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सहीह बुख़ारी

नंबर 6852

नंबर 6852किताब 86, नंबर 74
حَدَّثَنِي عَيَّاشُ بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّهُمْ كَانُوا يُضْرَبُونَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا اشْتَرَوْا طَعَامًا جِزَافًا أَنْ يَبِيعُوهُ فِي مَكَانِهِمْ حَتَّى يُئْوُوهُ إِلَى رِحَالِهِمْ‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:Those people who used to buy foodstuff at random (without weighing or measuring it) were beaten in the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ) if they sold it at the very place where they had bought it, till they carried it to their dwelling places

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 86 · Limits and Punishments set by Allah (Hudood)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।