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सहीह बुख़ारी

नंबर 6302

नंबर 6302किताब 79, नंबर 74
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ ـ هُوَ ابْنُ سَعِيدٍ ـ عَنْ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ رَأَيْتُنِي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بَنَيْتُ بِيَدِي بَيْتًا، يُكِنُّنِي مِنَ الْمَطَرِ، وَيُظِلُّنِي مِنَ الشَّمْسِ، مَا أَعَانَنِي عَلَيْهِ أَحَدٌ مِنْ خَلْقِ اللَّهِ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:During the life-time of the Prophet (ﷺ) I built a house with my own hands so that it might protect me from the rain and shade me from the sun; and none of Allah's creatures assisted me in building it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।