सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6274

नंबर 6274किताब 79, नंबर 48
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا بِشْرٌ، مِثْلَهُ، وَكَانَ مُتَّكِئًا فَجَلَسَ فَقَالَ ‏ "‏ أَلاَ وَقَوْلُ الزُّورِ ‏"‏‏.‏ فَمَا زَالَ يُكَرِّرُهَا حَتَّى قُلْنَا لَيْتَهُ سَكَتَ‏.‏
Narrated Bishr:as above (No. 290) adding: The Prophet (ﷺ) was reclining (leaning) and then he sat up saying, "And I warn you against giving a false statement." And he kept on saying that warning so much so that we said, "Would that he had stopped

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।