर्क के द्वार खुलने की आशंका रहती है।
  4. नेक लोगों के बारे में अतिशयोक्ति करने से मना किया गया है, क्योंकि इससे शिर्क के द्वार खुलते हैं।
  5. यहाँ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जिस चीज़ से मना किया है, उसकी ख़तरनाकी इससे समझ में आती है कि मृत्यु से पाँच दिन पहले उससे सावधान किया है।
हवाला

صحيح مسلم (1/ 377) (532). شرح النووي على مسلم (5/ 13). الجديد في شرح كتاب التوحيد، لمحمد القرعاوي (ص188). الملخص في شرح كتاب التوحيد، لصالح الفوزان (ص172).

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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अंसार के बारे में फ़रमाया : "उनसे वही प्रेम करेगा, जो मोमिन होगा और उनसे वही द्वेष रखेगा, जो मुनाफ़िक़ होगा। जो उनसे प्रेम करेगा, अल्लाह उससे प्रेम करेगा और जो उनसे द्वेष रखेगा, अल्लाह उससे द्वेष रखेगा।

عَنِ الْبَرَاءِ رضي الله عنه: عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ فِي الْأَنْصَارِ: «لَا يُحِبُّهُمْ إِلَّا مُؤْمِنٌ، وَلَا يُبْغِضُهُمْ إِلَّا مُنَافِقٌ، مَنْ أَحَبَّهُمْ أَحَبَّهُ اللهُ وَمَنْ أَبْغَضَهُمْ أَبْغَضَهُ اللهُ».
बरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अंसार के बारे में फ़रमाया : "उनसे वही प्रेम करेगा, जो मोमिन होगा और उनसे वही द्वेष रखेगा, जो मुनाफ़िक़ होगा। जो उनसे प्रेम करेगा, अल्लाह उससे प्रेम करेगा और जो उनसे द्वेष रखेगा, अल्लाह उससे द्वेष रखेगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि मदीने में रहने वाले अंसार लोगों से प्रेम करना ईमान की संपूर्णता की निशानी है। ऐसा इसलिए कि अंसारी इस्लाम और अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहयोग में आगे रहे हैं, मुसलमानों को शरण दी है और अल्लाह के मार्ग में अपना धन एवं जान खर्च किया है। इसी तरह अंसार से द्वेष रखना निफ़ाक़ की निशानी है। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो अंसार से मोहब्बत रखेगा, अल्लाह उससे मोहब्बत रखेगा और जो अंसार से द्वेष रखेगा, अल्लाह उससे द्वेष रखेगा।

फ़ायदे
  1. इस हदीस में अंसार की एक बड़ी फ़ज़ीलत बयान की गई है कि उनसे मोहब्बत निफ़ाक़ से बरी होने और मोमिन होने की निशानी है।
  2. अल्लाह के वलियों से मोहब्बत और उनके सहयोग से अल्लाह की मोहब्बत प्राप्त होती है।
  3. इस्लाम में दाख़िल होने में पहल करने वाले लोगों की फ़ज़ीलत।
हवाला

صحيح البخاري (5/ 32) (3783). صحيح مسلم (1/ 85) (75). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 447). تطريز رياض الصالحين، لفيصل آل مبارك (ص257). كنوز رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (6/ 258). شرح النووي على مسلم (2/ 63). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين (1/ 350).

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ऐ हारिसा की माता, जन्नत में बहुत- सी श्रेणियाँ हैं और तुम्हारे बेटे ने उसकी सबसे ऊँची श्रेणी अल-फ़िरदौस प्राप्त कर ली है।

عن أنس رضي الله عنه أن أم الرُّبيع بنت البراء وهي أم حارثة بن سُراقة، أتَت النبي صلى الله عليه وسلم فقالت: يا رسول الله، ألا تُحَدِّثُنِي عن حارثة -وكان قُتِل يوم بَدْرٍ- فإن كان في الجنَّة صَبَرْت، وإن كان غير ذلك اجْتَهَدْتُ عليه في البُكَاء، فقال: «يا أم حارثة، إنها جِنَان في الجنة، وإن ابْنَك أصَاب الفِردَوْس الأعلى».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि उम्मे रुबैयी बिंत बरा जो हारिसा बिन सुराक़ा की माँ हैं, अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आईं और बोलींः ऐ अल्लाह के रसूल, क्या आप मुझे हारिसा के बारे में- जो बद्र के दिन मारे गए थे- नहीं बताएँगे? यदि वह जन्नत में है, तो सब्र कर लूँगी और यदि कहीं और है, तो उसपर खूब रोउँगी। आपने फ़रमायाः "ऐ हारिसा की माता, जन्नत में बहुत- सी श्रेणियाँ हैं और तुम्हारे बेटे ने उसकी सबसे ऊँची श्रेणी अल-फ़िरदौस प्राप्त कर ली है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، سليم بن عيد الهلالي، دار ابن الجوزي، الدمام، الطبعة: الأولى 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين، محمد علي بن البكري بن علان، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، الطبعة: الرابعة 1425هـ. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق ماهر الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، الطبعة: الأولى 1428هـ، 2007م. رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، أبو زكريا محيي الدين النووي، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، الطبعة: الرابعة 1428هـ. شرح رياض الصالحين للشيخ ابن عثيمين، دار الوطن للنشر، الرياض، 1426هـ. صحيح البخاري، محمد بن إسماعيل البخاري الجعفي، تحقيق: محمد زهير الناصر، دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، الطبعة: الأولى 1422هـ. صحيح مسلم، مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت، الطبعة: 1423هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، كنوز إشبيليا، الرياض، الطبعة: الأولى 1430هـ، 2009م. منار القاري شرح مختصر صحيح البخاري، حمزة محمد قاسم، راجعه: عبد القادر الأرناؤوط، عني بتصحيحه ونشره: بشير محمد عيون، الناشر: مكتبة دار البيان، دمشق، مكتبة المؤيد، الطائف، الطبعة: 1410هـ، 1990م. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين، مؤسسة الرسالة، بيروت، الطبعة: الرابعة عشر 1407هـ، 1987م.

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कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे।

عن أنس رضي الله عنه قال: جاء ناس إلى النبي صلى الله عليه وسلم أن ابعث معنا رجالاً يعلمونا القرآن والسنة، فبعث إليهم سبعين رجلا ًمن الأنصار يقال لهم: القراء، فيهم خالي حَرامٌ، يقرؤون القرآن، ويتدارسون بالليل يتعلمون، وكانوا بالنهار يَجِيئُون بالماء، فيضعونه في المسجد، ويحتطبون فيبيعونه، ويشترون به الطعام لأهل الصُّفَّةِ، وللفقراء، فبعثهم النبي صلى الله عليه وسلم فَعَرَضُوا لهم فقتلوهم قبل أن يبلغوا المكان، فقالوا: اللهم بلَغِّ ْعَنَّا نبينا أنا قد لَقِينَاك فرضينا عنك ورَضِيتَ عَنَّا، وأتى رجلٌ حَرَاماً خال أنس من خلفه، فطعنه برُمْحٍ حتى أَنْفَذَهُ، فقال حَرَامٌ: فُزْتُ ورَبِّ الكعبة، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إن إخوانكم قد قُتِلُوا وإنهم قالوا: اللهم بلغ عنا نبينا أنا قد لقيناك فرضينا عنك ورضيت عنا».
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे। वे क़ुरआन पढ़ते, रात को सामूहिक रूप से उसके अर्थ के बारे में चर्चा करके सीखते और दिन में पानी लाकर मस्जिद में रखते, लकड़ी चुनकर बेचते और उससे सुफ़्फ़ा (चबूतरा) वालों और निर्धनों के लिए भोजन खरीद कर लाते थे। अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इन क़ारियों को उनके साथ भेज तो दिया, परन्तु उन्होंने निर्धारित स्थान तक पहुँचने से पहले ही उनपर आक्रमण करके उन्हें मार डाला। ऐसे में, उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह, हमारी ओर से अपने नबी को यह संदेश पहुँचा देना कि हम तुझसे आ मिले हैं तथा हम तुझसे प्रसन्न हैं और तू हमसे प्रसन्न है। इसी क्रम में एक व्यक्ति ने अनस के मामा हराम के पास पीछे से आकर नेज़ा मारा, जो उनके शरीर में धँस गया और आर-पार हो गया तो हराम ने कहाः काबे के रब की क़सम, मैं सफल हो गया। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "तुम्हारे भाई क़त्ल कर दिए गए हैं और उन्होंने कहा हैः ऐ अल्लाह, हमारी ओर से अपने नबी को यह संदेश पहुँचा देना कि हम तुझसे आ मिले हैं तथा हम तुझसे प्रसन्न हैं और तू हमसे प्रसन्न है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين لسليم الهلالي، ط1، دار ابن الجوزي، الدمام، 1415هـ. دليل الفالحين لطرق رياض الصالحين لمحمد علي بن محمد بن علان، ط4، اعتنى بها: خليل مأمون شيحا، دار المعرفة، بيروت، 1425 هـ. رياض الصالحين للنووي، ط1، تحقيق: ماهر ياسين الفحل، دار ابن كثير، دمشق، بيروت، 1428 هـ. رياض الصالحين، ط4، تحقيق: عصام هادي، وزارة الأوقاف والشؤون الإسلامية القطرية، دار الريان، بيروت، 1428هـ. صحيح البخاري، ط1، تحقيق: محمد زهير بن ناصر الناصر دار طوق النجاة (مصورة عن السلطانية بإضافة ترقيم: محمد فؤاد عبد الباقي)، 1422هـ. صحيح مسلم، تحقيق: محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي، بيروت. الكاشف عن حقائق السنن (شرح المشكاة) للطيبي، تحقيق: عبد الحميد هنداوي، مكتبة الباز، مكة، 1417هـ. كنوز رياض الصالحين، مجموعة من الباحثين برئاسة حمد بن ناصر العمار، ط1، كنوز إشبيليا، الرياض، 1430هـ. المنهاج شرح صحيح مسلم بن الحجاج للنووي ، ط2، دار إحياء التراث العربي - بيروت، 1392هـ. نزهة المتقين شرح رياض الصالحين لمجموعة من الباحثين، ط14، مؤسسة الرسالة، 1407هـ.

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अगर मैं अपने इन खुजूरों को खाने तक जीवित रहा तो यह बड़ा लंबा जीवन होगा। अतः, अपने पास मौजूद खुजूरों को फेंक दिया और मुश्रिकों से लड़ने लगे, यहाँ तक कि मारे गए।

عن أنس رضي الله عنه قال: انطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم وأصحابه حتى سبقوا المشركين إلى بدر، وجاء المشركون، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «لا يقدمن أحد منكم إلى شيء حتى أكون أنا دونه»، فدنا المشركون، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «قوموا إلى جنة عرضها السماوات والأرض» قال: يقول عمير بن الحمام الأنصاري رضي الله عنه : يا رسول الله، جنة عرضها السماوات والأرض؟ قال: «نعم» قال: بخ بخ ؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «ما يحملك على قولك بخ بخ؟» قال: لا والله يا رسول الله إلا رجاء أن أكون من أهلها، قال: «فإنك من أهلها» فأخرج تمرات من قرنه، فجعل يأكل منهن، ثم قال: لئن أنا حييت حتى آكل تمراتي هذه إنها لحياة طويلة، فرمى بما كان معه من التمر، ثم قاتلهم حتى قتل.
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी चले, यहाँ तक कि मुश्रिकों से पहले ही बद्र पहुँच गए। उसके बाद मुश्रिकजन भी आ गए। ऐसे में, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुममें से कोई मुझसे पहले किसी वस्तु की ओर न बढ़े। फिर मुश्रिकजन निकट आ गए तो फ़रमायाः उस जन्नत की ओर बढ़ चलो, जिसकी चौड़ाई आकाशों और धरती के बराबर है। वर्णनकर्ता कहते हैंः उस समय उमैर बिन हुमाम अंसारी - रज़ियल्लाहु अन्हु- कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसी जन्नत जिसकी चौड़ाई आकाशों और धरती के बराबर है? आपने कहाः "हाँ!" उन्होंने कहाः वाह वाह! आपने कहाः "तेरे वाह वाह कहने का कारण?" उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! अल्लाह की क़सम, इस आशा के सिवा कुछ और नहीं कि मुझे भी उसमें प्रवेश का सौभाग्य प्राप्त हो जाए। आपने कहाः "तू उसमें प्रवेश करने वालों में से है।" यह सुनकर उन्होंने अपने तरकश से कुछ खुजूर निकाले और उन्हें खाने लगे। लेकिन, फिर कहाः अगर मैं अपने इन खुजूरों को खाने तक जीवित रहा तो यह बड़ा लंबा जीवन होगा। अतः, अपने पास मौजूद खुजूरों को फेंक दिया और मुश्रिकों से लड़ने लगे, यहाँ तक कि मारे गए।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।दर्जासह़ीह़
हवाला

- رياض الصالحين من كلام سيد المرسلين، للإمام أبي زكريا النووي، تحقيق د. ماهر الفحل، دار ابن كثير-دمشق، الطبعة الأولى، 1428هـ. - بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، تأليف سليم الهلالي، دار ابن الجوزي- الطبعة الأولى1418هـ. - نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، تأليف د. مصطفى الخِن وغيره، مؤسسة الرسالة-بيروت، الطبعة الرابعة عشرة، 1407هـ. - صحيح مسلم، للإمام مسلم بن الحجاج، تحقيق محمد فؤاد عبد الباقي، دار إحياء التراث العربي. - كنوز رياض الصالحين، لحمد بن ناصر العمار، دار كنوز إشبيليا- الطبعة الأولى1430هـ. - شرح رياض الصالحين، للشيخ محمد بن صالح العثيمين، مدار الوطن، الرياض، 1426هـ.

यह हदीस HadeethEnc.com पर

मैं यह झंडा एक ऐसे व्यक्ति को दूँगा, जो अल्लाह और उसके रसूल से प्यार करता हो और अल्लाह उसके हाथों विजय प्रदान करेगा।

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَوْمَ خَيْبَرَ: «لَأُعْطِيَنَّ هَذِهِ الرَّايَةَ رَجُلًا يُحِبُّ اللهَ وَرَسُولَهُ، يَفْتَحُ اللهُ عَلَى يَدَيْهِ» قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ: مَا أَحْبَبْتُ الْإِمَارَةَ إِلَّا يَوْمَئِذٍ، قَالَ فَتَسَاوَرْتُ لَهَا رَجَاءَ أَنْ أُدْعَى لَهَا، قَالَ فَدَعَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ، فَأَعْطَاهُ إِيَّاهَا، وَقَالَ: «امْشِ، وَلَا تَلْتَفِتْ، حَتَّى يَفْتَحَ اللهُ عَلَيْكَ» قَالَ فَسَارَ عَلِيٌّ شَيْئًا ثُمَّ وَقَفَ وَلَمْ يَلْتَفِتْ، فَصَرَخَ: يَا رَسُولَ اللهِ، عَلَى مَاذَا أُقَاتِلُ النَّاسَ؟ قَالَ: «قَاتِلْهُمْ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللهِ، فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ فَقَدْ مَنَعُوا مِنْكَ دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ، إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللهِ».
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मैं यह झंडा एक ऐसे व्यक्ति को दूँगा, जो अल्लाह और उसके रसूल से प्यार करता हो और अल्लाह उसके हाथों विजय प्रदान करेगा।" उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मुझे उस दिन के सिवा कभी अमीर बनने की इच्छा नहीं हुई। उनका कहना है कि मैं इस उम्मीद में अपने आप को ऊँचा का रहा था कि शायद बुला लिया जाऊँ। लेकिन, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु को बुलाकर झंडा उनके हाथ में दिया और फ़रमायाः "चल पड़ो और उस समय तक न मुड़ो, जब तक अल्लाह तुम्हारे हाथों विजय प्रदान न कर दे।" चुनांचे, अली रज़ियल्लाहु अनहु थोड़ा-सा चले और उसके बाद रुक गए, लेकिन मुड़े नहीं, बल्कि ऊँची आवाज़ में बोले : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं किस बात पर लोगों से युद्ध करूँ? आपने फ़रमाया : "उनसे युद्ध करते रहो, यहाँ तक वे इस बात की गवाही दे दें अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं। यदि उन्होंने ऐसा किया, तो अपने रक्त तथा धन को तुमसे सुरक्षित कर लिया। यह और बात है कि उनपर इस गवाही का कोई अधिकार सिद्ध हो जाए। तथा उनका हिसाब अल्लाह के हवाले है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया हैदर्जास़ह़ीह़
तशरीह

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों से कहा कि अगले दिन मुसलमान मदीना के पास स्थित शहर ख़ैबर के यहूदियों पर विजयी होंगे। यह विजय उस व्यक्ति के हाथ पर होगी जिसे आप झंडा प्रदान करेंगे, झंडा से मुराद वह ध्वज है जिसे सेना प्रतीक के रूप में अपनाती है। इस व्यक्ति की एक विशेषता यह होगी कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है और अल्लाह और उसके रसूल उससे प्रेम करते हैं। उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि एक वही दिन था, जब उनके अंदर सरदारी पाने की इच्छा जागी थी और दिल में बुलाए जाने की ख़्वाहिश इस आशा में पैदा हुई थी कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा उल्लिखित अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मोहब्बत प्राप्त करने का सौभाग्य उनको मिल जाए। उन्होंने अपने शरीर को इस आशा में एड़ियों के सहारे ऊंचा किया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उनको देख लें, उनको बुला लें और झंडा प्रदान कर दें। लेकिन अल्लाह के नबी सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम ने अली बिन अबू तालिब रज़ियल्लाहु अनहु को बुला भेजा, उन्हें झंडा प्रदान किया और आदेश दिया कि सेना के साथ चल पड़ें और दुश्मन से मिलने के बाद उनके क़िलों पर वर्चस्व प्राप्त करने तक न आराम करें, न पीछे हटें और न ही युद्धविराम करें। चुनांचे अली रज़ियल्लाहु अनहु चल पड़े। एक बार रुके भी तो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश के उल्लंघन से बचने के लिए पीछे मुड़े नहीं, ख़ैबर की ओर मुँह करके ही ऊँची आवाज़ में पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैं लोगों से किस बात पर जंग करूँ? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया : उनसे उस समय तक जंग करो, जब तक इस बात की गवाही न दे दें कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूजे नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं। अगर उन्होंने तुम्हारे इस आह्वान को क़बूल कर लिया और इस्लाम में दाख़िल हो गए, तो उन्होंने अपने रक्त एवं अपने धन को तुमसे सुरक्षित कर लिया। हाँ, अगर वे ऐसा अपराध कर बैठें कि इस्लाम के प्रावधानों के आलोक में क़त्ल के हक़दार बन जाएँ, तो बात अलग है। बाक़ी, उनका हिसाब लेना अल्लाह का काम है।

फ़ायदे
  1. सहाबा इमारत (हुक्मरानी और नेतृत्व पाने ) को नापसंद करते थे, क्योंकि यह बड़ी ज़िम्मेवारी का काम होता है।
  2. किसी ऐसे कार्य के प्रति अपनी इच्छा ज़ाहिर करना जायज़ है, जिसमें भलाई पाए जाने की प्रबल संभावना है।
  3. शासक सेनापति का युद्ध के मैदान में अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में मार्गदर्शन करेगा।
  4. सहाबा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की वसीयतों का बढ़-चढ़कर पालन करते थे।
  5. जिस व्यक्ति को उसे सौंपी गई ज़िम्मेदारियाँ समझ में न आएँ, उसे उनके बारे में पूछ लेना चाहिए।
  6. मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अल्लाह के नबी होने के अनगिनत प्रमाणों में से एक प्रमाण यह है कि आपने ख़ैबर के यहूदियों पर विजयी होने की बात कही और विजयी हुए भी।
  7. अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश पर अविलंब अमल करने की प्रेरणा।
  8. जो व्यक्ति दोनों गवाहियाँ दे दे, उसे क़त्ल करना जायज़ नहीं है। हाँ, अगर उससे क़त्ल को अनिवार्य करने वाला कोई काम हो जाए, तो बात और है।
  9. इस्लामी नियम लोगों के ज़ाहिरी कार्यों के अनुसार जारी किए जाएँगे। उनके अन्दर छिपे रहस्यों का मालिक अल्लाह है।
  10. जिहाद का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों का इस्लाम में दाख़िल होना है।
हवाला

صحيح مسلم (4/ 1871) (2405). نزهة المتقين شرح رياض الصالحين، لمجموعة من الباحثين (1/ 127). شرح رياض الصالحين، لابن عثيمين (2/ 45). بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين، لسليم الهلالي (1/ 174).

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31 में से 8
31 हदीसें
  1. मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।
  2. ऐ अमीरुल मोमेनीन, अल्लाह तआला ने अपने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा हैः "خذ العفو وأمر بالعرف وأعرض عن الجاهلين" (अर्थात्, क्षमा करते रहें, भली बात का आदेश दें और अज्ञानियों से मुँह फेर लें।) और यह अज्ञानियों में हैं।
  3. मैं अल्लाह के निकट इस बात से बरी होने का एलान करता हूँ कि तुममें से कोई मेरा 'ख़लील' (अनन्य मित्र) हो। क्योंकि अल्लाह ने जैसे इबराहीम को 'ख़लील' बनाया था, वैसे मुझे भी 'ख़लील' बना लिया है
  4. अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अंसार के बारे में फ़रमाया : "उनसे वही प्रेम करेगा, जो मोमिन होगा और उनसे वही द्वेष रखेगा, जो मुनाफ़िक़ होगा। जो उनसे प्रेम करेगा, अल्लाह उससे प्रेम करेगा और जो उनसे द्वेष रखेगा, अल्लाह उससे द्वेष रखेगा।
  5. ऐ हारिसा की माता, जन्नत में बहुत- सी श्रेणियाँ हैं और तुम्हारे बेटे ने उसकी सबसे ऊँची श्रेणी अल-फ़िरदौस प्राप्त कर ली है।
  6. कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे।
  7. अगर मैं अपने इन खुजूरों को खाने तक जीवित रहा तो यह बड़ा लंबा जीवन होगा। अतः, अपने पास मौजूद खुजूरों को फेंक दिया और मुश्रिकों से लड़ने लगे, यहाँ तक कि मारे गए।
  8. मैं यह झंडा एक ऐसे व्यक्ति को दूँगा, जो अल्लाह और उसके रसूल से प्यार करता हो और अल्लाह उसके हाथों विजय प्रदान करेगा।
  9. यदि तुम्हें मालूम हो जाता कि महान अल्लाह के निकट तुम्हारे लिए क्या रखा है, तो तुम चाहते कि तुम्हारी निर्धनता तथा हाजतमंदी और बढ़ जाए।
  10. एक व्यक्ति सूरा कह्फ़ पढ़ रहा था और उसके निकट ही एक घोड़ा रस्सियों से बंधा हुआ था।
  11. तुझे दाऊद वंश की बाँसुरियों में एक बाँसुरी दी गई है
  12. बेशक मेरे हाथों मूतह की जंग में नौ तलवारें टूटी हैं, मेरे हाथ में केवल एक यमनी तलवार रह गई थी
  13. क्या मैं उस व्यक्ति से लज्जा न करूँ, जिससे फ़रिश्ते लज्जा करते हैं?
  14. तुम्हारे साथी हनज़ला को फ़रिश्ते स्नान दे रहे हैं, ज़रा उनकी पत्नी से पूछो तो सही कि बात क्या है?
  15. एक रात उसैद बिन हुज़ैर (रज़ियल्लाहु अनहु) अपने खलिहान में क़ुरआन पढ़ रहे थे कि उनका घोड़ा बिदकने लगा, उन्होंने फिर पढ़ना शुरू किया, तो फिर बिदकने लगा, उन्होेंने एक और बार पढ़ा, तो इस बार भी बिदकने लगा, उसैद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं: मुझे भय हुआ कि कहीं यह (मेरे पुत्र) यहया को कुचल न डाले, मैं उसके पास गया, तो देखा कि मेरे सर के ऊपर बादल की तरह कोई चीज़ है, जिसमें जैसे चिराग जल रहे हों, वह ऊपर की ओर चढ़ती गई, यहाँ तक कि नज़रों से ओझल हो गई
  16. यही वह सहाबी हैं, जिनके लिए अर्श हिल उठा, आकाश के द्वार खोले गए और उनके जनाज़े में सत्तर हज़ार फ़रिश्ते उपस्थित रहे, (इसके बावजूद) उन्हें क़ब्र के अंदर एक बार भींचा गया और फिर छोड़ दिया गया
  17. ऐ उमर! शैतान तुम से डरता है, मैं बैठा था, तो यह दफ़ बजाती रही, अबू बक्र आए तो बजाती रही, अली आए तो बजाती रही, उसमान आए तो भी बजाती रही, लेकिन ऐ उमर! जब तुम आए तो इसने दफ़ फेंक दिया
  18. तुम आज शाम और रातभर चलोगे, तो कल इनशा अल्लाह पानी के स्थान तक पहुँच जाओगे
  19. कोई ऐसा व्यक्ति जहन्नम हरगिज़ नहीं जाएगा, जो बद्र एवं हुदैबिया में शामिल रहा हो।
  20. ऐ अल्लाह, अनसार को क्षमा कर दे, अनसार के पुत्रों को क्षमा कर दे तथा अनसार के पुत्रों के पुत्रों को क्षमा कर दे।
  21. अल्लाह ने सत्य को उमर की ज़ुबान और दिल में रख दिया है।
  22. मैंने जाफ़र को देखा कि जन्नत मैं फ़रिश्तों के साथ उड़ रहे हैं।
  23. साद -रज़ियल्लाहु अन्हु- आए, तो नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "यह मेरे मामा हैं। कोई व्यक्ति मुझे अपना मामा भी दिखाए!।"
  24. मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को नहीं देखा कि साद -के बाद किसी पर अपने माँ-बाप को न्योछावर किया हो। मैंने आपको कहते हुए सुना हैः "तुम तीर चलाओ, तुम पर मेरे माँ-बाप फ़िदा हों।"
  25. ऐ अल्लाह, इसे सीधा रास्ता बताने वाला और सीधे रास्ते पर चलने वाला बना तथा इसके ज़रिए लोगों को सीधा रास्ता दिखा।
  26. अम्मार को जब भी दो बातों में से एक को चुनने का अधिकार दिया गया, तो उन्होंने उसे चुना, जो सत्य से अधिक निकट हो।
  27. आस के दोनों बेटे; अम्र और हिशाम, मोमिन हैं।
  28. तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तुम मेरी सुन्नत तथा नेक और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत पर चलते रहना।
  29. उसके पास जाओ और उसे बता दो कि वह जहन्नमी नहीं, बल्कि जन्नती है।
  30. तुम में सबसे उत्तम लोग मेरे ज़माने के लोग हैं, फिर वे जो उनके बाद आएँगे और फिर वे जो उनके बाद आएँगे।
  31. मैं तुम्हें अल्लाह से डरने तथा (अपने शासनकर्ता की) बात सुनने और मानने की वसीयत करता हूँ, चाहे तुम्हारा शासक एक दास ही क्यों न हो। क्योंकि तुममें से जो जीवित रहेगा, वह बहुत सारा मतभेद और टकराव देखेगा। उस समय तुम मेरी सुन्नत और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत को सीने से लगाए रहना

यहाँ हर हदीस, दर्जा, तशरीह और फ़ायदा ठीक वैसे ही दिखाया गया है जैसे HadeethEnc.com उसे शाया करता है, दोबारा इशाअत की उसकी शर्तों के तहत। दर्जे के साथ हुक्म लगाने वाले का नाम दर्ज नहीं है। तर्जुमे और तशरीहें उसके मुसन्निफ़ों की अपनी हैं, और कुछ में अहकाम बयान हुए हैं; सबील के जाँचने वालों ने इन्हें नहीं परखा है। अरबी हदीस ही असल टेक्स्ट है। स्रोत: HadeethEnc.com