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सहीह बुख़ारी

नंबर 6067

नंबर 6067किताब 78, नंबर 97
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عُفَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ عُقَيْلٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا أَظُنُّ فُلاَنًا وَفُلاَنًا يَعْرِفَانِ مِنْ دِينِنَا شَيْئًا ‏"‏‏.‏ قَالَ اللَّيْثُ كَانَا رَجُلَيْنِ مِنَ الْمُنَافِقِينَ‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) said, "I do not think that so-and-so and so-and-so know anything of our religion." (And Al-Laith said, "These two persons were among the hypocrites)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।