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सहीह बुख़ारी

नंबर 5054

नंबर 5054किताब 66, नंबर 79
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ شَيْبَانَ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، مَوْلَى بَنِي زُهْرَةَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ ـ قَالَ وَأَحْسِبُنِي قَالَ ـ سَمِعْتُ أَنَا مِنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ اقْرَإِ الْقُرْآنَ فِي شَهْرٍ ‏"‏‏.‏ قُلْتُ إِنِّي أَجِدُ قُوَّةً حَتَّى قَالَ ‏"‏ فَاقْرَأْهُ فِي سَبْعٍ وَلاَ تَزِدْ عَلَى ذَلِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Amr:Allah's Messenger (ﷺ) said to me, "Recite the whole Qur'an in one month's time." I said, "But I have power (to do more than that)." Allah's Messenger (ﷺ) said, "Then finish the recitation of the Qur'an in seven days, and do not finish it in less than this period

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।