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सहीह बुख़ारी

नंबर 5053

नंबर 5053किताब 66, नंबर 78
حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ لِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فِي كَمْ تَقْرَأُ الْقُرْآنَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Amr:The Prophet (ﷺ) asked me, "How long does it take you to finish the recitation of the whole Qur'an?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।