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सहीह बुख़ारी

नंबर 587

नंबर 587किताब 9, नंबर 62
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، قَالَ سَمِعْتُ حُمْرَانَ بْنَ أَبَانَ، يُحَدِّثُ عَنْ مُعَاوِيَةَ، قَالَ إِنَّكُمْ لَتُصَلُّونَ صَلاَةً، لَقَدْ صَحِبْنَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَمَا رَأَيْنَاهُ يُصَلِّيهَا، وَلَقَدْ نَهَى عَنْهُمَا، يَعْنِي الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْعَصْرِ‏.‏
Narrated Muawiya:You offer a prayer which I did not see being offered by Allah's Messenger (ﷺ) when we were in his company and he certainly had forbidden it (i.e. two rak`at after the `Asr prayer)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।