सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6698

नंबर 6698किताब 83, नंबर 75
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ، أَخْبَرَهُ أَنَّ سَعْدَ بْنَ عُبَادَةَ الأَنْصَارِيَّ اسْتَفْتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي نَذْرٍ كَانَ عَلَى أُمِّهِ، فَتُوُفِّيَتْ قَبْلَ أَنْ تَقْضِيَهُ‏.‏ فَأَفْتَاهُ أَنْ يَقْضِيَهُ عَنْهَا، فَكَانَتْ سُنَّةً بَعْدُ‏.‏
Narrated Sa`id bin 'Ubada Al-Ansari:that he consulted the Prophet (ﷺ) about a vow that had been made by his mother who died without fulfilling it. The Prophet (ﷺ) gave his verdict that he should fulfill it on her behalf. The verdict became Sunna (i.e. the Prophet's tradition)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।