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सहीह बुख़ारी

नंबर 6303

नंबर 6303किताब 79, नंबर 75
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ عَمْرٌو قَالَ ابْنُ عُمَرَ وَاللَّهِ مَا وَضَعْتُ لَبِنَةً عَلَى لَبِنَةٍ، وَلاَ غَرَسْتُ نَخْلَةً، مُنْذُ قُبِضَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ فَذَكَرْتُهُ لِبَعْضِ أَهْلِهِ قَالَ وَاللَّهِ لَقَدْ بَنَى بَيْتًا‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ قُلْتُ فَلَعَلَّهُ قَالَ قَبْلَ أَنْ يَبْنِيَ‏.‏
Narrated `Amr:Ibn `Umar said, "By Allah, I have not put a brick over a brick (i.e. constructed a building) or planted any date-palm tree since the death of the Prophet." Sufyan (the sub narrator) said, "I told this narration (of Ibn `Umar) to one of his (Ibn `Umar's) relatives, and he said, 'By Allah, he did build (something.' "Sufyan added, "I said, 'He must have said (the above narration) before he built

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।