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सहीह बुख़ारी

नंबर 485

नंबर 485किताब 8, नंबर 132
وَأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى حَيْثُ الْمَسْجِدُ الصَّغِيرُ الَّذِي دُونَ الْمَسْجِدِ الَّذِي بِشَرَفِ الرَّوْحَاءِ، وَقَدْ كَانَ عَبْدُ اللَّهِ يَعْلَمُ الْمَكَانَ الَّذِي كَانَ صَلَّى فِيهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ثَمَّ عَنْ يَمِينِكَ حِينَ تَقُومُ فِي الْمَسْجِدِ تُصَلِّي، وَذَلِكَ الْمَسْجِدُ عَلَى حَافَةِ الطَّرِيقِ الْيُمْنَى، وَأَنْتَ ذَاهِبٌ إِلَى مَكَّةَ، بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْمَسْجِدِ الأَكْبَرِ رَمْيَةٌ بِحَجَرٍ أَوْ نَحْوُ ذَلِكَ‏.‏
See translation for hadith 484 above

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayers (Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।