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सहीह बुख़ारी

नंबर 486

नंबर 486किताब 8, नंबर 133
وَأَنَّ ابْنَ عُمَرَ كَانَ يُصَلِّي إِلَى الْعِرْقِ الَّذِي عِنْدَ مُنْصَرَفِ الرَّوْحَاءِ، وَذَلِكَ الْعِرْقُ انْتِهَاءُ طَرَفِهِ عَلَى حَافَةِ الطَّرِيقِ، دُونَ الْمَسْجِدِ الَّذِي بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْمُنْصَرَفِ، وَأَنْتَ ذَاهِبٌ إِلَى مَكَّةَ‏.‏ وَقَدِ ابْتُنِيَ ثَمَّ مَسْجِدٌ، فَلَمْ يَكُنْ عَبْدُ اللَّهِ يُصَلِّي فِي ذَلِكَ الْمَسْجِدِ، كَانَ يَتْرُكُهُ عَنْ يَسَارِهِ وَوَرَاءَهُ، وَيُصَلِّي أَمَامَهُ إِلَى الْعِرْقِ نَفْسِهِ، وَكَانَ عَبْدُ اللَّهِ يَرُوحُ مِنَ الرَّوْحَاءِ، فَلاَ يُصَلِّي الظُّهْرَ حَتَّى يَأْتِيَ ذَلِكَ الْمَكَانَ فَيُصَلِّي فِيهِ الظُّهْرَ، وَإِذَا أَقْبَلَ مِنْ مَكَّةَ فَإِنْ مَرَّ بِهِ قَبْلَ الصُّبْحِ بِسَاعَةٍ أَوْ مِنْ آخِرِ السَّحَرِ عَرَّسَ حَتَّى يُصَلِّيَ بِهَا الصُّبْحَ‏.‏
See translation for hadith 484 above

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayers (Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।