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सहीह बुख़ारी

नंबर 6273

नंबर 6273किताब 79, नंबर 47
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، حَدَّثَنَا الْجُرَيْرِيُّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَلاَ أُخْبِرُكُمْ بِأَكْبَرِ الْكَبَائِرِ ‏"‏‏.‏ قَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ‏.‏ قَالَ ‏"‏ الإِشْرَاكُ بِاللَّهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Bakra:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Shall I inform you of the biggest of the great sins?" They said, "Yes, O Allah's Apostle!" He said, "To join partners in worship with Allah, and to be undutiful to one's parents

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।