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सहीह बुख़ारी

नंबर 578

नंबर 578किताब 9, नंबर 54
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ، قَالَ أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ عُقَيْلٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ، أَنَّ عَائِشَةَ، أَخْبَرَتْهُ قَالَتْ، كُنَّ نِسَاءُ الْمُؤْمِنَاتِ يَشْهَدْنَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلاَةَ الْفَجْرِ مُتَلَفِّعَاتٍ بِمُرُوطِهِنَّ، ثُمَّ يَنْقَلِبْنَ إِلَى بُيُوتِهِنَّ حِينَ يَقْضِينَ الصَّلاَةَ، لاَ يَعْرِفُهُنَّ أَحَدٌ مِنَ الْغَلَسِ‏.‏
Narrated `Aisha:The believing women covered with their veiling sheets used to attend the Fajr prayer with Allah's Apostle, and after finishing the prayer they would return to their home and nobody could recognize them because of darkness

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।