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सहीह बुख़ारी

नंबर 7074

नंबर 7074किताब 92, नंबर 25
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَجُلاً، مَرَّ فِي الْمَسْجِدِ بِأَسْهُمٍ قَدْ أَبْدَى نُصُولَهَا، فَأُمِرَ أَنْ يَأْخُذَ بِنُصُولِهَا، لاَ يَخْدِشُ مُسْلِمًا‏.‏
Narrated Jabir:A man passed through the mosque and he was carrying arrows, the heads of which were exposed (protruding). The man was ordered (by the Prophet) to hold the iron heads so that it might not scratch (injure) any Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 92 · Afflictions and the End of the World

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।