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सहीह बुख़ारी

नंबर 6792

नंबर 6792किताब 86, नंबर 21
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَخْبَرَتْنِي عَائِشَةُ، أَنَّ يَدَ السَّارِقِ، لَمْ تُقْطَعْ عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ فِي ثَمَنِ مِجَنٍّ حَجَفَةٍ أَوْ تُرْسٍ‏.‏ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، مِثْلَهُ‏.‏
Narrated `Aisha:The hand of a thief was not cut off during the lifetime of the Prophet (ﷺ) except for stealing something equal to a shield in value. A similar hadith is narrated from `Aisha through another chain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 86 · Limits and Punishments set by Allah (Hudood)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।