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सहीह बुख़ारी

नंबर 6038

नंबर 6038किताब 78, नंबर 68
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، سَمِعَ سَلاَّمَ بْنَ مِسْكِينٍ، قَالَ سَمِعْتُ ثَابِتًا، يَقُولُ حَدَّثَنَا أَنَسٌ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ خَدَمْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَشْرَ سِنِينَ، فَمَا قَالَ لِي أُفٍّ‏.‏ وَلاَ لِمَ صَنَعْتَ وَلاَ أَلاَّ صَنَعْتَ‏.‏
Narrated Anas:I served the Prophet (ﷺ) for ten years, and he never said to me, "Uf" (a minor harsh word denoting impatience) and never blamed me by saying, "Why did you do so or why didn't you do so?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।