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सहीह बुख़ारी

नंबर 6853

नंबर 6853किताब 86, नंबर 75
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا يُونُسُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ مَا انْتَقَمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِنَفْسِهِ فِي شَىْءٍ يُؤْتَى إِلَيْهِ حَتَّى تُنْتَهَكَ مِنْ حُرُمَاتِ اللَّهِ فَيَنْتَقِمَ لِلَّهِ‏.‏
Narrated `Aisha:Allah's Messenger (ﷺ) never took revenge for his own self in any matter presented to him till Allah's limits were exceeded, in which case he would take revenge for Allah's sake

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 86 · Limits and Punishments set by Allah (Hudood)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।