सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6068

नंबर 6068किताब 78, नंबर 98
حَدَّثَنَا ابْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، بِهَذَا وَقَالَتْ دَخَلَ عَلَىَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا وَقَالَ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ مَا أَظُنُّ فُلاَنًا وَفُلاَنًا يَعْرِفَانِ دِينَنَا الَّذِي نَحْنُ عَلَيْهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Al-Laith:`Aisha said "The Prophet (ﷺ) entered upon me one day and said, 'O `Aisha! I do not think that so-and-so and so-and-so know anything of our religion which we follow

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।