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सहीह बुख़ारी

नंबर 6992

नंबर 6992किताब 91, नंबर 11
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، حَدَّثَنَا جُوَيْرِيَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَنَّ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، وَأَبَا، عُبَيْدٍ أَخْبَرَاهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ لَبِثْتُ فِي السِّجْنِ مَا لَبِثَ يُوسُفُ، ثُمَّ أَتَانِي الدَّاعِي لأَجَبْتُهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If I stayed in prison as long as Joseph stayed and then the messenger came, I would respond to his call (to go out of the prison)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 91 · Interpretation of Dreams

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।