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सहीह बुख़ारी

नंबर 5915

नंबर 5915किताब 77, नंबर 130
حَدَّثَنِي حِبَّانُ بْنُ مُوسَى، وَأَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا يُونُسُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُهِلُّ مُلَبِّدًا يَقُولُ ‏ "‏ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ ‏"‏‏.‏ لاَ يَزِيدُ عَلَى هَؤُلاَءِ الْكَلِمَاتِ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:I heard Allah's Messenger (ﷺ), while he was in the state of Ihram and his hair was stuck together with gum, saying, "Labbaik, Allahumma Labbaik, Labbaik La Sharika laka Labbaik. Inn-al-Hamda Wan-Ni'mata Laka wal-Mulk, La Sharika Lak." He did not add anything to those words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 77 · Dress

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।