सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 574

नंबर 574किताब 9, नंबर 50
حَدَّثَنَا هُدْبَةُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنِي أَبُو جَمْرَةَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي مُوسَى، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى الْبَرْدَيْنِ دَخَلَ الْجَنَّةَ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ ابْنُ رَجَاءٍ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ أَنَّ أَبَا بَكْرِ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قَيْسٍ أَخْبَرَهُ بِهَذَا‏.‏ حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، عَنْ حَبَّانَ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا أَبُو جَمْرَةَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ‏.‏
Narrated Abu Bakr bin Abi Musa:My father said, "Allah's Messenger (ﷺ) said, 'Whoever prays the two cool prayers (`Asr and Fajr) will go to Paradise

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।