सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6697

नंबर 6697किताब 83, नंबर 74
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُقَاتِلٍ أَبُو الْحَسَنِ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ عُمَرَ، قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي نَذَرْتُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ أَنْ أَعْتَكِفَ لَيْلَةً فِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ أَوْفِ بِنَذْرِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Umar:`Umar said "O Allah's Messenger (ﷺ)! I vowed to perform I`tikaf for one night in Al-Masjid-al-Haram, during the Pre-Islamic Period of ignorance (before embracing Islam). "The Prophet (ﷺ) said, "Fulfill your vow." Ibn `Umar said to the lady, "Pray on her behalf." Ibn `Abbas said the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।