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सहीह बुख़ारी

नंबर 5542

नंबर 5542किताब 72, नंबर 67
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ دَخَلْتُ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِأَخٍ لِي يُحَنِّكُهُ، وَهْوَ فِي مِرْبَدٍ لَهُ، فَرَأَيْتُهُ يَسِمُ شَاةً ـ حَسِبْتُهُ قَالَ ـ فِي آذَانِهَا‏.‏
Narrated Anas:I brought a brother of mine to the Prophet (ﷺ) to do Tahnik for him while the Prophet (ﷺ) was in a sheep fold of his, and I saw him branding a sheep. (The sub-narrator said: I think Anas said, branding it on the ear)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 72 · Hunting, Slaughtering

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।